Strait of Hormuz Crisis: भारत ने रूस से खरीदा 6 करोड़ बैरल तेल, ऊर्जा संकट से निपटने की बड़ी रणनीति

होर्मुज संकट के बीच भारत ने रूस से 6 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदकर ऊर्जा सप्लाई सुरक्षित की। जानिए कैसे भारत ने वैश्विक संकट में बड़ा कदम उठाया।

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने रूस से करीब 6 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीद लिया है, जिससे आने वाले समय में तेल सप्लाई पर पड़ने वाले संभावित संकट को काफी हद तक टाला जा सकता है।

⚡ क्यों जरूरी था यह फैसला?

होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, मौजूदा संघर्ष के कारण बाधित है।

  • कई तेल टैंकर इस रूट पर फंसे हुए हैं
  • सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है
  • वैश्विक बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव

ऐसे में भारत ने वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख करते हुए रूस से तेल खरीदने का फैसला किया।

🇷🇺 रूस बना भरोसेमंद साझेदार

भारत और Russia के बीच लंबे समय से ऊर्जा सहयोग रहा है।

  • 6 करोड़ बैरल कच्चे तेल की डील
  • ब्रेंट क्रूड से 5-15 डॉलर प्रीमियम पर खरीद
  • यह मात्रा भारत की एक महीने की जरूरत के बराबर

यह खरीद भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

कंपनियों ने फिर बढ़ाई खरीद

रिपोर्ट के अनुसार:

  • Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited (MRPL)
  • Hindustan Mittal Energy Limited

जैसी कंपनियों ने रूसी तेल की खरीद फिर से शुरू कर दी है।

पहले अमेरिकी दबाव के चलते खरीद कम कर दी गई थी, लेकिन अब हालात बदलने के बाद फिर से रूस की ओर रुख किया गया है।

अमेरिका की छूट का फायदा

अमेरिका द्वारा सीमित छूट मिलने के बाद भारत ने तेजी से निर्णय लेते हुए रूसी तेल खरीद लिया।

इस छूट के तहत:

  • 5 मार्च से पहले लोड किए गए तेल की डिलीवरी की अनुमति
  • बाद में अन्य खेपों पर भी विस्तार

इससे भारत को सप्लाई बनाए रखने में बड़ी राहत मिली।

भारत पहुंच रही लगातार ऊर्जा खेप

संकट के बावजूद भारत में ऊर्जा आपूर्ति जारी है:

  • रूसी टैंकर MT Aqua Titan भारत पहुंचा
  • एलपीजी से भरे जहाज New Mangalore Port पहुंचे
  • गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर भी तेल टैंकर सफलतापूर्वक पहुंचे

सरकार के अनुसार, सभी भारतीय जहाज और नाविक सुरक्षित हैं और किसी भी बंदरगाह पर जाम की स्थिति नहीं है।

सप्लाई के अन्य विकल्प भी तलाश रहा भारत

भारत सिर्फ रूस पर निर्भर नहीं रहना चाहता।

  • वेनेजुएला से भी तेल आयात बढ़ने की संभावना
  • सऊदी अरब और इराक से सप्लाई पर नजर
  • सप्लाई चेन को विविध बनाने की रणनीति

क्यों अहम है भारत का यह कदम?

यह फैसला दिखाता है कि भारत:

  • किसी एक रूट या देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता
  • संकट के समय तेज निर्णय लेने में सक्षम है
  • ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है

होर्मुज संकट के बीच भारत ने रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा सप्लाई को सुरक्षित कर लिया है। यह कदम न केवल तत्काल संकट को टालता है, बल्कि भविष्य के लिए भी भारत की मजबूत रणनीति को दर्शाता है।