कम बारिश से बढ़ेगी महंगाई? दूध, दाल, सब्जियां और खाद्य तेल के दाम बढ़ने की आशंका

कमजोर मानसून का असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार कम बारिश से दूध, दाल, सब्जियां और खाद्य तेल महंगे हो सकते हैं। जानिए सरकार की तैयारी, महंगाई की वजह और किन चीजों के दाम बढ़ने की संभावना है।

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में मानसून की धीमी रफ्तार अब आम लोगों के किचन बजट पर भी असर डाल सकती है। मौसम विभाग द्वारा सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताए जाने के बाद कृषि विशेषज्ञों ने खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका व्यक्त की है। यदि आने वाले हफ्तों में बारिश सामान्य नहीं हुई तो दूध, दाल, सब्जियां और खाद्य तेल जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें महंगी हो सकती हैं।

सरकार ने संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई और अगस्त की बारिश यह तय करेगी कि महंगाई कितनी बढ़ेगी और इसका असर आम लोगों की जेब पर कितना पड़ेगा।

कम बारिश से क्यों बढ़ेगी महंगाई?

भारत की कृषि व्यवस्था का बड़ा हिस्सा अब भी मानसून पर निर्भर है। यदि बारिश सामान्य से कम होती है तो खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होती है। साथ ही पशुओं के लिए हरे चारे की कमी भी बढ़ जाती है, जिससे कृषि और डेयरी सेक्टर दोनों पर दबाव बढ़ता है।

मौसम विभाग ने जून से सितंबर के बीच सामान्य का लगभग 90 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान जताया है। यदि बारिश लंबे समय तक कम रहती है तो खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे बाजार में कीमतें बढ़ने की संभावना है।

दूध और डेयरी उत्पाद हो सकते हैं महंगे

कम बारिश का सबसे बड़ा असर पशुपालन पर पड़ सकता है। हरे चारे की कमी होने से पशुपालकों की लागत बढ़ेगी और दूध उत्पादन में गिरावट आ सकती है।

उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि मानसून कमजोर रहा तो दूध की कीमतों में 3 से 4 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर केवल दूध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दही, पनीर, घी, मक्खन और चीज जैसे डेयरी उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।

दाल और खाद्य तेल की कीमतों पर भी पड़ेगा असर

अरहर (तूर), उड़द और अन्य खरीफ दालों की खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है। बारिश कम होने पर उत्पादन घट सकता है, जिससे बाजार में दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

इसी तरह सोयाबीन और अन्य तिलहन फसलों की बुवाई प्रभावित होने पर देश को खाद्य तेलों के आयात पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है। यदि आयात महंगा हुआ तो खाद्य तेलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी संभव है।

सब्जियां भी बिगाड़ सकती हैं किचन का बजट

टमाटर, हरी सब्जियां और अन्य जल्दी खराब होने वाली फसलों की खेती भी पर्याप्त बारिश पर निर्भर करती है। कम वर्षा होने से इनकी पैदावार और आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

ऐसी स्थिति में स्थानीय मंडियों और खुदरा बाजारों में सब्जियों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। मक्का समेत कुछ अन्य खरीफ फसलें भी प्रभावित होने की आशंका है।

हालांकि फिलहाल गेहूं और चावल की उपलब्धता को लेकर ज्यादा चिंता नहीं जताई जा रही है, क्योंकि इन फसलों के लिए पर्याप्त सरकारी भंडार और सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध हैं।

सरकार ने शुरू की तैयारी

संभावित खाद्य संकट और महंगाई से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर वैकल्पिक फसल योजना तैयार करनी शुरू कर दी है।

किसानों को कम पानी में होने वाली फसलें उगाने की सलाह दी जा रही है, ताकि उत्पादन पर कम से कम असर पड़े। सरकार लगातार मानसून की स्थिति और कृषि गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।

जुलाई-अगस्त की बारिश होगी निर्णायक

विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश होती है तो उत्पादन सामान्य हो सकता है और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण रहेगा।

लेकिन यदि मानसून लगातार कमजोर रहा तो आने वाले महीनों में दूध, दाल, सब्जियां, खाद्य तेल और अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसका सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ेगा।