कभी नक्सलियों का गढ़ था अंतागढ़, आज बना छत्तीसगढ़ का मॉडल अस्पताल; डॉक्टर रामटेके की 23 साल की तपस्या बनी मिसाल

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ में डॉक्टर भेषज कुमार रामटेके ने 23 वर्षों की अथक मेहनत से नक्सल प्रभावित क्षेत्र के सरकारी अस्पताल को मॉडल हेल्थ सेंटर में बदल दिया। मलेरिया पर नियंत्रण से लेकर राष्ट्रीय स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं तक, यह प्रेरणादायक कहानी जानिए।

कभी नक्सलियों का गढ़ था अंतागढ़, आज बना छत्तीसगढ़ का मॉडल अस्पताल; डॉक्टर रामटेके की 23 साल की तपस्या बनी मिसाल

कांकेर (छत्तीसगढ़): एक समय ऐसा था जब छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले का अंतागढ़ क्षेत्र नक्सली गतिविधियों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय रहता था। घने जंगलों और दुर्गम रास्तों से घिरे इस इलाके में इलाज की सुविधा लगभग न के बराबर थी। लेकिन आज वही अंतागढ़ अपने उत्कृष्ट सरकारी अस्पताल और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पूरे राज्य में मिसाल बन चुका है।

इस परिवर्तन के पीछे हैं डॉ. भेषज कुमार रामटेके, जिन्होंने पिछले 23 वर्षों में अपने समर्पण, सेवा और दूरदर्शिता से इस क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर बदल दी।

जब अंतागढ़ जाना सबसे कठिन पोस्टिंग मानी जाती थी

वर्ष 2003 में जब डॉ. रामटेके की नियुक्ति अंतागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई थी, तब यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित इलाकों में गिना जाता था। यहां न तो निजी अस्पताल थे और न ही पर्याप्त चिकित्सकीय संसाधन। कई गांव ऐसे थे जहां पहुंचने के लिए घंटों पैदल सफर करना पड़ता था।

अधिकांश लोग इस क्षेत्र में लंबे समय तक काम करने से बचते थे, लेकिन डॉ. रामटेके ने इसे चुनौती नहीं बल्कि सेवा का अवसर माना। उन्होंने अस्पताल को ही अपना घर बना लिया और दिन-रात मरीजों की सेवा में जुट गए।

स्वास्थ्य व्यवस्था से टूटा भरोसा फिर से जीता

डॉ. रामटेके ने जल्द ही समझ लिया कि यहां की सबसे बड़ी समस्या केवल बीमारियां नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का घटता विश्वास भी है।

उन्होंने अस्पताल की चारदीवारी से बाहर निकलकर गांव-गांव जाना शुरू किया। आदिवासी समुदायों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं समझीं और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाए। इससे लोगों का भरोसा धीरे-धीरे स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर लौटने लगा।

मलेरिया के खिलाफ छेड़ी निर्णायक लड़ाई

अंतागढ़ क्षेत्र वर्षों तक मलेरिया की गंभीर समस्या से जूझता रहा। वर्ष 2003 में यहां का Annual Parasite Incidence (API) 51.11 था, जो 2006 तक बढ़कर 70.65 पहुंच गया। सिर्फ वर्ष 2006 में 4,942 मलेरिया मरीज दर्ज किए गए थे।

स्थिति इतनी गंभीर थी कि अधिकांश मामले प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम मलेरिया के थे, जो जानलेवा माना जाता है।

डॉ. रामटेके ने मलेरिया उन्मूलन को अपना मिशन बनाया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, पंचायतों, मितानिनों और स्थानीय समुदायों को साथ लेकर व्यापक अभियान चलाया।

प्रमुख कदम:

  • गांव-गांव स्वास्थ्य जागरूकता अभियान
  • ग्राम सभाओं और रैलियों का आयोजन
  • घर-घर मलेरिया रोकथाम की जानकारी
  • वर्ष 2010 और 2015 में LLIN मच्छरदानियों का वितरण
  • समय पर जांच और उपचार की व्यवस्था
  • नतीजा: 4,942 से घटकर सिर्फ 127 रह गए मरीज

लगातार प्रयासों का परिणाम बेहद सकारात्मक रहा। जहां वर्ष 2006 में मलेरिया के 4,942 मामले दर्ज हुए थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर केवल 127 रह गई।

API भी 70.65 से गिरकर 1.39 पर पहुंच गया। साथ ही मलेरिया से होने वाली मौतों और गंभीर मामलों में भी भारी कमी दर्ज की गई।

अस्पताल को बनाया मॉडल हेल्थ सेंटर

मलेरिया नियंत्रण के बाद डॉ. रामटेके ने अस्पताल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया।

उन्होंने “कायाकल्प योजना” के तहत अस्पताल में व्यापक सुधार किए। साफ-सफाई, संक्रमण नियंत्रण, जैविक कचरा प्रबंधन, मरीज सुविधाएं और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में लगातार काम किया गया।

जो अस्पताल कभी दो कमरों के छोटे भवन में संचालित होता था, वह आज 30 बिस्तरों वाले आधुनिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है।

350 मानकों पर खरा उतरता है अस्पताल

कायाकल्प योजना के अंतर्गत अस्पतालों का मूल्यांकन 350 से अधिक मानकों पर किया जाता है। अंतागढ़ अस्पताल ने इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए लगातार सफलता हासिल की है।

उपलब्धियां:

  • पिछले पांच वर्षों से बस्तर संभाग में प्रथम स्थान
  • वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दूसरा स्थान
  • स्वच्छता और मरीज संतुष्टि के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि
  • एक डॉक्टर ने बदल दी हजारों लोगों की जिंदगी

23 वर्षों तक एक ही क्षेत्र में लगातार सेवा देना अपने आप में असाधारण उपलब्धि है, विशेषकर तब जब वह क्षेत्र नक्सल प्रभावित, आदिवासी बहुल और संसाधनों की कमी से जूझ रहा हो।

डॉ. भेषज कुमार रामटेके ने यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति, समर्पण और सेवा भावना मजबूत हो तो किसी भी चुनौतीपूर्ण क्षेत्र को विकास और बदलाव का मॉडल बनाया जा सकता है।

आज अंतागढ़ का अस्पताल केवल एक स्वास्थ्य केंद्र नहीं, बल्कि यह इस बात का जीवंत उदाहरण है कि एक व्यक्ति का संकल्प हजारों लोगों की जिंदगी बदल सकता है।

निष्कर्ष

डॉ. रामटेके की 23 वर्षों की अथक मेहनत और सेवा ने अंतागढ़ को नक्सल प्रभावित और स्वास्थ्य संकट से जूझते क्षेत्र से निकालकर छत्तीसगढ़ के सर्वश्रेष्ठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में शामिल कर दिया है। उनकी कहानी स्वास्थ्य सेवाओं, जनसहभागिता और समर्पण की एक प्रेरणादायक मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।