Mallikarjun Kharge के PM मोदी के दिवंगत पिता पर बयान को लेकर राजनाथ सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। जानिए पटना में क्या हुआ और बीजेपी ने क्या कहा। Copy
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खरगे के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकार का विरोध करना, नीतियों पर सवाल उठाना और आलोचना करना पूरी तरह उचित है, लेकिन राजनीतिक विरोध के दौरान व्यक्तिगत मर्यादा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस विवाद को केवल एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित न बताते हुए भारतीय राजनीति की गरिमा से भी जोड़ा।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद रविवार, 25 अक्टूबर को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। कार्यक्रम बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था। यहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भाषण दे रहे थे। इसी दौरान श्रोताओं में मौजूद एक व्यक्ति की टिप्पणी के जवाब में खरगे ने कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधा।
राजनाथ सिंह ने जताई नाराजगी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खरगे की टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की भाषा सार्वजनिक जीवन में अपेक्षित मर्यादा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के बयान से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और विवादित टिप्पणी पर खेद जताने के बजाय उसका बचाव किया जा रहा है।
राजनाथ सिंह के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति से अधिक संयम, गंभीरता और जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत अपमान में बदलना लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए उचित नहीं है।
‘सरकार की आलोचना कीजिए, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखिए’
राजनाथ सिंह ने अपने संदेश में कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और उसका विरोध करना विपक्ष का अधिकार है। हालांकि, आलोचना करते समय भाषा और व्यवहार की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत टिप्पणी तक ले जाना स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा नहीं है। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि ऐसी टिप्पणियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के संकल्प को कमजोर नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस पर वैचारिक पतन का आरोप
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की भाषा राजनीतिक संवाद के स्तर को नीचे ले जा रही है। उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेदों का जवाब तर्क और नीतियों के आधार पर दिया जाना चाहिए, न कि किसी नेता के परिवार को निशाना बनाकर।
उन्होंने अपने बयान में जनता की भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि लोकतंत्र में जनता नेताओं के व्यवहार और बयानों पर नजर रखती है तथा समय आने पर अपना फैसला सुनाती है।
बयान के बाद बीजेपी ने की आलोचना
खरगे की टिप्पणी सामने आने के बाद बीजेपी के कई नेताओं ने इसकी आलोचना की और कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस बयान पर आपत्ति जताई। बीजेपी ने इस घटना को प्रधानमंत्री और उनके परिवार के प्रति अनुचित टिप्पणी बताते हुए राजनीतिक मर्यादा का मुद्दा उठाया।
वहीं, पटना के कार्यक्रम में टिप्पणी करने वाले व्यक्ति संतोष कुमार ने बाद में दावा किया कि उनकी बात को गलत समझा गया था। उनके मुताबिक, उनके कथन का पूरा संदर्भ अलग था। इस स्पष्टीकरण के बावजूद खरगे की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच मर्यादा पर बहस
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक भाषणों में इस्तेमाल होने वाली भाषा और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा के सवाल को चर्चा में ला दिया है। लोकतंत्र में सरकार की आलोचना और विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन राजनीतिक संवाद में संयम और जिम्मेदारी बनाए रखने की जरूरत भी लगातार रेखांकित की जाती रही है।

