Iran-US War Impact: क्या भारत के हेल्थ सेक्टर पर मंडरा रहा खतरा? हीलियम की कमी से महंगा होगा MRI?

ईरान-US युद्ध के बीच हीलियम की कमी से भारत में MRI सेवाओं पर खतरा? जानिए सच्चाई, सप्लाई की स्थिति और मरीजों पर संभावित असर।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Iran-United States संघर्ष के बीच अब भारत के हेल्थ सेक्टर पर भी असर की आशंका जताई जा रही है। खासतौर पर हीलियम गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जो MRI मशीनों के लिए बेहद जरूरी होती है। सवाल यह है कि क्या सच में भारत में हेल्थ सेवाएं प्रभावित होने वाली हैं या यह सिर्फ आशंका है? आइए जानते हैं पूरी सच्चाई।

क्यों अहम है हीलियम गैस?

हीलियम गैस का इस्तेमाल मुख्य रूप से Magnetic Resonance Imaging (MRI) मशीनों में किया जाता है।
यह गैस सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को ठंडा रखने के लिए जरूरी होती है, जिससे MRI स्कैन सही तरीके से काम करता है।

सप्लाई पर क्यों मंडरा रहा संकट?

  • भारत अपनी लगभग 100% हीलियम जरूरत Qatar से आयात करता है
  • कतर के Ras Laffan Industrial City पर हमलों के बाद सप्लाई प्रभावित होने की आशंका
  • Strait of Hormuz में तनाव से वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव

इन कारणों से हेल्थ सेक्टर में चिंता बढ़ी है।

क्या भारत में MRI सेवाएं प्रभावित हो रही हैं?

अभी तक की स्थिति के अनुसार:

  • All India Institute of Medical Sciences में MRI सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं
  • दिल्ली के कई सेंटरों में हीलियम-फ्री या लो-मेंटेनेंस मशीनें लगी हैं
  • नए सिस्टम में बार-बार गैस भरने की जरूरत नहीं होती

👉 विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है।

प्राइवेट सेक्टर में क्या असर दिख रहा है?

कुछ निजी MRI सेंटरों ने संकेत दिए हैं कि:

  • पुरानी मशीनों में हीलियम रीफिल जरूरी होती है
  • हीलियम की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं
  • इसका असर MRI स्कैन की कीमतों पर पड़ सकता है

👉 वर्तमान में MRI स्कैन की लागत लगभग ₹2000 से ₹15000 के बीच है, जो आगे बढ़ सकती है।

अगर युद्ध लंबा चला तो क्या होगा?

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • सप्लाई चेन बाधित रही तो हीलियम की कमी हो सकती है
  • MRI सेवाएं सीमित हो सकती हैं
  • मरीजों के लिए खर्च बढ़ सकता है

हालांकि, राहत की बात यह है कि:

  • भारत में 60% से अधिक MRI सिस्टम आधुनिक तकनीक पर आधारित हैं
  • इनमें कम या लगभग शून्य हीलियम की जरूरत होती है

ईरान-अमेरिका और मध्य पूर्व संघर्ष का असर भारत के हेल्थ सेक्टर तक पहुंचने की आशंका जरूर है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तभी हीलियम सप्लाई और MRI सेवाओं पर वास्तविक दबाव देखने को मिल सकता है।