सत्य निकेतन हादसा: MCD के 5 अधिकारी सस्पेंड, डिप्टी कमिश्नर से JE तक कार्रवाई; देखें पूरी लिस्ट

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद MCD ने बड़ी कार्रवाई की है। साउथ जोन के 5 अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। जानें निलंबित अधिकारियों की पूरी लिस्ट और जिम्मेदारी।

Delhi Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने के मामले में नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की है। हादसे के करीब 24 घंटे बाद MCD के साउथ जोन में तैनात 5 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें डिप्टी कमिश्नर से लेकर जूनियर इंजीनियर तक शामिल हैं।

दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर पहली बड़ी कार्रवाई सामने आई है। दिल्ली नगर निगम (MCD) के साउथ जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।

बताया गया है कि यह कार्रवाई MCD कमिश्नर के आदेश पर की गई। निलंबित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित रहने तक यह आदेश प्रभावी रहेगा। MCD के विजिलेंस विभाग की ओर से संबंधित अधिकारियों के लिए अलग-अलग सस्पेंशन ऑर्डर जारी किए गए हैं।

MCD के किन 5 अधिकारियों को किया गया सस्पेंड?

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद निलंबित किए गए अधिकारियों की सूची इस प्रकार है:

  • राकेश कुमार — डिप्टी कमिश्नर
  • रणवीर सिंह — सुपरिटेंडिंग इंजीनियर (SE)
  • ललित कुमार गोयल — एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, बिल्डिंग (EE)
  • सुनील चौहान — असिस्टेंट इंजीनियर, बिल्डिंग (AE)
  • आशीष कुमार — जूनियर इंजीनियर (JE)

इन सभी अधिकारियों का संबंध MCD के साउथ जोन से बताया गया है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर कार्रवाई

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देशों के अनुसार सत्य निकेतन की घटना के संबंध में MCD के पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया है।

बयान के मुताबिक, कार्रवाई में डिप्टी कमिश्नर, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर स्तर के अधिकारी शामिल हैं।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब सत्य निकेतन में इमारत गिरने के बाद बिल्डिंग की स्थिति, निर्माण नियमों के पालन और संबंधित विभागों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

निलंबित अधिकारियों की क्या होती है जिम्मेदारी?

MCD के बिल्डिंग विभाग की जिम्मेदारी में निर्माण गतिविधियों की निगरानी और भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई जैसे काम शामिल होते हैं।

यदि किसी इमारत में बिना मंजूरी निर्माण हुआ हो या स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण किए जाने की बात सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, किस अधिकारी की वास्तविक जिम्मेदारी कितनी थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

आमतौर पर AE और JE स्तर के अधिकारी क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों की शुरुआती और मौके पर निगरानी से जुड़े होते हैं। वहीं EE और SE स्तर पर क्षेत्रीय निगरानी और संबंधित मामलों में कार्रवाई की जिम्मेदारी होती है।

डिप्टी कमिश्नर जोन के प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हैं।

MCD कमिश्नर ने हादसे के बाद क्या कहा?

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम के कमिश्नर संजीव खिरवार ने घटना को लेकर जानकारी दी थी।

उन्होंने बताया कि हादसे में सात लोगों की जान जाने की बात सामने आई है। उनके मुताबिक, गिरी हुई इमारत के बगल वाली इमारत भी कमजोर हो गई थी और उसे मजबूत करने का काम रातभर किया गया।

कमिश्नर के अनुसार, कमजोर इमारत को अगले एक-दो दिनों में योजनाबद्ध तरीके से गिराने की कार्रवाई की जा सकती है।

1970 के दशक में बनी थी इमारत

MCD कमिश्नर के मुताबिक, हादसे का शिकार हुई इमारत 1970 के दशक में बनी थी।

उन्होंने बताया कि इमारत के मालिक से संबंधित दस्तावेज प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड से मिले हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, मालिक ने पिछले साल प्रॉपर्टी टैक्स जमा किया था और वर्ष 2007 में कन्वर्जन चार्ज भी दिया था।

फिलहाल पुलिस की ओर से इमारत के मालिक का पता लगाने की कोशिश किए जाने की बात कही गई है।

इमारत को कभी नोटिस क्यों नहीं दिया गया?

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल इमारत की निगरानी और पहले की गई कार्रवाई को लेकर उठ रहा है।

MCD कमिश्नर के मुताबिक, 1970 के दशक में बनी इस इमारत को पहले कभी कोई नोटिस नहीं दिया गया था और न ही इसे सील किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि इमारत को लेकर MCD के पास कोई शिकायत नहीं मिली थी।

अब सवाल यह है कि अगर इमारत पुरानी थी और उसकी हालत को लेकर खतरा मौजूद था, तो क्या नियमित निरीक्षण की व्यवस्था पर्याप्त थी? क्या आसपास की अन्य पुरानी इमारतों की भी जांच की जाएगी?

हादसे के बाद अब आगे क्या?

सत्य निकेतन हादसे के बाद पांच MCD अधिकारियों का निलंबन प्रशासन की ओर से पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। लेकिन असली सवाल अब जांच के नतीजों पर है।

क्या इमारत में नियमों का उल्लंघन हुआ था? क्या निर्माण या भवन के इस्तेमाल को लेकर कोई अनियमितता थी? क्या संबंधित विभागों की ओर से निगरानी में चूक हुई? इन सभी सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

फिलहाल, पांच अधिकारियों के निलंबन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सत्य निकेतन हादसे की जिम्मेदारी आखिर किस स्तर पर तय होती है और क्या दिल्ली में पुरानी व जोखिम वाली इमारतों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की जाती है।