नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कांग्रेस को सौंपे गए एक प्रेसीडेंट डिटरमिनेशन में भारत को उन देशों की सूची में शामिल किया है, जहां अवैध ड्रग्स का उत्पादन और ट्रांजिट बड़े पैमाने पर होता है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी और निर्माण न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार यह सूची भौगोलिक, व्यापारिक और आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है, जो ड्रग्स की तस्करी को बढ़ावा देते हैं। इस सूची में एशियाई देशों में अफगानिस्तान, बर्मा, चीन, भारत और पाकिस्तान शामिल हैं, जबकि अन्य महाद्वीपों के 18 और देश भी इसमें शामिल हैं।
अफगानिस्तान पर विशेष आलोचना
ट्रंप ने खासतौर पर अफगानिस्तान को कठघरे में खड़ा किया। उनका कहना था कि सार्वजनिक प्रतिबंधों के बावजूद वहां अफीम और हेरोइन का उत्पादन जारी है। इसी तरह बोलीविया, कोलंबिया और वेनेजुएला जैसे देशों पर भी मादक पदार्थ विरोधी प्रतिबद्धताओं को निभाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया गया।
फेंटेनाइल और सिंथेटिक ड्रग्स पर चिंता
राष्ट्रपति ट्रंप ने सिंथेटिक ओपिओइड्स, खासकर फेंटेनाइल के खतरे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह 18 से 44 वर्ष की आयु के अमेरिकियों की मौत का प्रमुख कारण बन चुका है और अमेरिका में गंभीर जन स्वास्थ्य संकट पैदा कर रहा है। साथ ही भारत-पाक सीमा पर ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी की बढ़ती घटनाओं का भी हवाला दिया।
भारत क्यों है सूची में शामिल?
भारत की भौगोलिक स्थिति इसे ड्रग्स की तस्करी का एक अहम केंद्र बनाती है। यह दो बड़े अफीम-उत्पादक क्षेत्रों –
- गोल्डन क्रिसेंट (पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान)
- गोल्डन ट्राएंगल (म्यांमार, लाओस, थाईलैंड)
के बीच स्थित है। यही वजह है कि भारत को ट्रांजिट हब के तौर पर देखा जाता है।
सिर्फ तस्करी ही नहीं, बल्कि भारत में सिंथेटिक ड्रग्स (जैसे मेथामफेटामाइन और मेफेड्रोन) का अवैध उत्पादन भी हो रहा है। महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, दिल्ली-एनसीआर और पूर्वोत्तर के कुछ राज्य इन गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बताए जाते हैं।
किन रास्तों से आती है ड्रग्स?
- पंजाब, राजस्थान और जम्मू–कश्मीर की सीमाओं से पाकिस्तान से हेरोइन तस्करी।
- पूर्वोत्तर राज्यों – मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड – से म्यांमार से सप्लाई।
- मुंबई, गुजरात, केरल और तमिलनाडु जैसे तटीय राज्यों से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क।
- डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी का बढ़ता इस्तेमाल।
भारत की कार्रवाई
भारत सरकार और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) लगातार कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं। 2024 में गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि 16,914 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थ जब्त किए गए, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
- नवंबर 2023 तक: 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की जब्ती।
- जून 2022–मार्च 2023: 22,000 करोड़ रुपये मूल्य के ड्रग्स पकड़े गए।
लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आंकड़े वास्तविक कारोबार का केवल छोटा हिस्सा हैं। असली अवैध व्यापार कई लाख करोड़ रुपये का हो सकता है।
कितने लोग करते हैं नशा?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार:
- 3.1 करोड़ लोग भांग का सेवन करते हैं।
- 1.07 करोड़ लोग कोकीन, अफीम और अन्य अवैध ड्रग्स का सेवन करते हैं।
- 2023-24 में नशामुक्ति कार्यक्रमों से 5.8 लाख लोग लाभान्वित हुए।
मौतों का आंकड़ा
- 2019 NCRB डेटा: रोज़ाना औसतन 21 आत्महत्याएं ड्रग्स या शराब की लत से।
- 2017 की रिपोर्ट: अवैध ड्रग्स के कारण भारत में 22,000 मौतें।
- पंजाब जैसे राज्यों में नकली नशे और ओवरडोज से सबसे अधिक मामले दर्ज हुए।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप के दावे पूरी तरह बेबुनियाद नहीं हैं, क्योंकि भारत तस्करी और अवैध उत्पादन दोनों से प्रभावित है। हालांकि भारत सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है और रिकॉर्ड स्तर पर जब्ती और गिरफ्तारियां हो रही हैं। फिर भी भारत की भौगोलिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का फैलाव इसे पूरी तरह सुरक्षित नहीं बना पा रहा।
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा स्तर पर अवैध ड्रग्स के खतरे को कम किया जाए, ताकि यह व्यापार आने वाली पीढ़ियों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए घातक न बने।

