Share Market Today: सेंसेक्स 706 अंक और निफ्टी 188 अंक टूटा. शेयर बाजार में भारी बिकवाली से निवेशकों के ₹6 लाख करोड़ डूबे. जानिए बाजार गिरने की बड़ी वजहें.
लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों में बढ़ी चिंता
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 12 मई 2026 को लगातार दूसरे दिन भारी बिकवाली देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी बड़े नुकसान के साथ ट्रेड करते नजर आए. सुबह करीब 10 बजे बीएसई सेंसेक्स 706 अंक टूटकर 75,309 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 188 अंक गिरकर 23,627.50 पर कारोबार करता दिखा.
इस तेज गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹6 लाख करोड़ की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. बाजार पर बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की कमजोरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिका-ईरान तनाव का सीधा असर दिखाई दिया.
आईटी और फाइनेंशियल शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
आज के कारोबार में सबसे ज्यादा बिकवाली आईटी सेक्टर में देखने को मिली. निफ्टी आईटी इंडेक्स 3 फीसदी से ज्यादा टूट गया.
इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक जैसे बड़े आईटी शेयरों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा रियल्टी, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में भी दबाव देखने को मिला.
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है.
रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है. मंगलवार को डॉलर पहली बार ₹95.50 के स्तर के पार चला गया.
वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 10 फीसदी कमजोर हो चुका है. हालांकि, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार करीब 690 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर बने हुए हैं, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को बाजार में हस्तक्षेप करने की कुछ राहत मिल सकती है.
रुपये की कमजोरी का असर सीधे आयात लागत और महंगाई पर पड़ता है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है.
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 0.93 फीसदी बढ़कर 105.2 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई.
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है. ऐसे में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें देश की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गई हैं. इससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है.
FIIs की भारी बिकवाली से टूटा बाजार
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार से ₹8,437.56 करोड़ की निकासी की.
लगातार विदेशी बिकवाली से बाजार पर दबाव बढ़ता जा रहा है. निवेशकों का मानना है कि जब तक विदेशी निवेशकों की वापसी नहीं होती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है.
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी वैश्विक चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि ईरान के साथ संघर्षविराम बेहद कमजोर स्थिति में है और तेहरान के प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिसका असर सीधे भारतीय बाजारों पर पड़ेगा.
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी
भारतीय बाजार के साथ-साथ एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली. दक्षिण कोरिया का Kospi और चीन का Shanghai SSE Composite इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए.
वहीं, अमेरिकी बाजारों के लिए Wall Street Futures भी कमजोर शुरुआत के संकेत दे रहे हैं, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ गई है.
निवेशकों के लिए क्या है आगे का संकेत?
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है. कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की चाल, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगी.
लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने के बजाय मजबूत कंपनियों पर नजर बनाए रखने और सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है.

