भारत से तनातनी के चलते बांग्लादेश के टेक्सटाइल सेक्टर पर संकट गहराया। ₹9 हजार करोड़ का सूत बिना बिके पड़ा, 40-50 मिलें बंद। जानिए पूरी रिपोर्ट।
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भारत से रिश्तों में तल्खी अब बांग्लादेश को भारी आर्थिक नुकसान में बदलती दिख रही है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में लिए गए फैसलों का सीधा असर बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर पड़ा है। हालात ऐसे हैं कि देश की कताई मिलों के पास करीब ₹9 हजार करोड़ का सूत बिना बिके पड़ा है, जबकि दर्जनों मिलें बंद हो चुकी हैं।
₹9 हजार करोड़ का स्टॉक, खरीददार नदारद
बांग्लादेश टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन (BTMA) के मुताबिक, भारतीय सूत की भारी आमद के कारण स्थानीय मिलें प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पा रहीं। अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत से सूत का आयात 137 प्रतिशत तक बढ़ गया।
भारतीय व्यापारी घरेलू कीमतों से भी 0.30 डॉलर प्रति किलो कम दर पर सूत बेच रहे हैं, जिससे बांग्लादेश की करीब 40–50 स्पिनिंग मिलें बंद हो चुकी हैं।
भारत से सूत आयात पर बैन क्यों लगाया गया?
दरअसल, बांग्लादेश सरकार भारतीय सूत पर निर्भरता कम करना चाहती थी। डर यह था कि यदि भविष्य में भारत आपूर्ति रोक दे, तो बांग्लादेश का परिधान उद्योग ठप हो सकता है।
इसी सोच के तहत अप्रैल 2025 में लैंड पोर्ट के जरिए भारत से सूत आयात पर प्रतिबंध लगाया गया। हालांकि, यह प्रतिबंध समुद्री मार्ग से आने वाले सूत पर लागू नहीं हुआ।
फैसला उल्टा पड़ गया
नीति का असर उल्टा हुआ। भारतीय सस्ते सूत की भरमार से बांग्लादेशी मिलों का माल बिकना बंद हो गया। स्थानीय मिलों को जहां सूत 3 डॉलर प्रति किलो में बेचना पड़ रहा है, वहीं भारतीय सूत 2.50 डॉलर प्रति किलो में उपलब्ध है।
क्यों इंटरनेशनल ब्रांड भी भारतीय सूत को दे रहे तरजीह?
कम कीमत और स्थिर सप्लाई के कारण अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भी भारतीय सूत को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार:
अप्रैल–अक्टूबर 2025 में भारत से सूत आयात 950 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया
कुल सूत आयात में भारत की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत हो चुकी है
बांग्लादेश अब भारत का सबसे बड़ा सूत आयातक बन गया है
यूनुस सरकार पर दबाव, मिल मालिकों की चेतावनी
BTMA ने सरकार से 72 घंटे के भीतर राहत पैकेज की मांग की है। मिल मालिकों का कहना है कि वे पूर्ण प्रतिबंध नहीं चाहते, बल्कि:
- घरेलू स्तर पर उपलब्ध किस्मों के सूत पर रोक
- 25% नकद प्रोत्साहन
- बैक-टू-बैक LC सुविधा
- अमेरिकी कपास के लिए वेयरहाउसिंग व्यवस्था
जैसे कदम उठाने की जरूरत है, ताकि उद्योग को बचाया जा सके।
मिलें बंद, रोजगार पर संकट
उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक भारत अपने कपास किसानों से लेकर निर्यातकों तक कई स्तरों पर सब्सिडी और प्रोत्साहन देता है, जिससे भारतीय सूत बेहद प्रतिस्पर्धी बन गया है।
बांग्लादेश में पहले ही 40–50 मिलें बंद हो चुकी हैं और सैकड़ों मजदूरों का रोजगार खतरे में है। श्रम कानूनों में संभावित बदलाव से स्थिति और बिगड़ सकती है।
भारत से टकराव की नीति और अधूरी व्यापार रणनीति ने बांग्लादेश को आर्थिक मोर्चे पर कमजोर कर दिया है। मोहम्मद यूनुस की जिद अब टेक्सटाइल सेक्टर को डुबोती नजर आ रही है। अगर जल्द नीतिगत सुधार नहीं हुए, तो यह संकट और गहराने वाला है।

