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	<title>Russia Archives - www.aajkiawaaz.com</title>
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		<title>विदेश में भारत का इकलौता एयरबेस बंद — ताजिकिस्तान के आयनी बेस से हटे भारतीय जवान, क्या रूस ने बढ़ाया दबाव?</title>
		<link>http://www.aajkiawaaz.com/indias-only-airbase-abroad-closed-indian-soldiers-withdraw-from-tajikistans-ayni-base-did-russia-increase-pressure</link>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Oct 2025 11:12:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्य ख़बरें]]></category>
		<category><![CDATA[Central Asia]]></category>
		<category><![CDATA[indian soldiers]]></category>
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		<category><![CDATA[Tajikistan]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत ने मध्य एशिया में अपनी सबसे रणनीतिक सैन्य मौजूदगी खत्म कर दी है। ताजिकिस्तान के आयनी (Ayni) एयरबेस से भारत ने औपचारिक रूप से अपना ऑपरेशन समेट लिया है। यह वही बेस है जो 2002 से भारतीय नियंत्रण में था और अफगानिस्तान व पाकिस्तान पर नज़र रखने के लिहाज से बेहद अहम माना जाता था। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कदम भारत और ताजिकिस्तान के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते की अवधि 2022 में समाप्त होने के बाद उठाया गया। समझौता आगे नहीं बढ़ाया गया और अब वहां से भारतीय वायुसेना और सेना के अधिकारी, सैनिक और सभी सैन्य उपकरण हटा लिए गए हैं। क्या है आयनी एयरबेस का इतिहास? आयनी एयरबेस, जिसे गिस्सार मिलिट्री एयरोड्रोम (GMA) भी कहा जाता है, ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे से करीब 10 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। यह बेस सोवियत काल में बना था लेकिन सोवियत संघ के विघटन के बाद यह जर्जर हालत में पहुंच गया। 2001 में जब अफगानिस्तान में तालिबान का प्रभाव बढ़ा, तब भारत के रणनीतिक विशेषज्ञों ने इस एयरबेस को पुनर्जीवित करने और संयुक्त संचालन (Joint Operation) के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव दिया। उस समय रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस, एनएसए अजीत डोभाल, और पूर्व वायुसेना प्रमुख बी.एस. &#8230;</p>
<p>The post <a href="http://www.aajkiawaaz.com/indias-only-airbase-abroad-closed-indian-soldiers-withdraw-from-tajikistans-ayni-base-did-russia-increase-pressure">विदेश में भारत का इकलौता एयरबेस बंद — ताजिकिस्तान के आयनी बेस से हटे भारतीय जवान, क्या रूस ने बढ़ाया दबाव?</a> appeared first on <a href="http://www.aajkiawaaz.com">www.aajkiawaaz.com</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>भारत ने मध्य एशिया में अपनी सबसे रणनीतिक सैन्य मौजूदगी खत्म कर दी है। ताजिकिस्तान के आयनी (Ayni) एयरबेस से भारत ने औपचारिक रूप से अपना ऑपरेशन समेट लिया है। यह वही बेस है जो 2002 से भारतीय नियंत्रण में था और अफगानिस्तान व पाकिस्तान पर नज़र रखने के लिहाज से बेहद अहम माना जाता था।</p>
<p>सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कदम भारत और ताजिकिस्तान के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते की अवधि 2022 में समाप्त होने के बाद उठाया गया। समझौता आगे नहीं बढ़ाया गया और अब वहां से भारतीय वायुसेना और सेना के अधिकारी, सैनिक और सभी सैन्य उपकरण हटा लिए गए हैं।</p>
<p><strong>क्या है आयनी एयरबेस का इतिहास?</strong></p>
<p>आयनी एयरबेस, जिसे गिस्सार मिलिट्री एयरोड्रोम (GMA) भी कहा जाता है, ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे से करीब 10 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। यह बेस सोवियत काल में बना था लेकिन सोवियत संघ के विघटन के बाद यह जर्जर हालत में पहुंच गया।</p>
<p>2001 में जब अफगानिस्तान में तालिबान का प्रभाव बढ़ा, तब भारत के रणनीतिक विशेषज्ञों ने इस एयरबेस को पुनर्जीवित करने और संयुक्त संचालन (Joint Operation) के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव दिया।</p>
<p>उस समय रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस, एनएसए अजीत डोभाल, और पूर्व वायुसेना प्रमुख बी.एस. धनोआ ने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p><strong>भारत ने किया था ₹830 करोड़ का निवेश</strong></p>
<p>भारत ने इस एयरबेस के पुनर्निर्माण में करीब 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹830 करोड़) खर्च किए।</p>
<ul>
<li>रनवे को 3,200 मीटर लंबा किया गया।</li>
<li>हैंगर, ईंधन भरने और मरम्मत की सुविधाएं विकसित की गईं।</li>
<li>कई मौकों पर यहां SU-30 MKI फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टर भी तैनात किए गए।</li>
<li>लगभग 200 भारतीय सैनिक और तकनीकी विशेषज्ञ लंबे समय तक यहां तैनात रहे।</li>
</ul>
<p>2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया, तब भारत ने इसी एयरबेस का इस्तेमाल अपने नागरिकों और राजनयिकों की निकासी के लिए किया था।</p>
<p><strong>रूस और चीन का दबाव?</strong></p>
<p>‘द प्रिंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ताजिकिस्तान ने 2022 में भारत को सूचित किया कि वह लीज को आगे नहीं बढ़ाएगा और बेस का संचालन अब अपने नियंत्रण में लेगा।</p>
<p>इसके पीछे रूस और चीन का दबाव बताया जा रहा है। दोनों देशों ने ताजिकिस्तान से कहा था कि वह अपने क्षेत्र में “गैर-क्षेत्रीय देशों” की सैन्य उपस्थिति कम करे।<br />
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि भारत की वापसी के बाद रूसी सैनिकों ने इस बेस का नियंत्रण संभाल लिया है।</p>
<p>हालांकि भारत अब भी मध्य एशिया में राजनयिक और आर्थिक स्तर पर अपनी सक्रियता बनाए हुए है।</p>
<p><strong>क्यों था भारत के लिए इतना अहम यह बेस?</strong></p>
<p>आयनी एयरबेस भारत की सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता था —</p>
<ul>
<li>यह अफगानिस्तान के वखान कॉरिडोर से मात्र 20 किलोमीटर दूर स्थित है, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के बेहद करीब है।</li>
<li>यहां से भारत पेशावर और उसके आसपास के इलाकों की निगरानी कर सकता था।</li>
<li>युद्ध की स्थिति में यह बेस पाकिस्तान को पश्चिमी मोर्चे पर उलझाने में सक्षम था।</li>
<li>इसके अलावा, यह भारत की सेंट्रल एशिया में सैन्य उपस्थिति का प्रतीक था, जहां रूस और चीन पहले से प्रभावशाली हैं।</li>
</ul>
<p><strong>अफगानिस्तान में बदलाव के बाद घटा महत्व</strong></p>
<p>‘इकोनॉमिक टाइम्स’ के अनुसार, 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद इस बेस का रणनीतिक महत्व कम हो गया।</p>
<p>भारत की अफगान नीति नॉर्दर्न एलायंस के सहयोग पर आधारित थी, जो तालिबान के सत्ता में आने के बाद निष्क्रिय हो गई।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि भारत ने ताजिकिस्तान के फरखोर शहर में एक अस्पताल भी स्थापित किया था, जहां 2001 में अहमद शाह मसूद को आत्मघाती हमले के बाद इलाज के लिए लाया गया था।</p>
<p>आयनी एयरबेस से भारत की वापसी केवल एक सैन्य निर्णय नहीं, बल्कि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का संकेत है।<br />
रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव, अफगानिस्तान की स्थिति, और ताजिकिस्तान की घरेलू प्राथमिकताओं ने मिलकर भारत को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।</p>
<p>हालांकि यह वापसी भारत की रणनीतिक सोच में नया अध्याय खोल सकती है — जहां अब भारत को मध्य एशिया में अपनी मौजूदगी राजनयिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी के माध्यम से बनाए रखनी होगी।</p>
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		<title>ट्रंप ने दिया परमाणु हथियारों की टेस्टिंग का आदेश, रूस ने दी चेतावनी — बोला, “अमेरिका ने अगर कदम बढ़ाया, तो हम भी जवाब देंगे”</title>
		<link>http://www.aajkiawaaz.com/trump-orders-nuclear-weapons-testing-russia-warns-if-the-us-takes-action-we-will-respond</link>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Oct 2025 09:08:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अमरीका]]></category>
		<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्य ख़बरें]]></category>
		<category><![CDATA[nuclear power]]></category>
		<category><![CDATA[Russia]]></category>
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		<category><![CDATA[US President Donald Trum]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अमेरिका और रूस के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में रक्षा मंत्रालय को परमाणु हथियारों की टेस्टिंग शुरू करने का आदेश दिया है। ट्रंप के इस आदेश के बाद रूस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि रूस अमेरिका की कार्रवाई पर “बारीकी से नजर रख रहा है” और जरूरत पड़ने पर उसी के अनुरूप कदम उठाएगा। रूस की सख्त चेतावनी क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि कुछ देश परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं। अब तक हमारे पास इसकी कोई जानकारी नहीं है। अगर उनका इशारा हमारे हालिया ‘ब्यूरवेस्टिनक’ परीक्षण की ओर है, तो साफ कर दूं कि वह किसी भी रूप में परमाणु परीक्षण नहीं था।” पेस्कोव ने आगे कहा कि, “हर देश अपनी सुरक्षा प्रणाली मजबूत करने का अधिकार रखता है, लेकिन यह परमाणु परीक्षण के बराबर नहीं है। अगर अमेरिका परमाणु परीक्षण पर लगी रोक को हटाता है, तो रूस भी उसी स्थिति के अनुसार उचित प्रतिक्रिया देगा।” रूस ने किया था मिसाइल परीक्षण रूस ने 26 अक्टूबर 2025 को एक क्रूज मिसाइल के &#8230;</p>
<p>The post <a href="http://www.aajkiawaaz.com/trump-orders-nuclear-weapons-testing-russia-warns-if-the-us-takes-action-we-will-respond">ट्रंप ने दिया परमाणु हथियारों की टेस्टिंग का आदेश, रूस ने दी चेतावनी — बोला, “अमेरिका ने अगर कदम बढ़ाया, तो हम भी जवाब देंगे”</a> appeared first on <a href="http://www.aajkiawaaz.com">www.aajkiawaaz.com</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका और रूस के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में रक्षा मंत्रालय को परमाणु हथियारों की टेस्टिंग शुरू करने का आदेश दिया है। ट्रंप के इस आदेश के बाद रूस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि रूस अमेरिका की कार्रवाई पर “बारीकी से नजर रख रहा है” और जरूरत पड़ने पर उसी के अनुरूप कदम उठाएगा।</p>
<p><strong>रूस की सख्त चेतावनी</strong></p>
<p>क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा,</p>
<p>“राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि कुछ देश परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं। अब तक हमारे पास इसकी कोई जानकारी नहीं है। अगर उनका इशारा हमारे हालिया ‘ब्यूरवेस्टिनक’ परीक्षण की ओर है, तो साफ कर दूं कि वह किसी भी रूप में परमाणु परीक्षण नहीं था।”</p>
<p>पेस्कोव ने आगे कहा कि,</p>
<p>“हर देश अपनी सुरक्षा प्रणाली मजबूत करने का अधिकार रखता है, लेकिन यह परमाणु परीक्षण के बराबर नहीं है। अगर अमेरिका परमाणु परीक्षण पर लगी रोक को हटाता है, तो रूस भी उसी स्थिति के अनुसार उचित प्रतिक्रिया देगा।”</p>
<p><strong>रूस ने किया था मिसाइल परीक्षण</strong></p>
<p>रूस ने 26 अक्टूबर 2025 को एक क्रूज मिसाइल के सफल परीक्षण की जानकारी दी थी। रूस के इस कदम के कुछ दिनों बाद ही ट्रंप ने परमाणु हथियारों की टेस्टिंग का आदेश जारी कर दिया। ट्रंप ने बयान में यह भी दावा किया कि अमेरिका परमाणु शक्ति के मामले में दुनिया में सबसे आगे है।</p>
<p><strong>दुनिया में कितने हैं परमाणु हथियार?</strong></p>
<p>आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट’ द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों में बताया गया है कि 2025 तक दुनिया के 9 देशों के पास परमाणु हथियार हैं।<br />
इनमें सबसे ज्यादा रूस के पास 5,449 परमाणु हथियार हैं। वहीं, नाटो देशों के पास कुल मिलाकर 5,792 हथियार हैं, जिनमें से अमेरिका के पास अकेले 5,277 परमाणु हथियार हैं।</p>
<p><strong>बढ़ती वैश्विक चिंता</strong></p>
<p>अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका और रूस दोनों देश परमाणु परीक्षण की दिशा में बढ़ते हैं, तो यह वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है। दोनों देशों के बीच पहले से ही यूक्रेन युद्ध, नाटो विस्तार और रक्षा प्रतिबंधों को लेकर तनाव जारी है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से परमाणु हथियारों की होड़ फिर से शुरू हो सकती है — जो दुनिया के लिए “शीत युद्ध” जैसे हालात वापस ला सकती है।</p>
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		  <p>The post <a href="http://www.aajkiawaaz.com/trump-orders-nuclear-weapons-testing-russia-warns-if-the-us-takes-action-we-will-respond">ट्रंप ने दिया परमाणु हथियारों की टेस्टिंग का आदेश, रूस ने दी चेतावनी — बोला, “अमेरिका ने अगर कदम बढ़ाया, तो हम भी जवाब देंगे”</a> appeared first on <a href="http://www.aajkiawaaz.com">www.aajkiawaaz.com</a>.</p>
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		<item>
		<title>कौन-कौन से देश बनाते हैं फाइटर जेट इंजन, कितना आता है खर्च?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 06:53:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[तकनीक]]></category>
		<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्य ख़बरें]]></category>
		<category><![CDATA[fighter jet engines]]></category>
		<category><![CDATA[fighter jets]]></category>
		<category><![CDATA[pakistan]]></category>
		<category><![CDATA[Russia]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रूस ने भारत की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए पाकिस्तान को आधुनिक फाइटर जेट इंजन देने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने पाकिस्तान एयरफोर्स को JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों के लिए उन्नत RD-93MA इंजन सप्लाई करने पर सहमति जता दी है। फाइटर जेट की असली ताकत उसके इंजन में होती है। यही इंजन विमान को तेज रफ्तार, अधिक ऊंचाई और लंबी दूरी तक उड़ान भरने की क्षमता देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में कुछ ही देश ऐसे हैं जो खुद का फाइटर जेट इंजन डिजाइन और निर्मित करने में सक्षम हैं? किन देशों के पास है क्षमता? फाइटर जेट इंजन बनाना बेहद जटिल और महंगा काम है। आज की तारीख में सिर्फ चुनिंदा देश ही इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर हैं: अमेरिका – GE Aviation और Pratt &#38; Whitney जैसी कंपनियां F-22 Raptor और F-35 जैसे अत्याधुनिक विमानों के इंजन बनाती हैं। रूस – Saturn और Klimov कंपनियां Su-30 और Su-57 जैसे फाइटर जेट्स के लिए इंजन तैयार करती हैं। फ्रांस – Safran कंपनी राफेल का इंजन बनाती है। ब्रिटेन – Rolls Royce यूरोफाइटर टाइफून जैसे विमानों के लिए इंजन सप्लाई करती है। चीन – WS सीरीज इंजन विकसित किए हैं, लेकिन &#8230;</p>
<p>The post <a href="http://www.aajkiawaaz.com/which-countries-manufacture-fighter-jet-engines-and-how-much-does-it-cost">कौन-कौन से देश बनाते हैं फाइटर जेट इंजन, कितना आता है खर्च?</a> appeared first on <a href="http://www.aajkiawaaz.com">www.aajkiawaaz.com</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रूस ने भारत की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए पाकिस्तान को आधुनिक फाइटर जेट इंजन देने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने पाकिस्तान एयरफोर्स को JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों के लिए उन्नत RD-93MA इंजन सप्लाई करने पर सहमति जता दी है।</strong></p>
<p>फाइटर जेट की असली ताकत उसके इंजन में होती है। यही इंजन विमान को तेज रफ्तार, अधिक ऊंचाई और लंबी दूरी तक उड़ान भरने की क्षमता देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में कुछ ही देश ऐसे हैं जो खुद का फाइटर जेट इंजन डिजाइन और निर्मित करने में सक्षम हैं?</p>
<p><strong>किन देशों के पास है क्षमता?</strong></p>
<p>फाइटर जेट इंजन बनाना बेहद जटिल और महंगा काम है। आज की तारीख में सिर्फ चुनिंदा देश ही इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर हैं:</p>
<p><strong>अमेरिका –</strong> GE Aviation और Pratt &amp; Whitney जैसी कंपनियां F-22 Raptor और F-35 जैसे अत्याधुनिक विमानों के इंजन बनाती हैं।</p>
<p><strong>रूस –</strong> Saturn और Klimov कंपनियां Su-30 और Su-57 जैसे फाइटर जेट्स के लिए इंजन तैयार करती हैं।</p>
<p><strong>फ्रांस –</strong> Safran कंपनी राफेल का इंजन बनाती है।</p>
<p><strong>ब्रिटेन –</strong> Rolls Royce यूरोफाइटर टाइफून जैसे विमानों के लिए इंजन सप्लाई करती है।</p>
<p><strong>चीन –</strong> WS सीरीज इंजन विकसित किए हैं, लेकिन अभी तकनीकी विश्वसनीयता के मामले में पश्चिमी देशों से पीछे है।</p>
<p><strong>जर्मनी –</strong> MTU Aero Engines यूरोपियन प्रोजेक्ट्स में अहम योगदान देती है।</p>
<p>भारत की बात करें तो देश अभी पूरी तरह स्वदेशी इंजन बनाने में सफल नहीं हुआ है। DRDO और HAL लंबे समय से कावेरी इंजन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भारत भी इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन पाएगा।</p>
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<p><strong>इंजन बनाने में कितना खर्च आता है?</strong></p>
<p>फाइटर जेट इंजन दुनिया की सबसे महंगी और जटिल तकनीकों में से एक है।</p>
<p>एक नए इंजन के रिसर्च और डेवलपमेंट पर करीब 2 से 3 अरब डॉलर (16,000 से 24,000 करोड़ रुपये) तक खर्च होता है।</p>
<p>एक इंजन की प्रोडक्शन कॉस्ट लगभग 10 से 25 मिलियन डॉलर यानी 80 से 200 करोड़ रुपये तक हो सकती है।</p>
<p>यह लागत इस बात पर निर्भर करती है कि इंजन किस जेट के लिए बनाया जा रहा है और उसमें कितनी एडवांस तकनीक का इस्तेमाल हुआ है।</p>
<p>क्यों मुश्किल है फाइटर जेट इंजन बनाना?</p>
<p>फाइटर जेट इंजन को बेहद ऊंचे तापमान, तेज गति और लगातार दबाव सहना पड़ता है। इसके लिए चाहिए –</p>
<p><strong>सुपर-एलॉय धातुएं</strong></p>
<p><strong>माइक्रो-टर्बाइन टेक्नोलॉजी</strong></p>
<p><strong>बेहद जटिल डिजाइन और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग</strong></p>
<p>इसी वजह से आज भी दुनिया के अधिकांश देश इंजन तकनीक के लिए अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे बड़े देशों पर निर्भर रहते हैं।</p>
<p>कुल मिलाकर, फाइटर जेट इंजन सिर्फ ताकत का प्रतीक नहीं बल्कि तकनीकी क्षमता और आर्थिक शक्ति का भी पैमाना है। यही कारण है कि यह तकनीक बहुत कम देशों के पास ही है।</p>
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		<title>विश्व संकट की घड़ी: रूस-यूक्रेन युद्ध 2025 में नया मोड़, वैश्विक प्रभाव बढ़ा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Jul 2025 13:10:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्य ख़बरें]]></category>
		<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
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		<category><![CDATA[World crisis clock]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>एक युद्ध जो थमने का नाम नहीं ले रहा 2022 में शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। जहाँ पश्चिमी देश इसे &#8220;आक्रामकता के विरुद्ध संघर्ष&#8221; मानते हैं, वहीं रूस इसे &#8220;अपनी सुरक्षा और पहचान की रक्षा&#8221; का मामला बताता है। 2025 में युद्ध ने एक नया मोड़ ले लिया है — नाटो (NATO) देशों की सक्रिय सैन्य सहायता, चीन और रूस की बढ़ती निकटता, और भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका जैसे तटस्थ देशों का सामरिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास। क्या यह संघर्ष तीसरे विश्व युद्ध की आहट है? या शीत युद्ध 2.0 की औपचारिक शुरुआत? 2025 की प्रमुख घटनाएँ: दुनिया की धड़कन तेज़ 1. कीव पर रूस का मिसाइल हमला (मई 2025) रूस ने कीव के रक्षा मंत्रालय और रणनीतिक ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। 150 से अधिक नागरिकों की मौत और विश्व भर में आलोचना।  2. चीन-रूस ऊर्जा समझौता जून 2025 में चीन और रूस ने $100 बिलियन डॉलर का ऊर्जा आपूर्ति समझौता किया — अब रूस चीन को प्रतिदिन 30 लाख बैरल तेल और प्राकृतिक गैस देगा। 3. NATO का नया ड्रोन डिफेंस सिस्टम यूक्रेन को सौंपा इस कदम से रूस की चेतावनी: “अब पश्चिमी देश सीधे युद्ध में शामिल &#8230;</p>
<p>The post <a href="http://www.aajkiawaaz.com/world-crisis-clock-russia-ukraine-war-takes-a-new-turn-in-2025-global-influence-increases">विश्व संकट की घड़ी: रूस-यूक्रेन युद्ध 2025 में नया मोड़, वैश्विक प्रभाव बढ़ा</a> appeared first on <a href="http://www.aajkiawaaz.com">www.aajkiawaaz.com</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>एक युद्ध जो थमने का नाम नहीं ले रहा</strong><br />
2022 में शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। जहाँ पश्चिमी देश इसे &#8220;आक्रामकता के विरुद्ध संघर्ष&#8221; मानते हैं, वहीं रूस इसे &#8220;अपनी सुरक्षा और पहचान की रक्षा&#8221; का मामला बताता है।</p>
<p>2025 में युद्ध ने एक नया मोड़ ले लिया है — नाटो (NATO) देशों की सक्रिय सैन्य सहायता, चीन और रूस की बढ़ती निकटता, और भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका जैसे तटस्थ देशों का सामरिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास।</p>
<p>क्या यह संघर्ष तीसरे विश्व युद्ध की आहट है? या शीत युद्ध 2.0 की औपचारिक शुरुआत?</p>
<p><strong>2025 की प्रमुख घटनाएँ: दुनिया की धड़कन तेज़</strong><br />
<strong>1. कीव पर रूस का मिसाइल हमला (मई 2025)</strong><br />
रूस ने कीव के रक्षा मंत्रालय और रणनीतिक ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। 150 से अधिक नागरिकों की मौत और विश्व भर में आलोचना।</p>
<p><strong> 2. चीन-रूस ऊर्जा समझौता</strong><br />
जून 2025 में चीन और रूस ने $100 बिलियन डॉलर का ऊर्जा आपूर्ति समझौता किया — अब रूस चीन को प्रतिदिन 30 लाख बैरल तेल और प्राकृतिक गैस देगा।</p>
<p><strong>3. NATO का नया ड्रोन डिफेंस सिस्टम यूक्रेन को सौंपा</strong><br />
इस कदम से रूस की चेतावनी: “अब पश्चिमी देश सीधे युद्ध में शामिल हो चुके हैं।”</p>
<p><strong>4. ब्राजील और भारत की संयुक्त शांति पहल असफल</strong><br />
G20 में भारत और ब्राजील ने युद्धविराम प्रस्ताव रखा, जिसे रूस और यूक्रेन दोनों ने अस्वीकार कर दिया।</p>
<p><strong>विशेषज्ञों की राय: बढ़ता तनाव, घटती स्थिरता</strong><br />
<strong>प्रोफेसर लुइस फर्नांडो (हावर्ड विश्वविद्यालय, अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ)</strong><br />
“अब यह सिर्फ रूस और यूक्रेन का युद्ध नहीं रहा। यह वैश्विक शक्ति संघर्ष बन चुका है — अमेरिका, यूरोप, रूस, चीन, और मध्यवर्ती देशों के बीच।”</p>
<p><strong> डॉ. एकता वर्मा (दिल्ली विश्वविद्यालय, भू-राजनीतिक विश्लेषक)</strong><br />
“भारत जैसे देश इस समय कूटनीतिक संतुलन की भूमिका में हैं, पर वैश्विक दबाव बहुत बढ़ चुका है। भारत का &#8216;नॉन-अलाइनमेंट&#8217; अब पहले जैसा सरल नहीं।”</p>
<p><strong> युद्ध के वैश्विक प्रभाव: हर महाद्वीप प्रभावित</strong><br />
<strong>1. वैश्विक आर्थिक संकट</strong><br />
तेल और गैस की कीमतों में 40% की वृद्धि</p>
<p>खाद्यान्न संकट: यूक्रेन से अनाज निर्यात लगभग बंद</p>
<p>यूरोप में मुद्रास्फीति 9% से ऊपर</p>
<p><strong> 2. ऊर्जा संकट</strong><br />
यूरोप रूस से गैस लेना बंद कर चुका है — अब सौर और परमाणु ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ी</p>
<p>अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच नया तेल समझौता</p>
<p>भारत पर असर: एलपीजी और डीज़ल महंगे</p>
<p><strong>3. वैश्विक व्यापार पर असर</strong><br />
रूस-यूरोप व्यापार मार्ग ठप</p>
<p>एशिया के बंदरगाहों पर माल की आवाजाही धीमी</p>
<p>ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित</p>
<p><strong>4. शरणार्थी संकट</strong><br />
यूक्रेन से अब तक 80 लाख से अधिक लोग पलायन कर चुके</p>
<p>पोलैंड, जर्मनी, रोमानिया में शरणार्थियों की भीड़</p>
<p>UNHCR ने कहा: “दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा विस्थापन संकट”</p>
<p><strong>भारत की भूमिका: शांतिदूत या रणनीतिक खिलाड़ी?</strong><br />
भारत अब तक युद्ध को &#8220;सीमित सैन्य संघर्ष&#8221; मानता आया है, और किसी पक्ष के साथ स्पष्ट रूप से खड़ा नहीं हुआ है।</p>
<p>&#x1f1ee;&#x1f1f3; भारत की कूटनीतिक स्थिति:<br />
यूक्रेन को मानवीय सहायता जारी</p>
<p>रूस से सस्ते तेल की खरीद जारी</p>
<p>अमेरिका, यूरोप और जापान के साथ लगातार संवाद</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में तटस्थ मत</p>
<p><strong> विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का बयान (जुलाई 2025)</strong><br />
&#8220;भारत का उद्देश्य है — शांति, स्थिरता और बातचीत का माहौल बनाना। हम किसी का साथ नहीं, बल्कि सबका समाधान चाहते हैं।&#8221;</p>
<p>&#x1f1f7;&#x1f1fa; रूस-भारत संबंध मजबूत<br />
रूस भारत को रक्षा उपकरण और कच्चा तेल दे रहा है</p>
<p>भारत ने ‘रुपया-रूबल’ व्यापार प्रणाली लागू की है</p>
<p><strong>क्या युद्ध का अंत दिख रहा है?</strong><br />
दुर्भाग्यवश, नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि:</p>
<p>रूस अब पीछे नहीं हटेगा क्योंकि वह इसे अपने अस्तित्व का मुद्दा मानता है।</p>
<p>यूक्रेन को अमेरिका और NATO का समर्थन लगातार मिल रहा है, जिससे वह भी युद्धविराम को अस्वीकार कर रहा है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र अब तक केवल &#8220;प्रतीकात्मक&#8221; बयान ही दे पाया है।</p>
<p>दुनिया दो गुटों में बंटती जा रही है — पश्चिमी और पूर्वी।</p>
<p><strong>आगे की राह: क्या करें विश्व समुदाय को?</strong><br />
<strong>1. संवाद की पहल</strong><br />
G20, BRICS और UN को मिलकर एक स्थायी शांति वार्ता मंच बनाना चाहिए, जिसमें रूस और यूक्रेन दोनों को बराबरी से स्थान मिले।</p>
<p><strong>2. मानवीय सहायता तेज़ करें</strong><br />
शरणार्थियों, बच्चों और घायलों के लिए अधिक फंड और चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>3. वैश्विक व्यापार प्रणाली का पुनर्गठन</strong><br />
एक नया आपूर्ति तंत्र बनाना होगा जो केवल एक क्षेत्र या देश पर निर्भर न हो।</p>
<p><strong>4. तकनीकी और साइबर युद्ध पर नियंत्रण</strong><br />
2025 में कई देशों ने एक-दूसरे के सिस्टम हैक किए हैं — यह नया खतरा है, जिसपर वैश्विक संधि आवश्यक है।</p>
<p><strong>निष्कर्ष: यह युद्ध केवल सीमा का नहीं, सोच का है</strong><br />
रूस-यूक्रेन युद्ध आज दुनिया के हर देश को प्रभावित कर रहा है — चाहे वो पश्चिम हो, एशिया हो या अफ्रीका।</p>
<p>अब यह तय करने का समय है कि क्या हम युद्ध को एक &#8220;स्थायी संकट&#8221; मानकर स्वीकार कर लेंगे, या मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाएँगे जो भविष्य के युद्धों को रोके।</p>
<p>भारत जैसे विकासशील देश इस दिशा में नेतृत्व ले सकते हैं — न सिर्फ अपने कूटनीतिक संतुलन से, बल्कि एक नया विश्व दृष्टिकोण प्रस्तुत कर।</p>
<p>&#x1f4e3; <strong>आपकी राय क्या है? क्या भारत को मध्यस्थ बनना चाहिए?</strong><br />
Aajki Awaaz पाठकों की राय को अहमियत देता है। आप हमें ईमेल करें या व्हाट्सऐप करें:</p>
<p>&#x1f4e7; Email: info@aajkiawaaz.com<br />
&#x1f4de; WhatsApp: +91-8800782920<br />
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		<item>
		<title>पुतिन ने दी अमेरिका को न्यूक्लियर हमले की धमकी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Jul 2024 13:49:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्य ख़बरें]]></category>
		<category><![CDATA[America]]></category>
		<category><![CDATA[Nuclear Attack]]></category>
		<category><![CDATA[Russia]]></category>
		<category><![CDATA[Russian President Vladimir Putin]]></category>
		<category><![CDATA[Vladimir Putin]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रविवार (28 जुलाई) को अमेरिका को धमकाते हुए कहा कि अगर अमेरिका जर्मनी या फिर यूरोप में किसी भी हिस्से में मिसाइल तैनात करने के इरादे की पुष्टि करता है तो वह मध्यम दूरी के परमाणु हथियारों का उत्पादन फिर से शुरू कर देंगे. उन्होंने ये बात सेंट पीटर्सबर्ग में एक नौसेना परेड के दौरान कही. न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, उन्होंने कहा, &#8220;अगर संयुक्त राज्य अमेरिका ऐसी योजनाओं को क्रियान्वित करता है तो हम अपने आप को मध्यम और छोटी दूरी की हमला क्षमताओं की तैनाती पर पहले अपनाए गए एकतरफा प्रतिबंध से मुक्त मानेंगे.&#8221; पुतिन ने कहा कि अब रूस में ऐसी अनेक सिस्टम्स का डेवलेपमेंट अंतिम चरण में है. व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका को दी चेतावनी रूसी राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा, &#8220;हम अमेरिका, यूरोप और दुनिया के अन्य क्षेत्रों में उसके उपग्रहों की कार्रवाइयों को ध्यान में रखते हुए उनकी तैनाती में समान कदम उठाएंगे.&#8221; ऐसी मिसाइलें जो 500 से 5,500 किलोमीटर (300-3,400 मील) तक की दूरी तय कर सकती हैं, 1987 में अमेरिका और सोवियत संघ के हस्ताक्षरित हथियार नियंत्रण संधि का विषय थीं. अब वाशिंगटन और मॉस्को दोनों ने 2019 में मध्यम दूरी की परमाणु शक्ति संधि &#8230;</p>
<p>The post <a href="http://www.aajkiawaaz.com/putin-threatens-america-with-nuclear-attack">पुतिन ने दी अमेरिका को न्यूक्लियर हमले की धमकी</a> appeared first on <a href="http://www.aajkiawaaz.com">www.aajkiawaaz.com</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रविवार (28 जुलाई) को अमेरिका को धमकाते हुए कहा कि अगर अमेरिका जर्मनी या फिर यूरोप में किसी भी हिस्से में मिसाइल तैनात करने के इरादे की पुष्टि करता है तो वह मध्यम दूरी के परमाणु हथियारों का उत्पादन फिर से शुरू कर देंगे. उन्होंने ये बात सेंट पीटर्सबर्ग में एक नौसेना परेड के दौरान कही.</strong></p>
<p>न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, उन्होंने कहा, &#8220;अगर संयुक्त राज्य अमेरिका ऐसी योजनाओं को क्रियान्वित करता है तो हम अपने आप को मध्यम और छोटी दूरी की हमला क्षमताओं की तैनाती पर पहले अपनाए गए एकतरफा प्रतिबंध से मुक्त मानेंगे.&#8221; पुतिन ने कहा कि अब रूस में ऐसी अनेक सिस्टम्स का डेवलेपमेंट अंतिम चरण में है.</p>
<p><strong>व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका को दी चेतावनी</strong></p>
<p>रूसी राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा, &#8220;हम अमेरिका, यूरोप और दुनिया के अन्य क्षेत्रों में उसके उपग्रहों की कार्रवाइयों को ध्यान में रखते हुए उनकी तैनाती में समान कदम उठाएंगे.&#8221; ऐसी मिसाइलें जो 500 से 5,500 किलोमीटर (300-3,400 मील) तक की दूरी तय कर सकती हैं, 1987 में अमेरिका और सोवियत संघ के हस्ताक्षरित हथियार नियंत्रण संधि का विषय थीं. अब वाशिंगटन और मॉस्को दोनों ने 2019 में मध्यम दूरी की परमाणु शक्ति संधि से खुद को अलग कर लिया और एक दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगाया.</p>
<p><strong>1987 की संधि 2019 में कर दी खत्म</strong></p>
<p>हालांकि रूस ने बाद में कहा कि वह ऐसी मिसाइलों का उत्पादन तब तक फिर से शुरू नहीं करेगा जब तक कि अमेरिका विदेशों में मिसाइलें तैनात नहीं करता. जुलाई की शुरुआत में अमेरिका और जर्मनी ने घोषणा की कि जर्मनी में टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों सहित लंबी दूरी की अमेरिकी मिसाइलों की प्रासंगिक तैनाती 2026 में शुरू होगी.</p>
<p>पुतिन ने कहा कि महत्वपूर्ण रूसी प्रशासनिक और सैन्य स्थल ऐसी मिसाइलों की रेंज में आएंगे, जो भविष्य में परमाणु हथियारों से लैस हो सकते हैं, जिससे हमला होने के 10 मिनट के भीतर हमारे क्षेत्र उनकी जद में आ जाएंगे. रूसी राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि अमेरिका ने हाल के अभ्यासों में डेनमार्क और फिलीपींस में टाइफॉन मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणाली तैनात की है.</p>
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		<item>
		<title>Russia Terror Attack: आतंकी हमलों से दहला रूस का दागिस्तान क्षेत्र</title>
		<link>http://www.aajkiawaaz.com/russia-terror-attack-russias-dagestan-region-shaken-by-terrorist-attacks</link>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Jun 2024 13:07:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्य ख़बरें]]></category>
		<category><![CDATA[Russia]]></category>
		<category><![CDATA[Russia Terror Attack]]></category>
		<category><![CDATA[terrorist attacks]]></category>
		<category><![CDATA[world news]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रूस के दक्षिणी क्षेत्र दागिस्तान में इस्लामी आतंकवादियों के हमले में घायल एक पुलिस अधिकारी की मौत हो जाने के बाद, कुल मृतक संख्या बढ़कर 21 हो गई है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। रविवार को हुए हमले में, आतंकवादियों ने एक गिरजाघर और यहूदी उपासना गृह को निशाना बनाया था। देरबेंत और उत्तर कॉकेसस के मुस्लिम बहुल क्षेत्र मखाचकला शहरों में पुलिस पर गोलीबारी भी की गई थी। आतंकी हमले के बाद रूस के लोगों में खासा गुस्सा भी देखने तो मिल रहा है। मार्च के बाद हुआ सबसे घातक हमला यह हमला, रूस में मार्च के बाद हुआ सबसे घातक हमला है। मार्च में, मॉस्को के उपनगर में बंदूकधारियों की गोलीबारी में 145 लोग मारे गए थे। मार्च में हुए हमले की जिम्मेदारी लेने वाले अफगानिस्तान के इस्लामिक स्टेट संगठन से संबद्ध समूह ने दागिस्तान हमले की सराहना की और कहा कि इसे ‘‘कॉकेसस में भाइयों ने अंजाम दिया जो प्रदर्शित कर रहे हैं कि वो मजबूत हैं।’’ मारे गए हमलावर रूस की शीर्ष राजकीय आपराधिक जांच एजेंसी, इन्वेस्टिगेटिव कमेटी ने कहा कि सभी पांच हमलवार मार गिराए गए हैं। देरबेंत क्षेत्र के प्रमुख मावसुम रेगीमोव ने मंगलवार को कहा कि चोट के चलते एक पुलिस &#8230;</p>
<p>The post <a href="http://www.aajkiawaaz.com/russia-terror-attack-russias-dagestan-region-shaken-by-terrorist-attacks">Russia Terror Attack: आतंकी हमलों से दहला रूस का दागिस्तान क्षेत्र</a> appeared first on <a href="http://www.aajkiawaaz.com">www.aajkiawaaz.com</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रूस के दक्षिणी क्षेत्र दागिस्तान में इस्लामी आतंकवादियों के हमले में घायल एक पुलिस अधिकारी की मौत हो जाने के बाद, कुल मृतक संख्या बढ़कर 21 हो गई है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। रविवार को हुए हमले में, आतंकवादियों ने एक गिरजाघर और यहूदी उपासना गृह को निशाना बनाया था। देरबेंत और उत्तर कॉकेसस के मुस्लिम बहुल क्षेत्र मखाचकला शहरों में पुलिस पर गोलीबारी भी की गई थी। आतंकी हमले के बाद रूस के लोगों में खासा गुस्सा भी देखने तो मिल रहा है।</strong></p>
<p><strong>मार्च के बाद हुआ सबसे घातक हमला</strong><br />
यह हमला, रूस में मार्च के बाद हुआ सबसे घातक हमला है। मार्च में, मॉस्को के उपनगर में बंदूकधारियों की गोलीबारी में 145 लोग मारे गए थे। मार्च में हुए हमले की जिम्मेदारी लेने वाले अफगानिस्तान के इस्लामिक स्टेट संगठन से संबद्ध समूह ने दागिस्तान हमले की सराहना की और कहा कि इसे ‘‘कॉकेसस में भाइयों ने अंजाम दिया जो प्रदर्शित कर रहे हैं कि वो मजबूत हैं।’’</p>
<p><strong>मारे गए हमलावर</strong><br />
रूस की शीर्ष राजकीय आपराधिक जांच एजेंसी, इन्वेस्टिगेटिव कमेटी ने कहा कि सभी पांच हमलवार मार गिराए गए हैं। देरबेंत क्षेत्र के प्रमुख मावसुम रेगीमोव ने मंगलवार को कहा कि चोट के चलते एक पुलिस सार्जेंट की अस्पताल में मौत हो गई, जिससे मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 21 हो गई है। मृतकों में 16 पुलिस कर्मी शामिल हैं। दागिस्तान में चिकित्सा अधिकारियों ने सोमवार को कहा था कि कम से कम 46 लोग घायल हैं जिनमें से 13 पुलिसकर्मी हैं। मृतकों में 66 वर्षीय एक रूसी आर्थोडोक्स पादरी भी शामिल हैं।</p>
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		<title>5 साल बाद रूस की यात्रा पर जा सकते हैं PM मोदी, जानिये कब बन रहा यात्रा का प्लान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Jun 2024 12:49:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
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		<category><![CDATA[PM Narendra Modi]]></category>
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		<category><![CDATA[Russian President Vladimir Putin]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत के PM नरेंद्र मोदी जल्द ही रूस की यात्रा पर जा सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी के रूस दौरे की ये योजना वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए बनाई जा रही है। अब तक इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन अगर यात्रा का शेड्यूल तय हो जाता है तो बीते करीब 5 सालों में पीएम मोदी की ये पहली रूस की यात्रा होगी। आपको बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने इससे पहले साल 2019 के सितंबर महीने में रूस की यात्रा की थी। कब रूस जाएंगे पीएम मोदी? राजनयिक सूत्रों ने मंगलवार को जानकारी दी है कि भारत और रूस के अधिकारी जुलाई महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रूस दौरे पर विचार कर रहे हैं। ये यात्रा संक्षिप्त होगी। रूसी मीडिया ने क्रेमलिन के एक अधिकारी के हवाले से भी खबर दी है कि पीएम मोदी केरूस दौरे को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि, भारत की ओर से अब तक इस यात्रा के बारे में कोई भी पुष्टि नहीं की गई है। क्रेमलिन के अधिकारी ने दी जानकारी PTI ने आरआईए नोवोस्ती समाचार एजेंसी के हवाले से खबर दी है कि क्रेमलिन के अधिकारी यूरी उशाकोव ने पीएम &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भारत के PM नरेंद्र मोदी जल्द ही रूस की यात्रा पर जा सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी के रूस दौरे की ये योजना वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए बनाई जा रही है। अब तक इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन अगर यात्रा का शेड्यूल तय हो जाता है तो बीते करीब 5 सालों में पीएम मोदी की ये पहली रूस की यात्रा होगी। आपको बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने इससे पहले साल 2019 के सितंबर महीने में रूस की यात्रा की थी।</strong></p>
<p><strong>कब रूस जाएंगे पीएम मोदी?</strong><br />
राजनयिक सूत्रों ने मंगलवार को जानकारी दी है कि भारत और रूस के अधिकारी जुलाई महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रूस दौरे पर विचार कर रहे हैं। ये यात्रा संक्षिप्त होगी। रूसी मीडिया ने क्रेमलिन के एक अधिकारी के हवाले से भी खबर दी है कि पीएम मोदी केरूस दौरे को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि, भारत की ओर से अब तक इस यात्रा के बारे में कोई भी पुष्टि नहीं की गई है।</p>
<p><strong>क्रेमलिन के अधिकारी ने दी जानकारी</strong><br />
PTI ने आरआईए नोवोस्ती समाचार एजेंसी के हवाले से खबर दी है कि क्रेमलिन के अधिकारी यूरी उशाकोव ने पीएम मोदी की रूस यात्रा के बारे में जानकारी दी है। उशाकोव ने कहा है कि मैं इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि हम भारतीय प्रधानमंत्री के दौरे की तैयारियां कर रहे हैं।</p>
<p><strong>2021 में भारत आए थे पुतिन</strong><br />
अगर PM मोदी की रूस यात्रा कंफर्म हो जाती है तो वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ तीन साल बाद भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। आपको बता दें कि दोनों देशों के बीच अब तक 21 बार ये सम्मेलन संपन्न हुआ है। पिछली बार 6 दिसंबर साल 2021 में नई दिल्ली में इस शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ था जिसमें शामिल होने के लिए राष्ट्रपति पुतिन भारत आए थे।</p>
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		<title>रूस बना भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता, रूसी राजदूत ने दी जानकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Apr 2023 13:18:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रूस भारत के लिए सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है और देश की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने वैश्विक मामलों की भारतीय परिषद और रूसी परिषद वार्ता में यह जानकारी दी. भारतीय परिषद-रूसी परिषद संवाद में बैठक को संबोधित करते हुए अलीपोव ने कहा कि रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है, जो ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. उन्होंने कहा कि उत्तरी समुद्री मार्ग के लिए साइबेरिया में रूसी वन में बड़े पैमाने पर ऊर्जा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भागीदारों को आकर्षित करने के लिए हम सफलतापूर्वक उत्तर-दक्षिण आईटीसी वैकल्पिक परिवहन मार्ग विकसित कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार और अंतर-क्षेत्रीय संदर्भों को एक मजबूत पुश दिया गया है. हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे, समुद्र और रेल के बुनियादी ढांचे, इस्पात उत्पादन, पेट्रो-रसायन विज्ञान, स्टार्टअप, विमान और जहाज निर्माण, कृषि, उन्नत प्रौद्योगिकी, विकास और डिजिटलीकरण जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध पर बोले डेनिस अलीपोव भारत में रूसी राजदूत ने कहा कि रूस के पास भारत को देने के लिए बहुत कुछ है और इसके विपरीत इन सभी क्षेत्रों में पश्चिमी कंपनियां अग्रणी हैं. रूसी राजदूत &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रूस भारत के लिए सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है और देश की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने वैश्विक मामलों की भारतीय परिषद और रूसी परिषद वार्ता में यह जानकारी दी.</strong></p>
<p>भारतीय परिषद-रूसी परिषद संवाद में बैठक को संबोधित करते हुए अलीपोव ने कहा कि रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है, जो ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. उन्होंने कहा कि उत्तरी समुद्री मार्ग के लिए साइबेरिया में रूसी वन में बड़े पैमाने पर ऊर्जा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भागीदारों को आकर्षित करने के लिए हम सफलतापूर्वक उत्तर-दक्षिण आईटीसी वैकल्पिक परिवहन मार्ग विकसित कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार और अंतर-क्षेत्रीय संदर्भों को एक मजबूत पुश दिया गया है. हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे, समुद्र और रेल के बुनियादी ढांचे, इस्पात उत्पादन, पेट्रो-रसायन विज्ञान, स्टार्टअप, विमान और जहाज निर्माण, कृषि, उन्नत प्रौद्योगिकी, विकास और डिजिटलीकरण जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं.</p>
<p><a href="https://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/04/Russia-became-Indias-largest-oil-supplier-Russian-ambassador-gave-information.webp"><img decoding="async" class=" wp-image-20230 aligncenter" src="https://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/04/Russia-became-Indias-largest-oil-supplier-Russian-ambassador-gave-information-300x169.webp" alt="" width="589" height="332" srcset="http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/04/Russia-became-Indias-largest-oil-supplier-Russian-ambassador-gave-information-300x169.webp 300w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/04/Russia-became-Indias-largest-oil-supplier-Russian-ambassador-gave-information-200x113.webp 200w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/04/Russia-became-Indias-largest-oil-supplier-Russian-ambassador-gave-information-480x270.webp 480w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/04/Russia-became-Indias-largest-oil-supplier-Russian-ambassador-gave-information-768x432.webp 768w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/04/Russia-became-Indias-largest-oil-supplier-Russian-ambassador-gave-information-1024x576.webp 1024w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/04/Russia-became-Indias-largest-oil-supplier-Russian-ambassador-gave-information-1536x864.webp 1536w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/04/Russia-became-Indias-largest-oil-supplier-Russian-ambassador-gave-information-700x394.webp 700w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/04/Russia-became-Indias-largest-oil-supplier-Russian-ambassador-gave-information-570x321.webp 570w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/04/Russia-became-Indias-largest-oil-supplier-Russian-ambassador-gave-information-500x281.webp 500w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/04/Russia-became-Indias-largest-oil-supplier-Russian-ambassador-gave-information.webp 1600w" sizes="(max-width: 589px) 100vw, 589px" /></a></p>
<p><strong>रूस-यूक्रेन युद्ध पर बोले डेनिस अलीपोव</strong></p>
<p>भारत में रूसी राजदूत ने कहा कि रूस के पास भारत को देने के लिए बहुत कुछ है और इसके विपरीत इन सभी क्षेत्रों में पश्चिमी कंपनियां अग्रणी हैं. रूसी राजदूत ने अपने संबोधन में कहा कि मॉस्को को बहुपक्षीय संस्थानों से बाहर करने के संबंध में भारत ने तटस्थ रुख अपनाया है. भारत ने बहुपक्षीय संस्थानों से रूस को बाहर करने के प्रयासों के संबंध में एक तटस्थ रुख अपनाया है, जिसमें यूनेस्को और अन्य शामिल हैं. उन्होंने कहा कि हमारी और भारत की प्राथमिकता लोकतंत्र को वैश्विक शासन के रूप में प्राप्त करना है.</p>
<p>पिछले साल 24 फरवरी (2022) को शुरू हुए रूस-यूक्रेन के बीच संघर्ष पर उन्होंने कहा कि यूक्रेन संघर्ष रूस द्वारा भूमि हड़पने का प्रयास नहीं है, जैसा कि प्रस्तुत किया जा रहा है. यह लगातार सार्वभौमिक सिद्धांतों के उल्लंघन का परिणाम है. वही सार्वभौमिक सिद्धांत जो रूस-भारत संधि में निहित हैं. उन्होंने कहा कि रूस और भारत प्लेटफार्मों और समूहों के एक व्यापक नेटवर्क को साझा करते हैं जो व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लाभ के लिए संभावित वैश्विक एजेंडे को बढ़ावा देने में मदद करते हैं. आपको बता दें कि यूक्रेन के साथ सशस्त्र सैन्य संघर्ष छिड़ने के बाद से दिल्ली-मास्को संबंध, विशेष रूप से रूसी तेल की खरीद के संबंध में दुनियाभर का ध्यान आकर्षित किया है।</p>
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		  <p>The post <a href="http://www.aajkiawaaz.com/russia-became-indias-largest-oil-supplier-russian-ambassador-gave-information">रूस बना भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता, रूसी राजदूत ने दी जानकारी</a> appeared first on <a href="http://www.aajkiawaaz.com">www.aajkiawaaz.com</a>.</p>
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		<title>पुतिन का हमशक्ल गया था मारियुपोल? बॉडी डबल के दावे से दुनिया में मची सनसनी</title>
		<link>http://www.aajkiawaaz.com/putins-lookalike-went-to-mariupol-body-double-claim-created-sensation-in-the-world</link>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Mar 2023 12:56:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
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		<category><![CDATA[Russia's war with Ukraine]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>यूक्रेन के साथ रूस के युद्ध को एक साल से भी ज्यादा का वक्त हो चुका है. दोनों में कोई भी देश झुकने को तैयार नहीं है. इस बीच रूस के सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि व्लादिमिर पुतिन अपनी यात्राओं के लिए कई डुप्लीकेट का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं. अटकलें हैं कि राष्ट्रपति की हाल की मारियुपोल यात्रा में पुतिन के कार्बन कॉपी (हमशक्ल) का इस्तेमाल किया गया था. यह साफ नहीं है कि फुटेज किसने बनाया लेकिन ऐसा लगता है कि इसका मकसद उन रूसियों तक पहुंचना है जो खबरों के लिए सरकारी मीडिया पर भरोसा करते हैं. डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, माना जाता है कि पुतिन ने नियमित रूप से प्लास्टिक सर्जरी करवाई है, क्योंकि वह 1999 में कार्यवाहक राष्ट्रपति बनते समय काफी बूढ़े लग रहे थे. अफवाहें फैली हुई हैं कि पुतिन के डुप्लीकेट, जिन्होंने उनकी तरह दिखने के लिए प्लास्टिक सर्जरी कराई है, तैनात किए जा रहे हैं क्योंकि कैंसर और पार्किंसंस रोग की शुरुआती स्टेज की अफवाहों के बीच पुतिन की तबीयत बिगड़ती जा रही है. रूसी वीडियो के मुताबिक, जाहिर तौर पर सबसे कमजोर डुप्लीकेट को मारियुपोल भेजा &#8230;</p>
<p>The post <a href="http://www.aajkiawaaz.com/putins-lookalike-went-to-mariupol-body-double-claim-created-sensation-in-the-world">पुतिन का हमशक्ल गया था मारियुपोल? बॉडी डबल के दावे से दुनिया में मची सनसनी</a> appeared first on <a href="http://www.aajkiawaaz.com">www.aajkiawaaz.com</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>यूक्रेन के साथ रूस के युद्ध को एक साल से भी ज्यादा का वक्त हो चुका है. दोनों में कोई भी देश झुकने को तैयार नहीं है. इस बीच रूस के सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि व्लादिमिर पुतिन अपनी यात्राओं के लिए कई डुप्लीकेट का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं. अटकलें हैं कि राष्ट्रपति की हाल की मारियुपोल यात्रा में पुतिन के कार्बन कॉपी (हमशक्ल) का इस्तेमाल किया गया था. यह साफ नहीं है कि फुटेज किसने बनाया लेकिन ऐसा लगता है कि इसका मकसद उन रूसियों तक पहुंचना है जो खबरों के लिए सरकारी मीडिया पर भरोसा करते हैं.</strong></p>
<p>डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, माना जाता है कि पुतिन ने नियमित रूप से प्लास्टिक सर्जरी करवाई है, क्योंकि वह 1999 में कार्यवाहक राष्ट्रपति बनते समय काफी बूढ़े लग रहे थे. अफवाहें फैली हुई हैं कि पुतिन के डुप्लीकेट, जिन्होंने उनकी तरह दिखने के लिए प्लास्टिक सर्जरी कराई है, तैनात किए जा रहे हैं क्योंकि कैंसर और पार्किंसंस रोग की शुरुआती स्टेज की अफवाहों के बीच पुतिन की तबीयत बिगड़ती जा रही है. रूसी वीडियो के मुताबिक, जाहिर तौर पर सबसे कमजोर डुप्लीकेट को मारियुपोल भेजा गया था, जो आर्टिफिशियल जबड़े लगाना भूल गया.</p>
<p><a href="https://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/03/Putins-lookalike-went-to-Mariupol-Body-double-claim-created-sensation-in-the-world-1.webp"><img decoding="async" class=" wp-image-20141 aligncenter" src="https://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/03/Putins-lookalike-went-to-Mariupol-Body-double-claim-created-sensation-in-the-world-1-300x240.webp" alt="" width="533" height="426" srcset="http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/03/Putins-lookalike-went-to-Mariupol-Body-double-claim-created-sensation-in-the-world-1-300x240.webp 300w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/03/Putins-lookalike-went-to-Mariupol-Body-double-claim-created-sensation-in-the-world-1-1024x819.webp 1024w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/03/Putins-lookalike-went-to-Mariupol-Body-double-claim-created-sensation-in-the-world-1-768x614.webp 768w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/03/Putins-lookalike-went-to-Mariupol-Body-double-claim-created-sensation-in-the-world-1-700x560.webp 700w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/03/Putins-lookalike-went-to-Mariupol-Body-double-claim-created-sensation-in-the-world-1-570x456.webp 570w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/03/Putins-lookalike-went-to-Mariupol-Body-double-claim-created-sensation-in-the-world-1-500x400.webp 500w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2023/03/Putins-lookalike-went-to-Mariupol-Body-double-claim-created-sensation-in-the-world-1.webp 1280w" sizes="(max-width: 533px) 100vw, 533px" /></a></p>
<p><strong>यूक्रेन के अफसर ने उड़ाया था मजाक</strong></p>
<p>डेली मेल ने बताया, इससे पहले यूक्रेन ने युद्ध की मार झेल रहे मारियुपोल में हमशक्ल को भेजने के लिए पुतिन का मजाक उड़ाया था. यूक्रेन के अफसर एंटोन गेराशचेंको ने पुतिन की ठुड्डी की तीन तस्वीरें पोस्ट कीं और सवाल किया कि क्या यह वही इंसान है. उन्होंने ताना मारते हुए कहा था-आपकी ठुड्डी के साथ क्या हुआ पुतिन?</p>
<p>&#8216;<strong>कौन सा असली था?&#8217;</strong></p>
<p>आंतरिक मंत्री के सलाहकार ने पोस्ट में कहा था, ऐसा लगता है कि उनके मेकअप आर्टिस्ट को पुतिन के लो क्वॉलिटी कॉपी पर काम करना पड़ा है. मैं सोच रहा हूं कि उनमें से कौन सा असली था? एक तस्वीर में 70 साल के पुतिन को एक महीने पहले मॉस्को में फेडरल एसेंबली को संबोधित करते हुए दिखाया गया है. एक और पुतिन को 18 मार्च को क्रीमिया में नौसैनिक बंदरगाह सेवस्तोपोल में दिखाया गया है. तीसरा फुटेज अगले दिन जारी किया गया, जिसमें जाहिर तौर पर पुतिन को मारियुपोल में दिखाया गया.</p>
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		<title>यूक्रेन ने लगाई थी भारत से रूस पर दबाव बनाने की गुहार , विदेश मंत्री जयशंकर ने किया खुलासा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 06 Oct 2022 13:26:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्य ख़बरें]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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		<category><![CDATA[External Affairs Minister Jaishanka]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बतौर विदेश मंत्री एस जयशंकर इन दिनों न्यूजीलैंड की अपनी पहली यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच यूक्रेन ने भारत से रूस पर दबाव बनाने का अनुरोध किया था। यह अनुरोध जापोरिज्ज्या परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुरक्षा को लेकर किया गया था। आपको बता दें कि जिस समय पुतिन की सेना अपने पड़ोसी मुल्क पर बमों और मिसाइल से हमला कर रही थी, उस समय इस परमाणु संयंत्र की सुरक्षा को लेकर खतरा उत्पन्न हो गया था। जयशंकर ने कहा, &#8220;उस समय मैं संयुक्त राष्ट्र के दौरे पर था। उस समय सबसे बड़ी चिंता जापोरिज्ज्या परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुरक्षा को लेकर थी। रूसियों पर दबाव बनाने के लिए हमसे अनुरोध किया गया था। हमने इसको लेकर पहल भी किए। मुझे लगता है कि इस समय भारत जो भी कर सकता है, वह करने के लिए तैयार है।&#8221; जयशंकर ने कहा कि अगस्त में यूक्रेन और रूस के बीच हुए संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता वाले अनाज सौदे पर भारत का प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा, &#8220;इस समय रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष अभी भी गरमाया हुआ है। दोनों ही तरफ जुनून देखने को मिल रहा है। लोगों के लिए &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बतौर विदेश मंत्री एस जयशंकर इन दिनों न्यूजीलैंड की अपनी पहली यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच यूक्रेन ने भारत से रूस पर दबाव बनाने का अनुरोध किया था। यह अनुरोध जापोरिज्ज्या परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुरक्षा को लेकर किया गया था। आपको बता दें कि जिस समय पुतिन की सेना अपने पड़ोसी मुल्क पर बमों और मिसाइल से हमला कर रही थी, उस समय इस परमाणु संयंत्र की सुरक्षा को लेकर खतरा उत्पन्न हो गया था।</strong></p>
<p>जयशंकर ने कहा, &#8220;उस समय मैं संयुक्त राष्ट्र के दौरे पर था। उस समय सबसे बड़ी चिंता जापोरिज्ज्या परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुरक्षा को लेकर थी। रूसियों पर दबाव बनाने के लिए हमसे अनुरोध किया गया था। हमने इसको लेकर पहल भी किए। मुझे लगता है कि इस समय भारत जो भी कर सकता है, वह करने के लिए तैयार है।&#8221; जयशंकर ने कहा कि अगस्त में यूक्रेन और रूस के बीच हुए संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता वाले अनाज सौदे पर भारत का प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा, &#8220;इस समय रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष अभी भी गरमाया हुआ है। दोनों ही तरफ जुनून देखने को मिल रहा है। लोगों के लिए तर्कों की आवाज को आसानी से सुनना आसान नहीं है। लेकिन मैं निष्पक्षता के साथ कह सकता हूं कि अगर हम स्टैंड लेते हैं तो दोनों में से कोई भी देश इसकी अवहेलना करेंगे। पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक में यह दिखा भी है।&#8221; यूक्रेन में युद्ध पर भारत की स्थिति के बारे में बताते हुए जयशंकर ने कहा कि यह स्वाभाविक है कि अलग-अलग देश, अलग-अलग क्षेत्र अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया देंगे।</p>
<p><a href="https://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2022/10/Ukraine-had-requested-India-to-put-pressure-on-Russia-External-Affairs-Minister-Jaishankar-disclosed.webp"><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-19767 aligncenter" src="https://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2022/10/Ukraine-had-requested-India-to-put-pressure-on-Russia-External-Affairs-Minister-Jaishankar-disclosed-300x225.webp" alt="" width="608" height="456" srcset="http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2022/10/Ukraine-had-requested-India-to-put-pressure-on-Russia-External-Affairs-Minister-Jaishankar-disclosed-300x225.webp 300w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2022/10/Ukraine-had-requested-India-to-put-pressure-on-Russia-External-Affairs-Minister-Jaishankar-disclosed-200x150.webp 200w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2022/10/Ukraine-had-requested-India-to-put-pressure-on-Russia-External-Affairs-Minister-Jaishankar-disclosed-480x360.webp 480w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2022/10/Ukraine-had-requested-India-to-put-pressure-on-Russia-External-Affairs-Minister-Jaishankar-disclosed-700x525.webp 700w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2022/10/Ukraine-had-requested-India-to-put-pressure-on-Russia-External-Affairs-Minister-Jaishankar-disclosed-570x428.webp 570w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2022/10/Ukraine-had-requested-India-to-put-pressure-on-Russia-External-Affairs-Minister-Jaishankar-disclosed-500x375.webp 500w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2022/10/Ukraine-had-requested-India-to-put-pressure-on-Russia-External-Affairs-Minister-Jaishankar-disclosed-180x135.webp 180w, http://www.aajkiawaaz.com/wp-content/uploads/2022/10/Ukraine-had-requested-India-to-put-pressure-on-Russia-External-Affairs-Minister-Jaishankar-disclosed.webp 720w" sizes="(max-width: 608px) 100vw, 608px" /></a></p>
<p>आपको बता दें कि बुधवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी सरकार को यूक्रेन स्थित यूरोप के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र का कंट्रोल अपने हाथों में लेने का आदेश दिया। संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी संस्था ने चेतावनी दी थी कि इस साइट पर बिजली की आपूर्ति बेहद नाजुक थी। आपको बता दें कि यह संयंत्र दक्षिणी यूक्रेनी में स्थित है। इसे जापोरिज्जिया के नाम से जाना जाता है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को औपचारिक रूप से इसे रूस में शामिल करने का ऐलान किया था। हालांकि, यूक्रेन ने इसका विरोध किया है।</p>
<p>जयशंकर बुधवार को न्यूजीलैंड पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय मूल की मंत्री प्रियंका राधाकृष्णन से मुलाकात की थी और देश की कुछ प्रमुख हस्तियों के साथ बातचीत भी की थी। जयशंकर ने बुधवार को ट्वीट किया था, &#8221;आज ऑकलैंड में मंत्री प्रियंका से मिलकर अच्छा लगा। न्यूजीलैंड की प्रमुख हस्तियों के साथ संवाद सत्र आयोजित करने के लिए उनका आभार जताया। हम हमारे रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।&#8221;</p>
<p>राधाकृष्णन न्यूजीलैंड की सामुदायिक और स्वैच्छिक क्षेत्र, विविधता, समावेश और जातीय समुदाय एवं युवा मामलों की मंत्री हैं। वह न्यूजीलैंड में मंत्री बनने वाली भारतीय मूल की पहली व्यक्ति हैं।</p>
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