Delhi Air Pollution: AQI 400 के करीब, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा- क्या कदम उठाए?

दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त। CJI ने सरकार से पूछा कि AQI 400 के करीब पहुंचने पर रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए गए? गरीबों और बच्चों पर भी जताई चिंता।

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सरकार से सवाल किया कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं? अदालत ने कहा कि बैठकों और बयानों के बावजूद दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के स्तर को छू रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने वाहनों से निकलने वाले धुएं और दिल्ली-एनसीआर में लगने वाले ट्रैफिक जाम को प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल बताया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण के लिए गरीब लोगों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है, क्योंकि वे इसके सबसे ज्यादा शिकार होते हैं।

AQI 400 के करीब, CJI ने सरकार से मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि प्रदूषण को लेकर लगातार चर्चा और बयानबाजी हो रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। AQI का 400 के आसपास पहुंचना इस बात का संकेत है कि लोगों को गंभीर प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है।

अदालत ने सरकार से जानना चाहा कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण और ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं। कोर्ट की चिंता इस बात को लेकर भी थी कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि लोगों में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी जरूरी है।

प्रदूषण के लिए गरीबों को जिम्मेदार न ठहराएं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान गरीब और कमजोर वर्गों पर प्रदूषण के असर को लेकर अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि प्रदूषण के लिए गरीब लोगों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। वे प्रदूषण फैलाने वाले नहीं, बल्कि इसके सबसे अधिक दुष्प्रभाव झेलने वाले लोगों में शामिल हैं।

कोर्ट ने दिवाली के संदर्भ में कहा कि त्योहारों के दौरान गरीब तबके के कई लोग अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। दूसरी ओर, बड़ी गाड़ियों और वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण उन्हें भीड़ और प्रदूषण की परेशानी झेलनी पड़ती है।

अदालत की टिप्पणी का संदेश था कि प्रदूषण नियंत्रण की नीतियां बनाते समय समाज के कमजोर वर्गों की आजीविका और उनकी परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

दिवाली पर सिर्फ प्रतिबंध नहीं, जागरूकता भी जरूरी

दिवाली के दौरान प्रदूषण रोकने के लिए लगाए जाने वाले प्रतिबंधों पर भी सुप्रीम कोर्ट ने विचार रखा। अदालत ने कहा कि जितने अधिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे, उनके उल्लंघन की आशंका भी उतनी ही बढ़ सकती है। इसलिए केवल पाबंदियों के भरोसे प्रदूषण पर नियंत्रण पाना मुश्किल है।

कोर्ट ने लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और व्यक्तिगत जिम्मेदारी विकसित करने पर जोर दिया। दिवाली के दौरान सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ने की दलील पर अदालत ने यह भी कहा कि त्योहार मनाने के लिए पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों की ओर लौटने पर विचार किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दिवाली के बाद करने की बात कही।

स्कूल बंद करने की मांग पर विशेषज्ञों की राय लेगा कोर्ट

सुनवाई के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य का मुद्दा भी उठा। अदालत के सामने ऐसी याचिका का उल्लेख किया गया, जिसमें AQI बढ़ने पर सभी आयु वर्ग के बच्चों के लिए स्कूलों में ऑफलाइन कक्षाएं बंद करने की मांग की गई है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विशेषज्ञों की राय के आधार पर फैसला करेगा। प्रदूषण का बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाला असर गंभीर चिंता का विषय है, इसलिए इस मामले में कोई भी निर्णय विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

पराली जलाने पर किसानों को जागरूक करने की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने की समस्या पर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। जब किसान इसके आर्थिक नुकसान और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को समझेंगे, तो वे खुद ही इस प्रथा को छोड़ने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।

कोर्ट का मानना है कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए किसानों, आम नागरिकों, प्रशासन और सरकार के बीच सहयोग जरूरी है।

दिवाली के बाद फिर होगी सुनवाई

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस समस्या का समाधान केवल बयान देने या अस्थायी प्रतिबंध लगाने से नहीं होगा। वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, ट्रैफिक जाम, पराली जलाने और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई के साथ जनभागीदारी भी जरूरी है।

अब इस मामले में दिवाली के बाद होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी। देखना होगा कि केंद्र और दिल्ली-एनसीआर की संबंधित सरकारें प्रदूषण नियंत्रण के लिए अदालत के सामने कौन-से ठोस कदम और कार्ययोजना पेश करती हैं।