UP Assembly Seats Increase: क्या उत्तर प्रदेश में 403 से बढ़कर 605 होंगी विधानसभा सीटें? जानें पूरा सच

UP Assembly Seats Increase: उत्तर प्रदेश में 403 से बढ़कर 605 विधानसभा सीटें होने की चर्चा तेज। जानें परिसीमन, आबादी और 2027 चुनाव पर इसका असर।

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एक नई चर्चा ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है—क्या राज्य में विधायकों की संख्या 403 से बढ़ाकर 605 की जा सकती है? हालांकि, यह बदलाव 2027 चुनाव में लागू नहीं होगा, लेकिन भविष्य की राजनीति पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

दरअसल, केंद्र सरकार के नारी वंदन अधिनियम और आगामी परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया के तहत लोकसभा और विधानसभा सीटों में संभावित वृद्धि पर विचार किया जा रहा है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर 120 और विधानसभा सीटें 403 से बढ़कर 605 होने की संभावना जताई जा रही है।

क्यों बढ़ सकती हैं सीटें?

आबादी में लगातार वृद्धि इस चर्चा की मुख्य वजह है।

  • 1952 में यूपी की आबादी लगभग 6.32 करोड़ थी और 347 विधानसभा सीटें थीं।
  • 1973 के परिसीमन के बाद सीटें बढ़कर 403 हो गईं।
  • 2011 तक आबादी करीब 20 करोड़ पहुंच गई, लेकिन सीटों की संख्या वही रही।

वर्तमान में एक विधानसभा सीट पर औसतन लगभग 4.95 लाख लोग आते हैं, जो प्रतिनिधित्व के लिहाज से काफी अधिक है।

605 सीटें होने पर क्या बदलेगा?

अगर सीटें बढ़कर 605 होती हैं, तो प्रति विधानसभा क्षेत्र आबादी घटकर लगभग 3.30 लाख रह जाएगी। इससे प्रतिनिधित्व बेहतर होगा और स्थानीय मुद्दों को अधिक प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा।

किन क्षेत्रों में पड़ेगा असर?

अभी साहिबाबाद, लोनी और मुरादनगर जैसे क्षेत्र सबसे अधिक आबादी वाले विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां मतदाताओं की संख्या बहुत ज्यादा है। वहीं महोबा और सीसामऊ जैसे क्षेत्र अपेक्षाकृत छोटे हैं। सीटें बढ़ने से इन असंतुलनों को संतुलित किया जा सकेगा।

कब लागू हो सकता है यह बदलाव?

विशेषज्ञों के मुताबिक, परिसीमन प्रक्रिया के बाद यह बदलाव 2032 के आसपास लागू हो सकता है। यानी 2027 विधानसभा चुनाव पुराने 403 सीटों पर ही होंगे।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की चर्चा फिलहाल एक संभावित योजना है, जिसका उद्देश्य बढ़ती आबादी के अनुसार बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। हालांकि, इसके लागू होने में अभी समय है, लेकिन यह भविष्य की राजनीति को पूरी तरह बदल सकता है।