प्रतीक यादव की मौत के बाद अखिलेश यादव के ‘जांच होनी चाहिए’ और ‘कानूनी रास्ता’ वाले बयान से साजिश की अटकलें तेज हो गई हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पर सबकी नजर टिकी है।
अखिलेश यादव के बयान ने खड़े किए कई सवाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
लखनऊ: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की अचानक मौत ने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अभी तक प्रशासन या पुलिस की ओर से किसी साजिश की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन अखिलेश यादव के बयान ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।
प्रतीक यादव की मौत के बाद सबसे ज्यादा चर्चा अखिलेश यादव के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा कि “जो कानूनी प्रक्रिया है, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी” और “जांच होनी चाहिए।” उनके इस बयान के बाद अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या परिवार इस मौत को सामान्य नहीं मान रहा है?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
प्रतीक यादव की मौत के बाद अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया सामान्य मामलों की तुलना में ज्यादा गंभीरता और सतर्कता के साथ पूरी की गई।
बताया जा रहा है कि केजीएमयू के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। यही वजह है कि मामले को लेकर संदेह और चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अखिलेश यादव करीब 25 मिनट तक पोस्टमार्टम हाउस के अंदर मौजूद रहे। बाहर निकलने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि परिवार कानून के अनुसार आगे कदम उठाएगा और मामले की जांच जरूरी है।
क्या परिवार को किसी साजिश की आशंका?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का बयान बेहद महत्वपूर्ण है। आमतौर पर ऐसी परिस्थितियों में परिवार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पर ध्यान देता है, लेकिन यहां कानूनी कार्रवाई और जांच पर जोर दिया जा रहा है।
हालांकि परिवार की ओर से सीधे तौर पर किसी साजिश का आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन “जांच होनी चाहिए” जैसे शब्दों ने कई अटकलों को जन्म दे दिया है।
समाजवादी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग भी उठाई है। सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या यह मामला सामान्य मौत से अलग हो सकता है?
कारोबार में नुकसान और मानसिक तनाव का जिक्र
अखिलेश यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि करीब दो महीने पहले उनकी प्रतीक यादव से मुलाकात हुई थी। उस दौरान उन्होंने प्रतीक को स्वास्थ्य का ध्यान रखने और कारोबार पर फोकस करने की सलाह दी थी।
उन्होंने यह भी कहा कि कभी-कभी कारोबार में नुकसान होने पर लोग काफी परेशान हो जाते हैं। इसके बाद अब आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव जैसे पहलुओं पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ समय में प्रतीक यादव के कारोबार में उतार-चढ़ाव की बातें सामने आई थीं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि उन्होंने अपने कारोबारी साझेदारों पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे।
पुलिस और प्रशासन की जांच जारी
फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटे हुए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिपोर्ट में कोई संदिग्ध तथ्य सामने आता है, तो आगे एफआईआर दर्ज होने और विस्तृत जांच की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस बीच, पूरे मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं और विपक्ष सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

