CBRN Vehicles: न्यूक्लियर-बायोलॉजिकल खतरों से निपटने के लिए सेना को मिलेंगे खास वाहन, जानें क्या है इनकी ताकत

CBRN Vehicles: रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए CBRN Reconnaissance Vehicles की खरीद को मंजूरी दी है। जानें ये वाहन Nuclear, Chemical, Biological और Radiological खतरों का पता कैसे लगाएंगे।

CBRN Vehicles: रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए विशेष CBRN Reconnaissance Vehicles की खरीद को मंजूरी दी है। ये वाहन Chemical, Biological, Radiological और Nuclear एजेंटों से दूषित इलाकों का पता लगाने, उनकी पहचान, निगरानी और मार्किंग में सक्षम होंगे। सरकार की इस मंजूरी को भारत की CBRN सुरक्षा क्षमता मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

भारत ने अपनी सैन्य तैयारियों और CBRN यानी Chemical, Biological, Radiological and Nuclear खतरों से निपटने की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय की Defence Acquisition Council (DAC) की हालिया बैठक में भारतीय सेना के लिए विशेष CBRN Reconnaissance Vehicles की खरीद को मंजूरी दी गई है।

इन वाहनों का मुख्य काम ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना होगा, जो रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल या परमाणु एजेंट से दूषित हो सकते हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ये वाहन दूषित क्षेत्रों का पता लगाने, एजेंट की पहचान करने, निगरानी करने और ऐसे इलाकों को चिह्नित करने में सक्षम होंगे।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर सेना को इन विशेष वाहनों की जरूरत क्यों पड़ी और ये सामान्य सैन्य वाहनों से कितने अलग हैं?

DAC ने एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीद को दी मंजूरी

रक्षा मंत्रालय की DAC बैठक में सेना के तीनों अंगों—थलसेना, वायुसेना और नौसेना के लिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न सैन्य उपकरणों और प्रणालियों की खरीद से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

रक्षा खरीद प्रक्रिया में Acceptance of Necessity (AoN) को एक महत्वपूर्ण शुरुआती मंजूरी माना जाता है। इसके बाद संबंधित उपकरणों की खरीद के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू होती है।

मंजूर किए गए प्रस्तावों में थलसेना के लिए कई प्रकार के सैन्य वाहन और उपकरण, वायुसेना के लिए मिसाइल एवं लड़ाकू विमानों के अपग्रेड तथा नौसेना के लिए रडार और गैस टर्बाइन से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।

इनमें CBRN Reconnaissance Vehicles विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनका इस्तेमाल परमाणु हमले के अलावा रासायनिक और जैविक खतरों की स्थिति में भी किया जा सकता है।

CBRN Vehicle क्या होता है?

CBRN का मतलब है:

  • C – Chemical यानी रासायनिक
  • B – Biological यानी जैविक
  • R – Radiological यानी रेडियोलॉजिकल
  • N – Nuclear यानी परमाणु

CBRN Reconnaissance Vehicle मूल रूप से ऐसा सैन्य वाहन होता है, जिसे संभावित CBRN खतरे वाले क्षेत्र में जाकर खतरे का पता लगाने और उसका आकलन करने के लिए तैयार किया जाता है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार प्रस्तावित वाहन दूषित क्षेत्र का पता लगाने के साथ-साथ वहां मौजूद CBRN एजेंट की पहचान, निगरानी और क्षेत्र को चिह्नित करने में मदद करेंगे।

इससे सेना को यह समझने में सहायता मिल सकती है कि किसी इलाके में किस तरह का खतरा मौजूद है और वहां सैनिकों की आवाजाही किस तरह सुरक्षित तरीके से की जाए।

परमाणु हमले की स्थिति में भी उपयोगी

CBRN वाहन सिर्फ परमाणु हमले तक सीमित नहीं हैं। इनका इस्तेमाल केमिकल और बायोलॉजिकल एजेंट से पैदा होने वाले खतरों से निपटने के लिए भी किया जा सकता है।

ऐसे वाहनों में सैनिकों और उपकरणों को दूषित वातावरण से बचाने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्थाएं होती हैं। इसका उद्देश्य यह है कि CBRN खतरे वाले इलाके में भी प्रशिक्षित सैन्य दल सुरक्षित तरीके से आवश्यक reconnaissance यानी जांच और निगरानी कर सके।

हालांकि, किसी विशेष वाहन की वास्तविक सुरक्षा और क्षमता उसके मॉडल, उपकरण और कॉन्फिगरेशन पर निर्भर करती है।

भारत पहले से विकसित कर चुका है स्वदेशी CBRN वाहन

भारत में CBRN सुरक्षा से जुड़े वाहनों का विकास पहले भी किया जा चुका है। DRDO ने भारतीय सेना के लिए CBRN reconnaissance से संबंधित स्वदेशी प्रणालियां विकसित की हैं।

पिछले वर्षों में DRDO से जुड़े CBRN वाहनों के विभिन्न मॉडल और प्रोटोटाइप सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। कुछ वाहन देखने में Infantry Combat Vehicle जैसे नजर आते हैं और इन्हें कठिन इलाकों में संचालन के लिए डिजाइन किया गया है।

हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने मौजूदा मंजूरी के संदर्भ में यह स्पष्ट नहीं किया है कि सेना सीधे किसी विशेष DRDO-developed vehicle को खरीदेगी या उद्योग के साथ मिलकर विकसित किए गए किसी अन्य प्लेटफॉर्म को चुना जाएगा।

पहले होगा Evaluation, फिर खरीद

माना जा रहा है कि खरीद प्रक्रिया के दौरान सेना विभिन्न उपलब्ध CBRN वाहनों की तकनीकी क्षमता और परिचालन जरूरतों के आधार पर जांच और मूल्यांकन करेगी।

इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपयुक्त प्लेटफॉर्म का चयन किया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय ने इस बड़े रक्षा खरीद पैकेज के बारे में कहा है कि इसका बड़ा हिस्सा स्वदेशी स्रोतों से हासिल करने पर केंद्रित है। ऐसे में CBRN क्षमता को भी आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

CBRN Vehicles की जरूरत क्यों महसूस हुई?

CBRN खतरे किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। परमाणु हथियार रखने वाले देशों के बीच तनाव, आतंकवादी संगठनों द्वारा रासायनिक या जैविक एजेंटों के संभावित इस्तेमाल और युद्ध के दौरान औद्योगिक या परमाणु प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने जैसी परिस्थितियां CBRN सुरक्षा को महत्वपूर्ण बनाती हैं।

भारत के सामने अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण भी कई तरह की सुरक्षा चुनौतियां हैं। पाकिस्तान और चीन दोनों परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी देश हैं। ऐसे में भारतीय सेना के लिए CBRN preparedness यानी रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों से निपटने की क्षमता मजबूत करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

पाकिस्तान और चीन के संदर्भ में क्यों अहम?

भारत-पाकिस्तान के बीच लंबे समय से सुरक्षा तनाव रहा है। वहीं भारत और चीन के बीच भी सीमा विवाद और सैन्य तनाव की स्थिति सामने आती रही है।

ऐसे माहौल में सैन्य तैयारियों का मतलब सिर्फ पारंपरिक हथियारों और मिसाइलों तक सीमित नहीं है। आधुनिक युद्ध में CBRN threats से निपटने की क्षमता भी किसी सेना की preparedness का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

गलवान घाटी में 2020 की सैन्य झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में सुरक्षा और सैन्य तैयारियों का महत्व और बढ़ा है।

हालांकि, CBRN वाहनों की खरीद को किसी एक संभावित हमले से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा। यह व्यापक सैन्य और आपदा-प्रबंधन तैयारियों का हिस्सा भी हो सकता है।

‘किराना हिल्स’ को लेकर क्या है विवाद?

CBRN वाहनों की जरूरत के संदर्भ में पाकिस्तान के किराना हिल्स का भी जिक्र किया जाता रहा है। हालांकि, इस मामले से जुड़े कई दावों को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट और बयान सामने आए हैं।

पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि किराना हिल्स भारतीय वायुसेना का घोषित लक्ष्य नहीं था और वहां हुई कार्रवाई को लेकर अलग परिस्थितियों का उल्लेख किया था।

इसलिए किराना हिल्स की घटना को सीधे तौर पर भारतीय CBRN वाहन खरीद का कारण बताना उचित नहीं होगा। CBRN क्षमता मजबूत करने के पीछे व्यापक रणनीतिक और सुरक्षा जरूरतों को देखना ज्यादा उचित है।

अब आगे क्या होगा?

CBRN Reconnaissance Vehicles की खरीद को मिली AoN अंतिम खरीद आदेश नहीं है, बल्कि रक्षा खरीद प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण शुरुआती मंजूरी है।

आगे सेना द्वारा आवश्यक परीक्षण और मूल्यांकन किया जाएगा। तकनीकी जरूरतों, परिचालन क्षमता और स्वदेशीकरण जैसे मानकों के आधार पर उपयुक्त सिस्टम का चयन किया जा सकता है।

एक बात स्पष्ट है कि आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए भारत अपनी सेना को सिर्फ पारंपरिक युद्ध के लिए नहीं, बल्कि Chemical, Biological, Radiological और Nuclear जैसे असामान्य और अत्यधिक खतरनाक खतरों से निपटने के लिए भी तैयार कर रहा है।