ग्लोबल एनर्जी डेस्क | नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा संकट का केंद्र बना हुआ है। हालांकि यह सवाल उठ रहा है कि अगर यह अहम जलमार्ग खुल भी जाता है, तो क्या तेल और गैस की कीमतों में राहत मिलेगी? विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ रास्ता खुलना ही समाधान नहीं है, क्योंकि असली पेंच सप्लाई चेन और शिपिंग सिस्टम में फंसा हुआ है।
हॉर्मुज खुलने पर भी क्यों नहीं सुलझेगी समस्या?
Iran और United States के बीच तनाव के चलते इस रूट पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- केवल स्ट्रेट खोलने से जहाजों का आना-जाना तुरंत सामान्य नहीं होगा
- सप्लाई चेन को पटरी पर आने के लिए खाली जहाजों का वापस खाड़ी में जाना जरूरी है
- बिना रिटर्न फ्लो के तेल, LPG और अन्य सामान की आपूर्ति बाधित ही रहेगी
400 से ज्यादा टैंकर फंसे, शिपिंग कंपनियों में डर
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- करीब 400 तेल टैंकर बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं
- जबकि केवल 100 खाली जहाज ही अंदर जाने के लिए तैयार हैं
- पहले जहां रोजाना 100+ जहाज गुजरते थे, अब संख्या घटकर 10 से भी कम रह गई है
Kpler के विश्लेषक Matt Smith के अनुसार:
“अगर आज रास्ता खुल भी जाए, तो सप्लाई सामान्य होने में जुलाई तक का समय लग सकता है।”
सीजफायर पर भरोसा नहीं, कंपनियां नहीं ले रहीं रिस्क
eToro की मार्केट एनालिस्ट Lale Akoner का कहना है:
कमजोर या अस्थायी सीजफायर (Ceasefire) से भरोसा नहीं बनता
बीमा कंपनियां और शिपिंग ऑपरेटर्स जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं
जहाज मालिक तब तक अंदर नहीं जाएंगे जब तक लंबे समय की सुरक्षा गारंटी न मिले
खाद और जरूरी सामान की सप्लाई पर भी असर
S&P Global Market Intelligence के Peter Tirschwell के अनुसार:
- दुनिया की करीब 30% खाद (fertilizer) इसी क्षेत्र से आती है
- जहाजों की कमी से खाद और जरूरी सामान महीनों तक फंस सकते हैं
- स्टोरेज की कमी के कारण तेल और खाद का उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है
तेल बाजार में उछाल, कीमतें 100 डॉलर के पार
तनाव बढ़ने के बाद:
- ब्रेंट क्रूड की कीमत 8% बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई
- वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है
- आयात पर निर्भर देशों (जैसे भारत) पर दबाव बढ़ा है
असली पेंच कहां फंसा है?
पूरी समस्या के पीछे 3 बड़ी वजहें हैं:
- शिपिंग असंतुलन – भरे जहाज बाहर, खाली जहाज अंदर नहीं जा रहे
- सुरक्षा का डर – कंपनियां जोखिम लेने को तैयार नहीं
- सप्लाई चेन ब्रेकडाउन – उत्पादन, स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट सब प्रभावित
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना जरूर राहत की दिशा में पहला कदम हो सकता है, लेकिन तेल संकट तुरंत खत्म नहीं होगा। जब तक शिपिंग सिस्टम सामान्य नहीं होता और कंपनियों का भरोसा वापस नहीं आता, तब तक वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी।

