सूरज मुठ्ठी में: सोलर और परमाणु ऊर्जा में भारत की बड़ी छलांग, तेल-LPG पर निर्भरता घटाने की तैयारी

भारत ने 2026 में सौर ऊर्जा और परमाणु क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की। 45GW सोलर क्षमता जोड़कर भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

India Solar Energy Capacity | Renewable Energy Growth India 2026 : पश्चिम एशिया में जारी तनाव और Strait of Hormuz संकट के चलते पूरी दुनिया ऊर्जा संकट (Energy Crisis) से जूझ रही है। तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। ऐसे समय में भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में दो बड़ी उपलब्धियां हासिल कर वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है—एक परमाणु ऊर्जा में और दूसरी सौर ऊर्जा (Solar Energy) में।

परमाणु ऊर्जा में सफलता: कलपक्कम बना गेम चेंजर

तमिलनाडु के Kalpakkam में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) तकनीक की सफलता भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है। इस तकनीक के जरिए परमाणु ऊर्जा का उत्पादन अधिक तेज, सुरक्षित और टिकाऊ तरीके से किया जा सकेगा।

यह उपलब्धि भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत बनाती है और पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी।

सौर ऊर्जा में ऐतिहासिक उछाल

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 45 गीगावाट (GW) सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी है, जो अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि है। यह उपलब्धि भारत के क्लीन और ग्रीन एनर्जी मिशन को नई गति देती है।

प्रमुख हाइलाइट्स:

  • मार्च 2026 में ही 6.65 GW की रिकॉर्ड सौर क्षमता जोड़ी गई
  • Rajasthan, Gujarat और Maharashtra बने टॉप योगदानकर्ता
  • भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक देश बना

बिजली उत्पादन और हरित ऊर्जा का बढ़ता योगदान

भारत का कुल बिजली उत्पादन 1,845.921 अरब यूनिट तक पहुंच गया है, जिसमें 29.2% हिस्सा गैर-जीवाश्म (Non-Fossil Fuel) स्रोतों का है।

भारत ने 2030 का लक्ष्य—कुल ऊर्जा क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से—2025 में ही हासिल कर लिया, जो Paris Climate Agreement के लक्ष्य से 5 साल पहले है।

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: भविष्य की ऊर्जा

सरकार का National Green Hydrogen Mission भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इस मिशन के लक्ष्य:

  • 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन
  • 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश
  • 6 लाख से ज्यादा रोजगार
  • हर साल 50 मिलियन मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी

पवन ऊर्जा में भी तेज़ रफ्तार

भारत ने 2025-26 में 6.05 GW पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी है, जो पिछले साल से 46% अधिक है। कुल पवन ऊर्जा क्षमता 56 GW के पार पहुंच गई है, जिससे भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा पवन ऊर्जा उत्पादक बन गया है।

क्यों अहम है ये उपलब्धि?

तेल और LPG की वैश्विक सप्लाई में बाधा के बीच भारत का यह कदम बेहद रणनीतिक माना जा रहा है।

  • ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम होगी
  • तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी
  • पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा
  • भारत ऊर्जा सुपरपावर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा

ईरान संकट और वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के बीच भारत ने यह साबित कर दिया है कि भविष्य नवीकरणीय ऊर्जा का है। सोलर और न्यूक्लियर सेक्टर में यह तेज़ प्रगति आने वाले समय में तेल और गैस पर निर्भरता को काफी हद तक खत्म कर सकती है।