अमेरिकी रिपोर्ट में दावा—चीन ईरान को ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट फ्यूल तकनीक से मदद कर रहा है। मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच इस खुलासे से वैश्विक चिंता बढ़ी।
वॉशिंगटन/मिडिल ईस्ट: Iran और United States के बीच जारी तनावपूर्ण हालात के बीच एक नई रिपोर्ट ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है।
अमेरिकी संस्था US-China Economic and Security Review Commission की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि China अब ईरान को ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट फ्यूल तकनीक के जरिए मदद पहुंचा रहा है।
रिपोर्ट में क्या हुआ बड़ा खुलासा?
रिपोर्ट के मुताबिक:
- चीन ईरान को एंटी-शिप क्रूज मिसाइल तकनीक दे रहा है
- ड्रोन और सैन्य उपकरणों के लिए तकनीकी सहयोग बढ़ा है
- रॉकेट फ्यूल बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की सप्लाई की जा रही है
बताया गया है कि 2 मार्च को चीन के दो जहाज ऐसे रसायन लेकर ईरान की ओर गए, जिनका उपयोग रॉकेट फ्यूल बनाने में किया जाता है, जैसे सोडियम परक्लोरेट।
चीन की रणनीति में बदलाव?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पहले China खाड़ी देशों के साथ अपने संबंध खराब होने के डर से ईरान को सीधे सैन्य सहायता देने से बचता था और केवल “ड्यूल यूज” तकनीक (जो नागरिक और सैन्य दोनों उपयोग में आ सकती है) ही देता था।
लेकिन अब:
- चीन सीधे रक्षा तकनीक साझा कर रहा है
- सैन्य सहयोग पहले से ज्यादा खुलकर सामने आ रहा है
यह बदलाव मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
BeiDou सिस्टम का इस्तेमाल
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान चीन के BeiDou Navigation System का उपयोग कर रहा है।
यह सिस्टम GPS की तरह काम करता है और इसका इस्तेमाल:
- मिसाइल गाइडेंस
- सैन्य नेविगेशन
- ड्रोन ऑपरेशन
में किया जा सकता है।
BRICS और SCO से मजबूत हो रहे रिश्ते
China और Iran के बीच बढ़ते रिश्ते सिर्फ सैन्य तक सीमित नहीं हैं।
दोनों देश:
- BRICS
- Shanghai Cooperation Organisation
जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सहयोग बढ़ा रहे हैं।
25 साल का रणनीतिक समझौता
दोनों देशों के रिश्तों को मजबूती देने वाला सबसे बड़ा कदम 2021 का 25 साल का समझौता है।
इस समझौते के तहत:
- चीन ईरान में इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी में निवेश करेगा
- ईरान चीन को सस्ती दर पर तेल और गैस उपलब्ध कराएगा
यह साझेदारी दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक फायदे का आधार बन रही है।
वैश्विक राजनीति पर असर
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद:
- मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ सकता है
- अमेरिका और चीन के बीच टकराव तेज हो सकता है
- वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है
हालांकि चीन और ईरान की ओर से इन दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।

