संजय यादव कौन हैं? तेजस्वी यादव के करीबी और RJD के मुख्य रणनीतिकार संजय यादव पर रोहिणी आचार्य के गंभीर आरोपों के बाद लालू परिवार में विवाद गहरा गया है। जानिए उनकी राजनीतिक भूमिका और विवादों की पूरी कहानी।
बिहार राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने अचानक परिवार और राजनीति दोनों से दूरी बनाने का ऐलान कर दिया। रोहिणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि उन्हें यह कदम उठाने के लिए रमीज़ और संजय यादव ने मजबूर किया। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल उठने लगा—आखिर संजय यादव कौन हैं, और वे लालू परिवार के विवादों के केंद्र में क्यों हैं?
कौन हैं संजय यादव?
संजय यादव एक जाने-माने राजनीतिक रणनीतिकार, सलाहकार और वर्तमान में राजद (RJD) के राज्यसभा सांसद हैं। हरियाणा के रहने वाले संजय यादव वर्ष 2012 में RJD से जुड़े और धीरे-धीरे पार्टी की रणनीति तैयार करने वाले प्रमुख दिमागों में शामिल हो गए।
RJD से पहले वे समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के लिए राजनीतिक सलाहकार के रूप में काम कर चुके हैं। राजनीति में उनका अनुभव और रणनीतिक सोच उन्हें बिहार की सियासत में एक प्रभावशाली चेहरा बनाती है।
तेजस्वी यादव के सबसे करीबी सलाहकार
संजय यादव को लंबे समय से तेजस्वी यादव का सबसे विश्वसनीय रणनीतिकार माना जाता है। कहा जाता है कि चुनावी रणनीति, सीट बंटवारा, उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक निर्णयों में उनकी भूमिका बेहद अहम रहती है।
पार्टी के कई नेता उन्हें RJD का “चाणक्य” भी कहने लगे हैं।
तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच दरार का कारण?
संजय यादव चर्चा में इसलिए हैं क्योंकि RJD के अंदरूनी विवादों में उनका नाम लगातार उछल रहा है।
तेज प्रताप यादव, जो लालू परिवार में सबसे बड़े बेटे हैं, संजय यादव को बार-बार “जयचंद” कहकर संबोधित करते हैं।
यह आरोप है कि:
संजय यादव ने लालू यादव को सलाह दी कि तेज प्रताप को पार्टी से बाहर कर देना चाहिए।
इसी वजह से दोनों भाइयों के रिश्तों में दूरी बढ़ी।
तेज प्रताप का मानना है कि उनका राजनीतिक नुकसान संजय यादव की रणनीतियों का नतीजा है।
2025 बिहार चुनाव में RJD की हार और संजय पर सवाल
2025 बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी तीसरे स्थान पर पहुंच गई।
इतने खराब प्रदर्शन के बाद RJD की रणनीति पर सवाल उठ रहा है, और इसका असर सीधे-सीधे संजय यादव की भूमिका पर पड़ा है।
पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज है कि चुनावी गणित और सीट चयन में कई गलतियां हुईं, जिसकी जिम्मेदारी संजय यादव की रणनीति पर डाली जा रही है।
रोहिणी का आरोप—क्यों बढ़ा विवाद?
चुनाव नतीजों के बाद रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में संजय यादव का नाम लेते हुए परिवार और राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया।
उन्होंने कहा कि:
“मुझे ये सब करने के लिए रमीज़ और संजय यादव ने कहा है।”
इस बयान से लालू परिवार में मतभेद और खुलकर सामने आ गया और संजय यादव फिर एक बार विवादों के केंद्र में आ गए।
निष्कर्ष
संजय यादव RJD के सबसे शक्तिशाली रणनीतिकारों में से एक हैं, जिनका प्रभाव पार्टी के हर बड़े फैसले पर देखा जाता है।
लेकिन RJD की खराब चुनावी प्रदर्शन और लालू परिवार में बढ़ते विवादों ने उन्हें अचानक सुर्खियों में ला दिया है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या RJD नेतृत्व संजय यादव पर भरोसा कायम रखेगा या पार्टी के भीतर नए समीकरण बनेंगे।

