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	<title>भारत-पाक युद्ध Archives - www.aajkiawaaz.com</title>
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		<title>तारीख हुई तय , जानिए कब होगा भारत –पाक युद्ध ..</title>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Nov 2016 11:40:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : पिछले दिनों उरी में आर्मी कैंप पर आतंकियों के हमले के बाद से इंडिया और पकिस्तान के बीच युद्ध से जुड़े कई तरह के मैसेज सोशल मीडिया में वायरल होते रहे हैं। दोनों देशों के बीच भीषण युद्ध के दावों से जुड़ा ऐसा ही एक मैसेज सोशल मीडिया में तूफान मचाए हुए है। दरअसल, युद्ध से जुड़ी यह एक ऐसी भविष्यवाणी है जिसे बाकायदा एक प्रतिष्ठित अखबार ने पब्लिश भी किया है गुजरात के अहमदाबाद के ज्योतिषी व्यापक लोढ़ा ने एक लेख में ऐसी भविष्यवाणी में भीषण युद्ध का दावा किया है। भविष्यवाणी करीब 6 महीने पुरानी है। इसमें दोनों देशों की कुंडली और दूसरे ज्योतिषीय आधारों पर दावा किया गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच 10 अक्टूबर से लेकर 18 नवंबर तक भीषण युद्ध के योग हैं। उड़ी में अटैक के बाद सीमा पर तनाव और दोनों देशों के बीच फायरिंग की घटना, सोशल मीडिया में इस मैसेज के वायरल होने की वजह बना। इसे खूब शेयर किया जा रहा है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में भारत और पाकिस्तान एक तरह से युद्ध के मुहाने पर हैं। लेकिन, कई ज्योतिषीय दावे सामने आए हैं, जिसमें व्यापक के ज्योतिषीय आकलन को गलत करार दिया गया है। &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong>नई दिल्ली : पिछले दिनों उरी में आर्मी कैंप पर आतंकियों के हमले के बाद से इंडिया और पकिस्तान के बीच युद्ध से जुड़े कई तरह के मैसेज सोशल मीडिया में वायरल होते रहे हैं। दोनों देशों के बीच भीषण युद्ध के दावों से जुड़ा ऐसा ही एक मैसेज सोशल मीडिया में तूफान मचाए हुए है। दरअसल, युद्ध से जुड़ी यह एक ऐसी भविष्यवाणी है जिसे बाकायदा एक प्रतिष्ठित अखबार ने पब्लिश भी किया है</strong></p>
<p style="text-align: justify;">गुजरात के अहमदाबाद के ज्योतिषी व्यापक लोढ़ा ने एक लेख में ऐसी भविष्यवाणी में भीषण युद्ध का दावा किया है। भविष्यवाणी करीब 6 महीने पुरानी है। इसमें दोनों देशों की कुंडली और दूसरे ज्योतिषीय आधारों पर दावा किया गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच 10 अक्टूबर से लेकर 18 नवंबर तक भीषण युद्ध के योग हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">उड़ी में अटैक के बाद सीमा पर तनाव और दोनों देशों के बीच फायरिंग की घटना, सोशल मीडिया में इस मैसेज के वायरल होने की वजह बना। इसे खूब शेयर किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि, पिछले कुछ दिनों में भारत और पाकिस्तान एक तरह से युद्ध के मुहाने पर हैं। लेकिन, कई ज्योतिषीय दावे सामने आए हैं, जिसमें व्यापक के ज्योतिषीय आकलन को गलत करार दिया गया है। सोशल मीडिया में एक ज्योतिषी के हवाले से कहा जा रहा है कि भारत-पाकिस्तान की जिस कुंडली के आधार पर यह कहा गया, दरअसल वह गलत है।</p>
<p style="text-align: justify;">भारत से पहले पाकिस्तान आजाद हुआ। उसकी मेष लग्न की कुंडली बनती है। 14-15 की रात में आजादी के साथ भारत की वृषभ लग्न की कुंडली बनती है।</p>
<p style="text-align: justify;">दोनों की कुंडली में टेंशन के आसार पूरे-पूरे हैं। वह नजर भी आता रहता है। लेकिन ग्रहों के आधार पर फिलहाल भीषण युद्ध जैसी स्थिति सही नहीं है। 10 अक्टूबर से 18 नवंबर के बीच भारत, पाकिस्तान के साथ भीषण युद्ध करेगा। 3 अक्टूबर से आतंकवादियों के साथ सेना की मुठभेड़ चालू रहेगी।</p>
<p style="text-align: justify;">3 अक्टूबर से 15 अक्टूबर के बीच भारत पर बड़ा हमला होगा। संभव है पाकिस्तान को भारी नुकसान हो। कुल मिलाकर 18 नवंबर तक भारत निर्णायक भूमिका में युद्ध का सामना करेगा और इस देश की प्रजा एकजुट होकर दुनिया को अपनी ताकत का परिचय देगी।</p>
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		<title>युद्ध में शहीद सैनिकों की विधवाओं के लिए अच्छी खबर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Oct 2016 08:35:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : 1962, 1965 और 1971 के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की विधवाओं के लिए सरकार ने बहुत बड़ा ऐलान किया है। सीएम प्रकाश सिंह बादल ने जंगी विधवाओं या कानूनी वारिसों को पचास लाख रुपये की विशेष ग्रांट-इन-एड देने का एलान किया है। यह ग्रांट 1965 व 1971 के भारत-पाक युद्ध और 1962 की भारत-चीन जंग में शहीद फौजियों के परिजनों को दी जाएगी। काफी दिनों से जंगी विधवाएं और परिजन सीएम आवास के सामने अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं। सीएम कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि 1975 में एक नीति बनाकर 1500 जंगी विधवाओं से आवेदन भरवाए गए थे। इन्हें ग्रामीण इलाकों में दस एकड़ खेती योग्य जमीन या उसकी कीमत के बदले नकद राशि दी गई थी। हालांकि करीब सौ लोग ऐसे थे, जो निर्धारित समय में आवेदन नहीं कर सके थे। फिर चार जनवरी-2010 तक तारीख बढ़ाई गई तो सौ आवेदन आए थे। हर छिमाही पर दी जाएगी ये ग्रांट प्रवक्ता ने कहा कि खेती योग्य जमीन अदालती सुनवाई अधीन होने या नाजायज कब्जे होने के कारण जंगी विधवाओं को उनका कब्जा देना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। इसलिए सरकार ने जंगी विधवाओं की मांग के मुताबिक सारे मामलों की &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong>नई दिल्ली : 1962, 1965 और 1971 के युद्ध में <a href="http://www.aajkiawaaz.com/missile-attack-on-an-army-camp-in-saudi-arabia-20-troopers" target="_blank">शहीद </a>हुए सैनिकों की विधवाओं के लिए सरकार ने बहुत बड़ा ऐलान किया है। सीएम प्रकाश सिंह बादल ने जंगी विधवाओं या कानूनी वारिसों को पचास लाख रुपये की विशेष ग्रांट-इन-एड देने का एलान किया है।</strong></p>
<p style="text-align: justify;">यह ग्रांट 1965 व 1971 के भारत-पाक युद्ध और 1962 की भारत-चीन जंग में शहीद फौजियों के परिजनों को दी जाएगी। काफी दिनों से जंगी विधवाएं और परिजन सीएम आवास के सामने अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">सीएम कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि 1975 में एक नीति बनाकर 1500 जंगी विधवाओं से आवेदन भरवाए गए थे। इन्हें ग्रामीण इलाकों में दस एकड़ खेती योग्य जमीन या उसकी कीमत के बदले नकद राशि दी गई थी।</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि करीब सौ लोग ऐसे थे, जो निर्धारित समय में आवेदन नहीं कर सके थे। फिर चार जनवरी-2010 तक तारीख बढ़ाई गई तो सौ आवेदन आए थे।<br />
हर छिमाही पर दी जाएगी ये ग्रांट</p>
<p style="text-align: justify;">प्रवक्ता ने कहा कि खेती योग्य जमीन अदालती सुनवाई अधीन होने या नाजायज कब्जे होने के कारण जंगी विधवाओं को उनका कब्जा देना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। इसलिए सरकार ने जंगी विधवाओं की मांग के मुताबिक सारे मामलों की तसदीक करके उन्हें नकद ग्रांट देने का फैसला किया है। यह ग्रांट हर छमाही पर बीस, 15 व 15 लाख रुपये के रूप में दी जाएगी।</p>
<p style="text-align: justify;">सीएम ने इसे मंजूरी देते हुए कहा कि वह देश की आन व शान की रक्षा के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वाले बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने का एक तुच्छ सा यत्न कर रहे हैं। प्रवक्ता ने बताया कि इस संबंध में औपचारिक गजट नोटिफिकेशन कैबिनेट की मंजूरी के बाद जारी किया जाएगा। सैनिक भलाई डायरेक्टर जंगी विधवाओं या कानूनी वारिसों को उनके गांव में जाकर ग्रांट देंगे, ताकि उन्हें दिक्कत न आए।</p>
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		  <p>The post <a href="http://www.aajkiawaaz.com/good-news-for-widows-of-soldiers-killed-in-the-war">युद्ध में शहीद सैनिकों की विधवाओं के लिए अच्छी खबर</a> appeared first on <a href="http://www.aajkiawaaz.com">www.aajkiawaaz.com</a>.</p>
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		<title>जब पाकिस्तानी फौजी ने छोड़ दी नौकरी, बोला भारत  माता की जय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Oct 2016 12:40:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : भारत माता की जय बोलने को लेकर देश में कुछ हिस्सों में चल रहे विवाद के बीच जालोर जिले में एक सकारात्मक पहल सामने आ रही है। 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध में भारत के खिलाफ युद्ध लड़ने वाले जालोर जिले के थलवाड़ में पाक विस्थापित राजूसिंह सोढ़ा भारत में मिले सुकून के बाद अब गर्व से &#8216;भारत माता की जय&#8217; बोलते हैं। उनका कहना है कि हालांकि उनका जन्म आजादी से पूर्व 1937 में नई चौर (उमरकोट) पाकिस्तान (तब भारत) में हुआ था, लेकिन विभाजन ने ऐसी रेखा खींची कि उन्हें पाक में रहने को मजबूर होना पड़ा। आजीविका के लिए पाकिस्तानी सेना में नौकरी की और 1965 एवं 1971 में भारत के खिलाफ युद्ध भी लड़ा। बकौल राजूसिंह सोढ़ा का कहना है कि पाक सेना में उनकी कौम को हीन भावना से देखा जाता था, लेकिन फिर भी उन्होंने अपने देश से कभी गद्दारी नहीं की। वे दो बार भारत के विरुद्ध युद्ध भी लड़े, लेकिन उन्हें इतना प्रताड़ित किया जाता था कि देश छोडऩे को मजबूर होना पड़ा। बार-बार तनाव की स्थिति को देखते हुए उन्हें 1979 में पाकिस्तान छोड़ना पड़ा और वे भारत में जालोर जिले के थलवाड़ा क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong>नई दिल्ली : भारत माता की जय बोलने को लेकर देश में कुछ हिस्सों में चल रहे विवाद के बीच जालोर जिले में एक सकारात्मक पहल सामने आ रही है। 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध में भारत के खिलाफ युद्ध लड़ने वाले जालोर जिले के थलवाड़ में पाक विस्थापित राजूसिंह सोढ़ा भारत में मिले सुकून के बाद अब गर्व से &#8216;भारत माता की जय&#8217; बोलते हैं।</strong></p>
<p style="text-align: justify;">उनका कहना है कि हालांकि उनका जन्म आजादी से पूर्व 1937 में नई चौर (उमरकोट) पाकिस्तान (तब भारत) में हुआ था, लेकिन विभाजन ने ऐसी रेखा खींची कि उन्हें पाक में रहने को मजबूर होना पड़ा।</p>
<p style="text-align: justify;">आजीविका के लिए पाकिस्तानी सेना में नौकरी की और 1965 एवं 1971 में भारत के खिलाफ युद्ध भी लड़ा। बकौल राजूसिंह सोढ़ा का कहना है कि पाक सेना में उनकी कौम को हीन भावना से देखा जाता था, लेकिन फिर भी उन्होंने अपने देश से कभी गद्दारी नहीं की। वे दो बार भारत के विरुद्ध युद्ध भी लड़े, लेकिन उन्हें इतना प्रताड़ित किया जाता था कि देश छोडऩे को मजबूर होना पड़ा।</p>
<p style="text-align: justify;">बार-बार तनाव की स्थिति को देखते हुए उन्हें 1979 में पाकिस्तान छोड़ना पड़ा और वे भारत में जालोर जिले के थलवाड़ा क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों के पास आ गए। वर्ष 2005 में काफी संघर्ष के बाद उन्हें भारतीय नागरिकता मिल चुकी है और वे अब भारतीय हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">राजूसिंह ने बतया कि 1971 के युद्ध के बाद से ही उन्होंने परिवार सहित भारत आने का मानस बना लिया था। तनाव के बीच 1971 में पाकिस्तान छोड़ दिया। जिसके बाद घूमते-घूमते सन 1979 में वे भारत के विभिन्न हिस्सों से होते हुए थलवाड़ पहुुंचे। राजूसिंह का कहना है कि जब पाकिस्तान छोड़ा तो वहां माहौल बहुत ज्यादा खराब था, लेकिन जब भारत पहुंचे तो यहां बहुत अपनापन मिला और आज वे भारत के नागरिक हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">80 के पड़ाव पर खड़े राजूसिंह सोढ़ा का कहना है कि उनका बचपन और जवानी पाकिस्तान में बीती, लेकिन वहां हर पल दहशत और चिंता सताती रहती थी कि कब युद्ध हो जाए। वहां के स्थानीय लोगों से भी खतरा सताता रहता था। इस बीच वे अपने परिवार के साथ भारत आ गए और यहीं बस गए।</p>
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		<title>जब फौजियों के शवों को खा रहे थे कुत्ते ..</title>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Oct 2016 18:43:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : इन दिनों भारत –पाक के बीच चल रही तनातनी ने कई पुराने जख्म भी हरे कर दिए है, भारत &#8211; पाक के बीच बन रहा युद्ध का माहौल कई ऐसी यादे ताज़ा कर देता है जिसे आजतक लोग भुला नहीं पाए हैं । भारत और पाकिस्तान के जारी तनाव के मध्य सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध का गहराई से जिक्र किया है। ठाकुर ने 1965 में हुए वॉर को याद करते हुए कहा कि उस समय वह लड़के थे और जम्मू में रहते थे। युद्ध के 18-20 दिन बाद कर्नल रूप सिहं हमे उस इलाके में ले गए जो पाकिस्तान से युद्ध में पूरी तरह से तबाह हो गया था और हमारे द्वारा कब्जा किया गया था। जब मुझे युद्ध का कब्रिस्तान देखने को मिला। सतह पर लोगों की जली हुई लाशें पड़ी थीं, जिस पर मिट्टी की एक परत सी थी। क्योंकि किसी पास इतना समय नहीं था कि वह लाशों को विधिवत दफना सके। मैंने देखा आर्मी के जूते पहने शवों के पैरों को कुत्ते खा रहे थे। ठाकुर ने यह बात एक एक कार्यक्रम के दौरान कही। कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong>नई दिल्ली : इन दिनों भारत –पाक के बीच चल रही तनातनी ने कई पुराने जख्म भी हरे कर दिए है, भारत &#8211; पाक के बीच बन रहा युद्ध का माहौल कई ऐसी यादे ताज़ा कर देता है जिसे आजतक लोग भुला नहीं पाए हैं । भारत और पाकिस्तान के जारी तनाव के मध्य सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध का गहराई से जिक्र किया है।</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ठाकुर ने 1965 में हुए वॉर को याद करते हुए कहा कि उस समय वह लड़के थे और जम्मू में रहते थे। युद्ध के 18-20 दिन बाद कर्नल रूप सिहं हमे उस इलाके में ले गए जो पाकिस्तान से युद्ध में पूरी तरह से तबाह हो गया था और हमारे द्वारा कब्जा किया गया था। जब मुझे युद्ध का कब्रिस्तान देखने को मिला। सतह पर लोगों की जली हुई लाशें पड़ी थीं, जिस पर मिट्टी की एक परत सी थी। क्योंकि किसी पास इतना समय नहीं था कि वह लाशों को विधिवत दफना सके। मैंने देखा आर्मी के जूते पहने शवों के पैरों को कुत्ते खा रहे थे। ठाकुर ने यह बात एक एक कार्यक्रम के दौरान कही। कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिस और पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह समेत अन्य लोग मौजूद थे।</p>
<p style="text-align: justify;">चीफ जस्टिस ने कहा कि कार्यक्रम में मौजूद ऑडियंस ने कभी युद्ध नहीं देखा है। यह बहुत ही हतोत्साहित करने वाला अनुभव था। हर तरफ अफवाह थी कि पाकिस्तानी सैनिक आए और भारतीयों की हत्या करके चले गए। शहर पूरी तरह से बर्बाद हो गए थे क्योंकि लोग पलायन करने लगे थे।</p>
<p style="text-align: justify;">सिर्फ दो ही दुकानें अच्छा बिजनेस कर रही थी। एक ट्रंक रिपेयर शॉप (बक्सा बनाने वाली दुकानें), जहां लोग अपना ट्रंक ठीक करवाने आ रहे थे, जिसमें वह अपना कीमती सामान रखकर यहां से जा सके और दूसरा पोल्ट्री की दुकानें जहां लोग कुछ खाना होने की आशा लिए जाते थे। यहां तक सूरज डूबने के बाद लैंप और सिगरेट जलाना भी एक समस्या थी। पड़ोसी विरोध करने लगते थे कि कहीं दुश्मन लाइट देखकर निशाना न लगा ले।</p>
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		<title>भारत –पाक युद्ध हुआ तो ये होंगे परिणाम जो ला देंगे पूरी दुनिया में तबाही</title>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 04 Oct 2016 13:10:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : उरी आंतकी हमले के बाद भारत द्वारा किये गये सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत- पाक के बीच युद्ध के आसार बनते नज़र आ रहे है । अगर गलती से भी भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध होता है और उस युद्ध में दोनों देश अपने सिर्फ आधे परमाणु बम का ही बटन दबा दें, तो हिंदुस्तान और पाकिस्तान में तो एक झटके में ही दो करोड़ दस लाख लोग मारे जाएंगे। मगर इसका असर ना सिर्फ बाकी पड़ोसी मुल्कों बल्कि आधी दुनिया को भी झेलना पड़ेगा। भारत और पाकिस्तान के पास जो परमाणु बम हैं, उनमें से हर बम हिरोशिमा पर गिराए गए 15 किलोटन वाले बम के बराबर है। ये बम जैसे ही गिरेंगे सबसे पहले इसकी गर्मी, तपिश और रेडिएशन लोगों को मारेगी। उसके बाद भी जो बच जाएंगे उनके लिए जीना इतना आसान नहीं होगा। भोपाल गैस के तीस साल बाद आज तीसरी पीढ़ी भी बीमार पैदा हो रही है। फिर ये तो परमाणु बम हैं। अंदाजा लगाइए इसका असर कितना लंबा और खतरनाक होगा। बमों के रेडिएशन का असर लोगों को सिर्फ तड़पाएगा ही नहीं, बल्कि बाकी दूसरे तरीकों और नतीजों से भी उन्हें तिल-तिल कर मरेगा। वैज्ञानिकों की मानें तो इतने रेडिएशन से वायुमंडल &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong>नई दिल्ली : उरी आंतकी हमले के बाद भारत द्वारा किये गये सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत- पाक के बीच युद्ध के आसार बनते नज़र आ रहे है । अगर गलती से भी भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध होता है और उस युद्ध में दोनों देश अपने सिर्फ आधे परमाणु बम का ही बटन दबा दें, तो हिंदुस्तान और पाकिस्तान में तो एक झटके में ही दो करोड़ दस लाख लोग मारे जाएंगे। मगर इसका असर ना सिर्फ बाकी पड़ोसी मुल्कों बल्कि आधी दुनिया को भी झेलना पड़ेगा।</strong></p>
<p style="text-align: justify;">भारत और पाकिस्तान के पास जो परमाणु बम हैं, उनमें से हर बम हिरोशिमा पर गिराए गए 15 किलोटन वाले बम के बराबर है। ये बम जैसे ही गिरेंगे सबसे पहले इसकी गर्मी, तपिश और रेडिएशन लोगों को मारेगी। उसके बाद भी जो बच जाएंगे उनके लिए जीना इतना आसान नहीं होगा। भोपाल गैस के तीस साल बाद आज तीसरी पीढ़ी भी बीमार पैदा हो रही है। फिर ये तो परमाणु बम हैं। अंदाजा लगाइए इसका असर कितना लंबा और खतरनाक होगा।</p>
<p style="text-align: justify;">बमों के रेडिएशन का असर लोगों को सिर्फ तड़पाएगा ही नहीं, बल्कि बाकी दूसरे तरीकों और नतीजों से भी उन्हें तिल-तिल कर मरेगा। वैज्ञानिकों की मानें तो इतने रेडिएशन से वायुमंडल में ओजोन परत बर्बाद हो जाएगी। अब वायुमंडल से ओजोन परत के गायब होने या बर्बाद होने का मतलब ये है कि हवा से वो गैस ही खत्म हो जाएगी जो मौसम को बदलती हैं। यानी आधी दुनिया में सर्दी-गर्मी के फिक्स मौसम का सिलसिले ही बंद हो जाएगा। ऐसे में बहुत मुमकिन है कि इस जंग के बाद ऐसी भयानक सर्दी पड़े कि दुनिया से पेड़-पौधों का नामो-निशान ही मिट जाए। ऐसे में इंसानों की हालत क्या होगी ये समझा जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;">वैज्ञानिकों की मानें तो दोनों देशों के बीच एटमी जंग की सूरत में 2 करोड़ 10 लाख लोगों की मौत तो पहले ही हफ्ते में हो जाएगी. मौत का ये आंकड़ा दूसरे विश्व युद्ध में मारे गए लोगों की तादाद के मुकाबले आधा होगी। इतना ही नहीं मौत का ये आंकड़ा हिंदुस्तान में पिछले नौ सालों में आतंकवादी हमलों में मारे गए आम लोग, पुलिस, जवान और सुरक्षा बलों की कुल तादाद से 2 हजार 221 गुना ज्यादा होगा। इसका मतलब है कि इस वक्त आतंकवादी इंसान और इंसानियत को जितना नुकसान पहुंचा रहे हैं, परमाणु युद्ध उससे 2 हजार गुना ज्यादा इंसानों की जान लेगा।</p>
<p style="text-align: justify;">हालत ये होगी कि दुनिया के एक बड़े इलाके से पेड़-पौधों और वनस्पतियों क नामो-निशान तक मिट जाएगा और सिर्फ इसी वजह से लगभग 2 अरब लोग भूख से मारे जाएंगे। ये आंकड़े 2013 में भौतिक वैज्ञानिकों के अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने परमाणु युद्ध रोकने के लिए किए गए एक अध्ययन के बाद जारी किए थे।</p>
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		<title>भारत-पाक युद्ध संभानाओं से जम्मू-कश्मीर में दहशत का माहौल, पलायन बढ़ा</title>
		<link>http://www.aajkiawaaz.com/increased-migration-in-jammu-and-kashmir-after-army-surgical-strike</link>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 30 Sep 2016 12:30:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जम्मू और कश्मीर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : उरी आतंकी हमले के बाद भारत पाक के बीच बना युद्ध के माहौल ने जम्मू-कश्मीर के लोगों में दहशत पैदा कर दी है। पाकिस्तान की ओर से युद्ध के बढ़ते खतरे के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर में आपात उपायों को तेजी से लागू किया जाने लगा है। यहां हवाई हमलों से बचाव के उपायों पर जोर दिया जा रहा है वहीं चिकित्सा सुविधाओं की आपात व्यवस्था की जा रही है। इन उपायों के कारण सारे राज्य में आतंक और भय की लहर फैली है जिस कारण सीमा व LOC के क्षेत्रों से पलायन करने वालों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। POK में भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक से बौखलाए पाकिस्तान द्वारा भारत पर हमले की आशंका के बीच सीमाओं पर आरंभ हो चुके मिनी युद्धों के अन्य क्षेत्रों में भी फैल जाने के कारण तथा पाकिस्तान द्वारा किसी भी समय अचानक हमला कर दिए जाने की आशंका से अब पूरा जम्मू-कश्मीर चितामग्न है। इस आशंका के चलते जम्मू-कश्मीर सरकार ने अब उन कदमों को उठाना आरंभ किया है, जो युद्ध की स्थिति में बचाव के लिए उठाए जाते हैं। 10 किमी के सीमा क्षेत्रों को खाली करने के प्रति आधिकारिक घोषणा केनिर्देश जारी किए जा चुके &#8230;</p>
<p>The post <a href="http://www.aajkiawaaz.com/increased-migration-in-jammu-and-kashmir-after-army-surgical-strike">भारत-पाक युद्ध संभानाओं से जम्मू-कश्मीर में दहशत का माहौल, पलायन बढ़ा</a> appeared first on <a href="http://www.aajkiawaaz.com">www.aajkiawaaz.com</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong>नई दिल्ली : उरी आतंकी हमले के बाद भारत पाक के बीच बना युद्ध के माहौल ने जम्मू-कश्मीर के लोगों में दहशत पैदा कर दी है। पाकिस्तान की ओर से युद्ध के बढ़ते खतरे के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर में आपात उपायों को तेजी से लागू किया जाने लगा है। यहां हवाई हमलों से बचाव के उपायों पर जोर दिया जा रहा है वहीं चिकित्सा सुविधाओं की आपात व्यवस्था की जा रही है। इन उपायों के कारण सारे राज्य में आतंक और भय की लहर फैली है जिस कारण सीमा व LOC के क्षेत्रों से पलायन करने वालों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।</strong></p>
<p style="text-align: justify;">POK में भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक से बौखलाए पाकिस्तान द्वारा भारत पर हमले की आशंका के बीच सीमाओं पर आरंभ हो चुके मिनी युद्धों के अन्य क्षेत्रों में भी फैल जाने के कारण तथा पाकिस्तान द्वारा किसी भी समय अचानक हमला कर दिए जाने की आशंका से अब पूरा जम्मू-कश्मीर चितामग्न है। इस आशंका के चलते जम्मू-कश्मीर सरकार ने अब उन कदमों को उठाना आरंभ किया है, जो युद्ध की स्थिति में बचाव के लिए उठाए जाते हैं।</p>
<p>10 किमी के सीमा क्षेत्रों को खाली करने के प्रति आधिकारिक घोषणा केनिर्देश जारी किए जा चुके हैं। सरकार ने लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए बंकरों, खंदकों तथा खाइयों के निर्माण की सलाह तो दी ही है, उसने हवाई हमलों से बचाव के लिए आप भी तैयारियां आरंभ कर दी हैं।</p>
<p>सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सारे राज्य में हवाई हमलों से बचाव के लिए सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं जिनमें सभी सैनिक हवाई अड्डों के आसपास मिसाइलों के साथ-साथ विमानभेदी तोपों की तैनाती भी शामिल है तो सैनिक व अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए विमानभेदी तोपों को तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>साथ ही सैनिक व हवाई अड्डों के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को ये इलाके खाली करने के लिए कहा गया है। अधिकारियों के अनुसार इन लोगों को ऐसा करने के लिए इसलिए कहा गया है, क्योंकि पाकिस्तानी हमले के शिकार आसपास के रहने वाले लोग इसलिए भी हो सकते हैं, क्योंकि उनके निशाने हवाई अड्डे तथा सैनिक प्रतिष्ठान ही रहेंगें।</p>
<p>इसके अतिरिक्त सभी कस्बों में हवाई हमलों की चेतावनी देने के लिए सायरनों को भी तैनात किया जा रहा है जबकि नागरिक सुरक्षा विभाग पहले ही लोगों को हमलों की दशा में बचाव के उपायों का प्रशिक्षण दे रहा है। इसके प्रति ब्लैकआउट का अभ्यास जम्मू में करने की घोषणा भी की गई है।</p>
<p>आपात उपायों में चिकित्सा सुविधाओं की आपात व्यवस्था भी की जा रही है। जहां गैरसरकारी तौर पर डॉक्टरों की ड्यूटी अभी से आपात स्थिति के लिए लागू कर दी गई है वहीं प्राइवेट नर्सिंग होम्स को हताहतों की आशंका के मद्देनजर अपने आपको तैयार रहने को कहा गया है।</p>
<p>सरकार द्वारा युद्ध को लेकर जो आपात उपाय किए जा रहे हैं उनके कारण राज्य में आतंक तथा भय की लहर है। अधिकारी मानते हैं कि ऐसा होना स्वाभाविक है, क्योंकि पाकिस्तान की ओर से हमलों की आशंका दिनोदिन बढ़ती जा रही है।</p>
<p>राज्य सरकार द्वारा आपात उपायों को करने में तेजी लाई गई है। इसका प्रभाव सीमा क्षेत्रों पर भी पड़ा है। सीमा क्षेत्रों से मिलने वाले समाचारों में कहा गया है कि सरकार ने जो आपात उपाय पाक हमले से बचाव के लिए करने आरंभ किए हैं, उसने सीमा क्षेत्रों से पलायन को और बढ़ावा दिया है। याद रहे कि केंद्र सरकार ने 10 किमी के सीमा क्षेत्रों से आबादी को दूर चले जाने को कहा है।</p>
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