Delhi Malviya Nagar Fire: क्या दिल्ली बनती जा रही है ‘फायर कैपिटल’? हर दिन 65 जगह लगती है आग, 4 महीनों में 7800 से ज्यादा मामले

Delhi Malviya Nagar Fire: दिल्ली में हर दिन औसतन 65 जगह आग लग रही है। 2026 के पहले चार महीनों में 7800 से ज्यादा अग्निकांड दर्ज हुए। जानिए क्यों बढ़ रहे हैं फायर हादसे और कितनी सुरक्षित है राजधानी दिल्ली।

नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में हुए भीषण अग्निकांड ने राजधानी की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 47 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या दिल्ली लगातार आग की घटनाओं के मामले में अधिक असुरक्षित होती जा रही है?

दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के आंकड़े इस चिंता को और गहरा करते हैं। वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में राजधानी में आग से जुड़ी 7,800 से अधिक आपातकालीन घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसका मतलब है कि दिल्ली में औसतन हर दिन 65 और हर घंटे लगभग 3 जगह आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

2026 में आग की घटनाओं में बड़ा उछाल

दिल्ली अग्निशमन सेवा के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच कुल 7,800 से अधिक आग से संबंधित कॉल दर्ज की गईं। इनमें से केवल अप्रैल महीने में ही 2,300 से ज्यादा मामले सामने आए, जो कुल घटनाओं का लगभग 30 प्रतिशत हैं।

तुलना करें तो वर्ष 2025 की इसी अवधि में 6,511 घटनाएं दर्ज हुई थीं। यानी इस साल आग लगने की घटनाओं में लगभग 1,290 मामलों की वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी राजधानी में अग्नि सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

एक दिन में 250 से ज्यादा कॉल तक पहुंची संख्या

दिल्ली अग्निशमन विभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी ए.के. मलिक ने हाल ही में बताया था कि आग से संबंधित कॉल्स की संख्या प्रतिदिन 250 तक पहुंच रही है। उन्होंने जानकारी दी कि एक दिन में विभाग को 256 आपातकालीन कॉल प्राप्त हुई थीं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती हैं।

हाल के महीनों में सामने आए बड़े अग्निकांड

राजधानी में पिछले कुछ महीनों के दौरान कई बड़े अग्निकांड सामने आए हैं, जिनमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ।

मालवीय नगर होटल अग्निकांड

1 जून 2026 को मालवीय नगर स्थित होटल में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि 47 लोगों को रेस्क्यू किया गया।

आईटीओ शिक्षा मंत्रालय कार्यालय में आग

1 जून 2026 को आईटीओ स्थित स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) परिसर में शिक्षा मंत्रालय के कार्यालय की दूसरी मंजिल पर आग लग गई।

मुखर्जी नगर की चार मंजिला इमारत में आग

31 मई 2026 को मुखर्जी नगर स्थित एक चार मंजिला इमारत में भीषण आग लगने की घटना सामने आई।

विवेक विहार अग्निकांड

3 मई 2026 को विवेक विहार इलाके में लगी आग में 9 लोगों की मौत हो गई थी।

पालम त्रासदी

18 मार्च 2026 को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम क्षेत्र में एक रिहायशी इमारत में आग लगने से तीन बच्चों सहित 9 लोगों की जान चली गई थी।

द्वारका शपथ सोसाइटी हादसा

जून 2025 में द्वारका सेक्टर-13 स्थित शपथ सोसाइटी में लगी आग के दौरान सातवीं मंजिल से कूदने के कारण एक पिता और उसके दो बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।

2009 से लगातार बढ़ रहे अग्निकांड

दिल्ली अग्निशमन सेवा के वार्षिक आंकड़े बताते हैं कि पिछले डेढ़ दशक में आग की घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में लगातार वृद्धि हुई है।

वर्ष 2009-10 में 21,314 कॉल प्राप्त हुई थीं और 423 लोगों की मौत हुई थी. वर्ष 2010-11 में 22,187 कॉल और 447 मौतें दर्ज हुईं. 2011-12 में 18,143 कॉल और 357 मौतें, 2012-13 में 22,581 कॉल और 285 मौतें दर्ज की गईं.

वर्ष 2014-15 में 23,242 कॉल और 291 मौतें, 2015-16 में 27,089 कॉल और 339 मौतें, 2016-17 में 30,285 कॉल और 277 मौतें तथा 2017-18 में 29,423 कॉल और 318 मौतें दर्ज हुईं. 2018-19 में 31,264 कॉल और 297 मौतें, 2019-20 में 31,157 कॉल और 308 मौतें तथा 2020-21 में 25,709 कॉल और 346 मौतें दर्ज की गईं.

वर्ष 2021-22 में 27,343 कॉल के साथ 591 लोगों की मौत हुई. 2022-23 में 31,958 कॉल और 1,029 मौतें दर्ज की गईं. वहीं 2023-24 में 31,575 कॉल के दौरान 3,232 लोग घायल हुए और 1,303 लोगों की मौत हुई.

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि आग की घटनाओं के साथ-साथ मृतकों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।

क्यों बढ़ रही हैं आग की घटनाएं?

विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली में बढ़ती आबादी, अवैध निर्माण, अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी, पुराने बिजली नेटवर्क, भीड़भाड़ वाले बाजार और व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा उपायों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।

कई मामलों में भवनों के पास वैध फायर एनओसी नहीं होती, जबकि कुछ जगहों पर आपातकालीन निकासी मार्ग भी अवरुद्ध पाए जाते हैं। मालवीय नगर हादसे के बाद ऐसे मामलों की जांच और तेज होने की संभावना है।

क्या दिल्ली की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर्याप्त है?

लगातार बढ़ते अग्निकांड यह संकेत दे रहे हैं कि केवल फायर ब्रिगेड की त्वरित प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि भवन निर्माण नियमों का सख्ती से पालन, नियमित फायर ऑडिट, अवैध निर्माणों पर कार्रवाई और नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।

मालवीय नगर हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि राजधानी की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में ऐसी घटनाएं और भी घातक साबित हो सकती हैं।