PM मोदी ने नीतीश कुमार को नहीं बताया NDA का CM फेस, बोले – “इनके नेतृत्व में बनेगी सरकार”

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का सियासी माहौल अब और गरमाता जा रहा है। शुक्रवार (24 अक्टूबर 2025) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समस्तीपुर के कर्पूरीग्राम से एनडीए के चुनावी अभियान की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने जन नायक कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि दी और एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। हालांकि, अपने संबोधन में पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सीधे तौर पर एनडीए का मुख्यमंत्री चेहरा (CM Face) घोषित नहीं किया। उन्होंने अन्य नेताओं की तरह ही “नेतृत्व” शब्द का इस्तेमाल किया, जिससे राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।

“नीतीश बाबू के नेतृत्व में एनडीए तोड़ेगा सारे रिकॉर्ड”

प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से आरजेडी और महागठबंधन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने “जंगलराज” का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार अब उन दिनों में कभी वापस नहीं जाएगा।

पीएम मोदी ने कहा, “आपका यह उत्साह देखकर मुझे भरोसा है कि इस बार बिहार में नीतीश बाबू के नेतृत्व में एनडीए अपने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए भारी जीत हासिल करेगा।”

मोदी ने अपने भाषण में यह तो स्पष्ट किया कि चुनाव नीतीश कुमार के “नेतृत्व” में लड़ा जाएगा, लेकिन उन्होंने “मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार” जैसे शब्दों से परहेज़ किया। इसी बात को लेकर अब राजनीतिक हलकों में कयास तेज हैं कि क्या बीजेपी नीतीश कुमार को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाएगी या नहीं।

महागठबंधन ने पहले ही घोषित कर दिया CM फेस

वहीं, महागठबंधन (Grand Alliance) ने अपने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री चेहरे की घोषणा कर दी है। बीते गुरुवार (23 अक्टूबर 2025) को आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को आधिकारिक तौर पर महागठबंधन का सीएम उम्मीदवार घोषित किया गया।
इसके साथ ही वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) के प्रमुख मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया गया।

तेजस्वी यादव ने इस घोषणा के बाद दावा किया था कि बीजेपी नीतीश कुमार को दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी। उन्होंने कहा था कि “अब एनडीए के अंदर असमंजस की स्थिति है, क्योंकि बीजेपी का इरादा नीतीश कुमार को किनारे करने का है।”

पीएम मोदी के बयान के बाद शुरू हुई सियासी गर्माहट

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के बाद बिहार की सियासत में एक नई बहस छिड़ गई है।
आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा,

“बीजेपी नीतीश कुमार को ‘एकनाथ शिंदे’ बनाना चाहती है। उनकी राजनीति अब हाशिए पर पहुंच चुकी है और वे अपने अंतिम पड़ाव में हैं। बीजेपी उनके नेतृत्व का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन अंदर ही अंदर उन्हें कमजोर बना रही है। अगर बीजेपी को पूरा भरोसा होता तो वे खुले मंच से नीतीश कुमार को सीएम चेहरा घोषित करते।”

जेडीयू ने दिया जवाब – “नीतीश ही होंगे नेता”

इस पर जेडीयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने पलटवार किया और कहा कि विपक्ष जितनी चाहे बयानबाजी करे, लेकिन गठबंधन में कोई भ्रम नहीं है।

“पहले से यह तय है कि चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। एनडीए में सभी दल एकजुट हैं और ‘25 से 30 – फिर से नीतीश’ का नारा ही चुनावी मैदान में गूंजेगा।”

बीजेपी ने भी दी सफाई

उधर, बीजेपी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार ही एनडीए के मुख्यमंत्री उम्मीदवार रहेंगे।

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से साफ कहा है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। इसका मतलब यही है कि वे ही अगले मुख्यमंत्री होंगे। विपक्ष को जो कहना है, कहने दें। जिनके पास नौवीं फेल नेता सीएम उम्मीदवार हैं, वे हमें सलाह दे रहे हैं — ये हास्यास्पद है।”

राजनीतिक विश्लेषण

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी का “नेतृत्व” शब्द का इस्तेमाल राजनीतिक रूप से रणनीतिक (strategic ambiguity) है। इससे एक ओर नीतीश कुमार की नाराजगी को टाला गया है, वहीं बीजेपी ने अपने लिए भविष्य की संभावनाएं खुली रखी हैं।
एनडीए के भीतर पिछले कुछ समय से सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर तनाव की खबरें आती रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान उस तनाव को संभालने का एक कूटनीतिक तरीका भी माना जा रहा है।

निष्कर्ष

बिहार चुनावी रण में अब तस्वीर और दिलचस्प होती जा रही है।
जहां एक ओर तेजस्वी यादव महागठबंधन के घोषित सीएम चेहरा हैं, वहीं दूसरी ओर एनडीए ने “नीतृत्व” के नाम पर राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है।

अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में बीजेपी नीतीश कुमार के नाम पर कितनी मजबूती से खड़ी रहती है, या फिर चुनाव परिणामों के बाद बिहार की राजनीति एक नया मोड़ लेती है।