चीन के खिलाफ बड़ा कदम उठाने की तैयारी में यूरोपीय यूनियन! रेअर अर्थ मिनरल्स पर चेतावनी, कहा— ‘रैकेट चला रहा बीजिंग’

EU ने चीन पर रेअर अर्थ मिनरल्स सप्लाई को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। यूरोपीय यूनियन का कहना है कि चीन लाइसेंस प्रक्रिया में कंपनियों से संवेदनशील जानकारी लेकर ‘रैकेट’ चला रहा है। यूरोप अब चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

नई दिल्ली/ब्रुसेल्स। दुनिया की रेअर अर्थ मिनरल्स सप्लाई पर चीन का सबसे अधिक नियंत्रण है, जिसके चलते वह अमेरिका और यूरोपीय देशों पर दबाव बनाता रहता है। इसी बीच यूरोपीय संघ (EU) ने मंगलवार (25 नवंबर 2025) को चीन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजिंग की प्रतिबंध नीति एक “रैकेट” की तरह काम कर रही है और यह यूरोप की आर्थिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।

EU के उपाध्यक्ष स्टीफन सेजॉर्न ने यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए साफ कहा कि अब समय आ गया है कि यूरोपीय देश चीन पर अपनी निर्भरता तेजी से कम करें— खासकर महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के मामले में।

चीन पर निर्भरता कम करना होगा सबसे बड़ा लक्ष्य: EU

स्टीफन सेजॉर्न ने चेतावनी देते हुए कहा:

“यूरोप को अपनी रणनीति में गति लानी होगी। चीन पर निर्भरता कम करने के लिए हमें दोगुने प्रयास करने की आवश्यकता है।”

उन्होंने सभी सदस्य देशों से सप्लाई चेन को विविध बनाने, वैकल्पिक स्रोत खोजने और खनन-उद्योग में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया।

चीन इस समय

  • वैश्विक रेअर अर्थ माइनिंग में ~70% योगदान देता है
  • जिससे वह सप्लाई चेन में निर्णायक भूमिका निभाता है

सेजॉर्न के अनुसार, चीन लाइसेंस जारी करने में देरी करता है, जिससे डिलीवरी प्रभावित होती है और वैश्विक इंडस्ट्री पर असर पड़ता है।

EU का बड़ा आरोप: “लाइसेंस के बदले कंपनियों से संवेदनशील जानकारी ली जाती है”

EU उपाध्यक्ष ने चीन की प्रक्रिया को “रैकेट” करार देते हुए कहा:

“लाइसेंस अक्सर तभी दिए जाते हैं जब कंपनियां संवेदनशील और व्यापारिक जानकारी साझा करती हैं। यह पूरी प्रक्रिया एक रैकेट जैसी लगती है।”

उन्होंने बताया कि EU अब 27 सदस्य देशों के लिए एक नई रणनीति तैयार कर रहा है, ताकि चीन से होने वाली निर्भरता को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा सके।
इस रणनीति का खुलासा 3 दिसंबर 2025 को होने की उम्मीद है।

अमेरिका-चीन तनाव का शिकार बना यूरोप, भारत बना बड़ा सहयोगी

सेजॉर्न ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच जारी आर्थिक तनाव का सबसे बड़ा खामियाजा यूरोपीय यूनियन को भुगतना पड़ा है।

यूरोपीय संघ अब भारत के साथ एक व्यापक वैश्विक साझेदारी (Global Strategic Agenda) बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

दोनों पक्षों के बीच:

  • मुक्त व्यापार समझौता (FTA)
  • रक्षा सहयोग
  • रणनीतिक एजेंडा

27 जनवरी 2026 को होने वाले शिखर सम्मेलन में अंतिम रूप ले सकते हैं।

भारत EU का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है,
और 2023-24 में दोनों के बीच 135 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ।