Supreme Court on Teacher Appointment: सुप्रीम कोर्ट ने बिना निर्धारित योग्यता शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगाई। जानें असम सरकार की योजना, CJI सूर्य कांत की टिप्पणी और कोर्ट के निर्देश।
Supreme Court on Teacher Appointment: बिना निर्धारित वैधानिक योग्यता के शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। असम की एक योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया कि RTE, NCTE और UGC के तहत जरूरी योग्यता पूरी नहीं करने वाले शिक्षक या ट्यूटर को स्कूल-कॉलेज में नियुक्त नहीं किया जाए और न ही उन्हें सरकारी सेवा में समायोजित किया जाए।
शिक्षकों की नियुक्ति में निर्धारित योग्यता और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
पीठ में चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति में संबंधित कानूनों के तहत निर्धारित वैधानिक योग्यताओं का पालन जरूरी है।
‘बिना योग्यता वाले लोगों को शिक्षक क्यों नियुक्त किया जा रहा है?’
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने शिक्षकों की योग्यता को लेकर सख्त सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि “बिना योग्यता वाले लोगों को शिक्षक क्यों नियुक्त किया जा रहा है?”
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने दलील दी कि जिन लोगों की नियुक्ति पर सवाल उठाया जा रहा है, उन्हें ‘ट्यूटर’ कहकर मामले की वास्तविक प्रकृति को बदलने की कोशिश की जा रही है।
इस पर चीफ जस्टिस ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था का असर आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर पड़ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
मामला असम सरकार की एक ऐसी योजना से जुड़ा है, जिसमें निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को सरकारी सेवा में शामिल करने का प्रावधान होने का दावा किया गया है।
याचिकाकर्ता राजेश चौहान ने इस व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में दलील दी गई है कि निजी शैक्षणिक संस्थानों में काम करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को बिना किसी निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी भर्ती प्रक्रिया के सीधे सरकारी सेवा में शामिल करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के अनुरूप नहीं है।
याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि सरकारी सेवा में नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया और योग्यता मानकों को दरकिनार करके किसी व्यक्ति को सीधे सरकारी सेवा में कैसे शामिल किया जा सकता है।
RTE, NCTE और UGC की योग्यता जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की नियुक्ति में संबंधित वैधानिक प्रावधानों के तहत निर्धारित योग्यता का पालन करना आवश्यक है।
कोर्ट ने शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून, NCTE से जुड़े प्रावधानों और UGC कानून के तहत निर्धारित योग्यताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक की नियुक्ति केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध शिक्षा की गुणवत्ता से है।
कोर्ट ने इस संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत बच्चों के शिक्षा के अधिकार का भी उल्लेख किया।
शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने रुख में इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए यह जरूरी है कि उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षक निर्धारित मानकों और योग्यताओं को पूरा करते हों।
अदालत का यह रुख ऐसे समय में आया है जब शिक्षकों की नियुक्ति में योग्यता, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और मेरिट को लेकर लगातार बहस होती रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार को क्या निर्देश दिया?
अदालत ने अंतरिम आदेश में असम सरकार और उसके शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि:
- निर्धारित वैधानिक योग्यता पूरी नहीं करने वाले किसी शिक्षक या ट्यूटर की नियुक्ति न की जाए।
- ऐसे व्यक्तियों को सरकारी सेवा में समायोजित न किया जाए।
- शिक्षकों की नियुक्ति में RTE, NCTE और UGC के तहत लागू योग्यता मानकों का पालन किया जाए।
यह आदेश फिलहाल असम से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया है। हालांकि, ऐसी ही व्यवस्थाओं वाले अन्य राज्यों में भी इस आदेश की कानूनी व्याख्या और संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा हो सकती है।
क्यों अहम है सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश?
शिक्षकों की नियुक्ति सीधे बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ी है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया है—क्या सिर्फ किसी व्यक्ति का लंबे समय से शिक्षक या ट्यूटर के तौर पर काम करना सरकारी शिक्षक बनने के लिए पर्याप्त है, या निर्धारित योग्यता और पारदर्शी चयन प्रक्रिया भी अनिवार्य होनी चाहिए?
असम की योजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का अंतिम फैसला आने के बाद इस मामले की कानूनी स्थिति और ज्यादा स्पष्ट होगी। फिलहाल अदालत के अंतरिम निर्देश ने शिक्षक नियुक्ति में योग्यता और भर्ती प्रक्रिया को लेकर राज्यों के लिए महत्वपूर्ण सवाल सामने रख दिए हैं।

