कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में हरियाणा के पलवल जिले के होडल क्षेत्र में वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि एक ही घर से 66 वोट पड़े हैं, और इसे उन्होंने फर्जी वोटिंग का उदाहरण बताया। उनका यह बयान चुनावी माहौल में तेजी से चर्चा में आ गया। लेकिन जब न्यूज की टीम मौके पर पहुंची, तो जो सच सामने आया वह राहुल गांधी के दावे से काफी अलग था।
जिस घर पर सवाल उठाया गया, वह साधारण नहीं, बड़ा संयुक्त परिवार
राहुल गांधी ने जिस मकान नंबर 265 का जिक्र किया था, न्यूज की टीम ने उसी पते पर पहुंचकर जांच की। टीम ने पाया कि यह कोई एक कमरों वाला सामान्य मकान नहीं, बल्कि करीब एक एकड़ में फैला एक विशाल साझा परिवार का आवास है।
यहां एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां साथ रहती हैं। वर्षों पहले यह पूरी जमीन खेती के लिए उपयोग होती थी, लेकिन परिवार बढ़ने के साथ जमीन के टुकड़े कर-कर के अलग-अलग घर बना दिए गए।
क्यों एक ही नंबर पर दर्ज हैं इतने घर?
स्थानीय बुजुर्ग शिवराम स्रौत ने बताया—
“पहले पूरी जमीन एक ही खाता और एक ही मकान नंबर में दर्ज थी। बाद में परिवार बढ़ा, घर बढ़े… लेकिन दस्तावेजों में मकान नंबर वही 265 चलता रहा।”
यानी घर बढ़े, परिवार बढ़ा, लेकिन पता वही रहा। यही वजह है कि
एक किलोमीटर के दायरे में बने कई घर अब भी सरकारी रिकॉर्ड में ‘मकान नंबर 265’ के रूप में दर्ज हैं।
क्या वाकई फर्जी वोटिंग हुई?
ग्राउंड रिपोर्ट में पता चला:
सभी मतदाताओं के असली वोटर कार्ड और आधार कार्ड मौजूद हैं
किसी भी नाम का डुप्लीकेशन नहीं मिला
एक व्यक्ति का भी फर्जी वोट मौजूद नहीं है
यह मामला फर्जी वोटिंग का नहीं, बल्कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड की समस्या का है, जो आज भी कई ग्रामीण इलाकों में आम है।
राहुल गांधी के आरोप बनाम ज़मीनी सच्चाई
दावा हकीकत
एक घर में 66 फर्जी वोट एक बड़े संयुक्त परिवार की 3 पीढ़ियां एक ही पुराने मकान नंबर से दर्ज
चुनाव आयोग की लापरवाही असल में पुराना राजस्व रिकॉर्ड और एक ही खाता नंबर की प्रणाली
फर्जी मतदान का मामला सभी वोटर वास्तविक, पहचान सत्यापित
स्थानीय लोगों ने क्या कहा?
ग्रामीणों ने बताया कि इस क्षेत्र में ऐसे कई परिवार हैं जिनके घर तो अलग हैं, लेकिन पता पिछले रिकॉर्ड के हिसाब से एक ही दर्ज है।
उनके अनुसार:
“यहां मतदाता अधिक हैं, लेकिन वोट सबके असली हैं। किसी का नाम बेवजह नहीं जोड़ा गया।”
राहुल गांधी के आरोप ने यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस में ला दिया था, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट से यह साफ हो गया कि मामला फर्जी वोटिंग का नहीं, बल्कि एक बड़े संयुक्त परिवार और पुराने भूमि अभिलेखों की प्रणाली का है।
मतदाताओं की संख्या भले अधिक दिखाई दे,
पर सभी वोट वास्तविक हैं और सभी मतदाता वहीं रहने वाले लोग हैं।

