अब स्वर्ग सिधार चुके एक ऐसे जनप्रतिनिधि को मैं जानता हूं जो युवावस्था में किसी
बचपन में स्कूल की किताबों में स्वतंत्रता सेनानी लाल - बाल - पाल के बारे
रिश्वत की जड़े बहुत गहरी है, हर छोटे बड़े शहरों से लेकर छोटे-छोटे गांवों, मोहल्लों
हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजामें हिंदुस्तां क्या होगा? यह हम बचपन से सुनते
अगर हम बेटियों की बात करें तो आज जहां एक तरफ कुछ बेटियां प्रगति हर
आजादी के बाद बने भारतीय सविधान की प्रस्तावना में स्पष्ट तौर पर वर्णित हैं, हम
मैं कॉमर्स का छात्र होने के बावजूद शेयर मार्केट का उतार – चढ़ाव कभी अपने
समकालीन परिवेश में हमारे प्रतिदिन के जीवन चक्र में और लगभग सभी क्षेत्रों में मीडिया
जनसंचार का अर्थ जनता के बीच विभिन्न माध्यमों से किया जाने वाला संचार है। जनसंचार
अब तो यह सिद्ध हो गया है कि हम वाकई पिछड़े हैं। लोग 21वीं सदी
