US-Iran News: डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज जलडमरूमध्य को टोल-फ्री घोषित करने के बाद ईरान ने बड़ा बयान दिया है। तेहरान ने कहा कि टोल नहीं लगेगा, लेकिन जहाजों से सेवा शुल्क वसूला जा सकता है। जानें पूरा मामला और इसका वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर।
तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को “टोल-फ्री” घोषित किए जाने के बाद ईरान ने बड़ा बयान दिया है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर कोई प्रत्यक्ष टोल नहीं लगाया जाएगा, लेकिन कुछ विशेष सेवाओं के लिए शुल्क (Fee) वसूला जा सकता है। ईरान के इस बयान ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चा तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का शुल्क या प्रतिबंध वैश्विक बाजारों पर सीधा प्रभाव डाल सकता है।
ट्रंप ने किया था ‘टोल-फ्री’ होर्मुज का दावा
रविवार (14 जून) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल चुका है और यह भविष्य में भी “टोल-फ्री” रहेगा।
ट्रंप ने कहा था कि यह समझौता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक को सुरक्षित बनाएगा और क्षेत्रीय तनाव को कम करने में मदद करेगा। उन्होंने इसे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी उपलब्धि बताया था।
ईरान ने कहा- टोल नहीं, लेकिन फीस जरूर
ट्रंप के दावे के कुछ ही समय बाद ईरान ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत जहाजों से सीधे टोल वसूलना उचित नहीं है। हालांकि, यदि जहाजों को विशेष समुद्री सेवाएं, सुरक्षा सहायता या अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, तो उनके लिए शुल्क लिया जा सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने “टोल” शब्द से दूरी बनाते हुए इसे “सुविधा शुल्क” या “सेवा शुल्क” बताया है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन सेवाओं के बदले यह शुल्क लिया जाएगा।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजारों पर पड़ सकता है।
दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में शिपिंग लागत बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा, यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में शुल्क वसूली को लेकर एक नया उदाहरण भी बन सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है।
- वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
- खाड़ी देशों का अधिकांश ऊर्जा निर्यात इसी मार्ग पर निर्भर है।
- किसी भी सैन्य तनाव या प्रतिबंध का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
- अभी भी बना हुआ है सस्पेंस
ट्रंप के “टोल-फ्री” दावे और ईरान के “सेवा शुल्क” वाले बयान के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात पर नजर बनाए हुए है कि भविष्य में होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर वास्तव में कोई अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा या नहीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान शुल्क लागू करता है, तो यह वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री कानूनों को लेकर नई चुनौतियां पैदा कर सकता है।

