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	<title>Budget 2015 Archives - www.aajkiawaaz.com</title>
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		<title>बजट 2015  ने मध्यवर्ग को किया निराश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Feb 2015 13:05:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली : मोदी सरकार के पहले बजट से मध्य वर्ग को मायूसी हाथ लगी है। जहां लोग आय कर में छूट को युक्ति संगत बनाने या उसमें कटौती की उम्मीद कर रहे थे। वहीं, सरकार ने सर्विस टैक्स में बढोतरी कर दी है। अब आम आदमी के रोजमर्रा की सारी चीजें महंगी हो जाएंगी। मोदी सरकार ने पहली बार मुकम्मल बजट पेश किया है। यह बजट न सिर्फ साल 2015-16 के लिए है, बल्कि यह सरकार के अगले पांच सालों का विजन भी प्रस्तुत करता है। रेल बजट की तरह यहां भी मोदी सरकार लोकलुभावन घोषणाओं और वादों से बचती नजर आई। मध्य वर्ग को बजट के दिन सबसे ज्यादा उम्मीद इस बात की होती है कि उसके रोजमर्रा की कौन सी चीजें सस्ती होंगी या किन चीजों के दाम बढ़ेंगे। टैक्स छूट सीमा कितनी बढ़ेगी, क्योंकि महंगाई तो दिनबदिन बढ़ती जा रही है तो टैक्स की दरों का भी उस हिसाब से युक्तिसंगत होना जरुरी है। लोगों के मन में कहीं यह आस भी होती है कि शायद टैक्स में कुछ छूट मिल जाए। कम से कम महिलाओं को तो कुछ विशेष छूट मिलेगा, ऐसा लोग मानकर चलते हैं। लेकिन इस बजट में इन सबकी पूरी तरह अपेक्षा &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली :</strong> मोदी सरकार के पहले बजट से मध्य वर्ग को मायूसी हाथ लगी है। जहां लोग आय कर में छूट को युक्ति संगत बनाने या उसमें कटौती की उम्मीद कर रहे थे। वहीं, सरकार ने सर्विस टैक्स में बढोतरी कर दी है। अब आम आदमी के रोजमर्रा की सारी चीजें महंगी हो जाएंगी। मोदी सरकार ने पहली बार मुकम्मल बजट पेश किया है। यह बजट न सिर्फ साल 2015-16 के लिए है, बल्कि यह सरकार के अगले पांच सालों का विजन भी प्रस्तुत करता है। रेल बजट की तरह यहां भी मोदी सरकार लोकलुभावन घोषणाओं और वादों से बचती नजर आई।</p>
<p>मध्य वर्ग को बजट के दिन सबसे ज्यादा उम्मीद इस बात की होती है कि उसके रोजमर्रा की कौन सी चीजें सस्ती होंगी या किन चीजों के दाम बढ़ेंगे। टैक्स छूट सीमा कितनी बढ़ेगी, क्योंकि महंगाई तो दिनबदिन बढ़ती जा रही है तो टैक्स की दरों का भी उस हिसाब से युक्तिसंगत होना जरुरी है। लोगों के मन में कहीं यह आस भी होती है कि शायद टैक्स में कुछ छूट मिल जाए। कम से कम महिलाओं को तो कुछ विशेष छूट मिलेगा, ऐसा लोग मानकर चलते हैं। लेकिन इस बजट में इन सबकी पूरी तरह अपेक्षा की गई है।</p>
<p>यहाँ सरकार ने बजट में सुपररिच लोगों पर दो फीसदी सरचार्ज लगाने की घोषणा की है। यह शायद ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर है। इसमें एक तरफ तो ऐसा लग रहा है कि अब अमीरों पर सरकार कठोर हो गई है। लेकिन यहां इस टैक्स से सरकार को मिलेगा क्या। देश के सुपररिच तो इतना भी टैक्स नहीं भरते कि साल के सबसे बड़े टैक्स पेयर बन जाएं।</p>
<p>गौरतलब है कि देश का सबसे ज्यादा टैक्स चुकाने वाला कोई फिल्म स्टार या क्रिकेट स्टार क्यों होता है। इस लिस्ट में किसी बड़े उद्योगपति का नाम क्यों सामने नहीं आता है। फोर्ब्स की लिस्ट में हम तो बड़े-बड़े नाम सुनते हैं, लेकिन ऐसा सुनने में नहीं आता कि फलां उद्योगपति ने इस साल सबसे ज्यादा टैक्स भरा है। इसका कारण है कि सरकार का टैक्स ढांचा ऐसा नहीं है कि वह सुपररिच लोगों से अधिक टैक्स वसूल सके। वे लोग अपनी कमाई को संपत्ति खरीदने, बांड खरीदने, शेयर बाजार में पैसा लगाने या अन्य निवेश करने में लगाते हैं। तो इस प्रकार सरकार को वे अपनी निजी आय के मुकाबले उस पर बहुत कम कर चुकाते हैं, फिर भला इस दो प्रतिशत से क्या हासिल होगा।</p>
<p>इस बजट में सरकार का सारा फोकस जीएसटी लागू करने पर है। लेकिन इसे लागू करना इतना आसान नहीं है और लागू होने के बाद भी करों के मसले इतने उलझे होंगे कि उसका फायदा मिलने में अभी कई साल लगेंगे। दूसरी बात यह है कि यह प्रणाली विकसित देशों में ही अभी तक लागू की गई है। इसे अगर यहां लागू करेंगे तो बड़ी कंपनियों को तो फायदा होगा, लेकिन छोटे और मंझोले व्यापारियों को नुकसान होगा। क्योंकि उन्हें अपनी आय का एक हिस्सा कंप्यूटराइजेशन और जटिल खाता-बही दुरुस्त करने में लगाना पडे़गा। अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो जो भी बड़ी कंपनियां अभी उनसे थोड़ा बहुत माल खरीदती हैं, वो बंद कर देंगी। क्योंकि जीएसटी लागू हो जाने के कारण उन्हें दूसरी बड़ी कंपनियों से ही खरीदने होंगे।</p>
<p>यहाँ सरकार राजकोषीय घाटे को कम से कम रखने पर अत्यधिक जोर दे रही है। लेकिन हमारे देश में औद्योगिक विकास दर लगभग शून्य पर है। इसे आगे बढा़ने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता है। सरकार विदेशी निवेश के नियमों को बदलने और आसान करने की तैयारी कर रही है। लेकिन चाहे देशी निवेश हो या विदेशी निवेश, वो निवेश तभी करेंगे जब उन्हें लाभ की आशा हो। उन्हें बाजार में लाभ तभी दिखेगा जब देश से मंदी के बादल छंटेंगे। ऐसे में देश को मंदी से निकालने के लिए सरकार को खुद ही बड़े पैमाने पर सार्वजनिक क्षेत्रों में निवेश करना होगा। अगर सरकार सार्वजनिक क्षेत्र में निवेश करेगी तो इससे राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी होगी। अगर राजकोषीय घाटा बढ़ने के बावजूद देश में निवेश का माहौल बनता है, देश मंदी से बाहर निकलता है, तो बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा। इस तरीके से हो सकता है को दो-चार साल तक राजकोषीय घाटा बढ़ता जाए, लेकिन अर्थव्यवस्था मजबूत होने से तो वापस सरकार की तिजोरी में ही पैसा आएगा। इसलिए राजकोषीय घाटा कम करने की बजाए अर्थव्यवस्था को गति देने पर ज्यादा फोकस की दरकार है।</p>
<p>कौशल विकास पर जोर देना सरकार का एक स्वागत योग्य कदम है। खासतौर से पिछले दस सालों से विश्वबैंक की भी चिन्ता इसी बात की रही है कि उद्योगों के लिए प्रशिक्षित कामगारों की कमी ना हो। भारत में जब से खेती-किसानी नुकसान का सौदा हुआ है। तब से बड़े पैमाने पर किसानों का शहरों की ओर पलायन हुआ है। यहां आकर वे अप्रशिक्षित दिहाड़ी मजदूर बनते हैं। खेती-किसानी में वे भले ही उन्होंने मास्टरी हासिल किए हो, लेकिन आधुनिक कारखानों और रोजगार धंधों के हिसाब से उनका कौशल और अनुभव शून्य है। इसलिए उनका प्रशिक्षित होना बेहद जरुरी है। ताकि वे कुशल कामगार की श्रेणी में ज्यादा कमाई कर सकें। इससे एक तरफ तो उनकी आर्थिक हालत में सुधार होगा तो वहीं, उद्योगों को भी गति मिलेगी।</p>
<p>साथ ही आधारभूत संरचना में सरकार पीपीपी की बात कर रही है। लेकिन निजी क्षेत्र तो वहीं निवेश करेगा जहां से उसे रिटर्न मिले। उदाहरण के लिए अगर सरकार दिल्ली से मुंबई या मुंबई से अहमदाबाद तक एक्सप्रेसवे तैयार करने को निजी क्षेत्र को बुलाती है तो वहां तो उसे निवेश मिल जाएगा। लेकिन अगर बनारस से पटना के लिए एक्सप्रेस वे बनाना हो या कटक से भुवनेश्वर तक हाईस्पीड रेल चलाना हो। तो उसके लिए भला निजी क्षेत्र क्यों निवेश करेगा, क्योंकि इन जगहों पर रिर्टन मिलने में देर लगेगी। इसलिए निजी क्षेत्र के भरोसे देश का एकसमान विकास संभव नहीं है। इसका फायदा विकसित क्षेत्रों व राज्यों को ही ज्यादा मिलेगा।</p>
<p>इस बजट को परखते हुए यह कहा जा सकता है कि सरकार ने अपने आम बजट में लोकलुभावन घोषणाओं व वादों के जाल में नहीं फंसी है। सरकार का जोर दीर्घकालिक उपाय पर है। लेकिन जब अर्थव्यवस्था में मंदी छाई हो। वैश्विक स्तर पर भी मंदी का माहौल हो और किसी भी देश की अर्थव्यवस्था से उम्मीद की कोई किरण दिख नही रही हो तो ऐसे माहौल में सरकार से परंपरावादी रवैया छोड़कर कुछ अधिक करने की उम्मीद थी।</p>
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		<title>बजट 2015-16 की ख़ास बाते,क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Feb 2015 08:50:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली वित्तीय वर्ष 2015-16 का आम बजट लोकसभा में पेश किया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मोदी सरकार का पहला पूर्ण बजट लोकसभा में पेश कर दिया। बजट पेश करते हुए जेटली ने कहा कि हमारा लक्ष्य 2022 तक सबको घर देना और लोगों को बिजली पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैया करना है। उन्होंने कहा कि हमने महंगाई पर भी काबू पाया है, लेकिन अभी बहुत काम बाकी है। आजादी के 75 साल पूरे होने से पहले सभी लक्ष्य प्राप्त करने का लक्ष्य हमने रखा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश करने के दौरान सरकार की उपलब्धियों गिनाते हुए संसद में एक जुमला भी पेश किया, जिसे सासंदों की खूब वाह-वाही मिली। जेटली ने पिछली यूपीए सरकार की नीतियों की ओर इशारा करते हुए कहा, &#8220;कुछ तो फूल खिलाए हैं, कुछ अभी खिलाने हैं, पर बाग में अब भी कांटे कुछ पुराने हैं।&#8221; बीजेपी सासंदों ने अपनी मेजें थपथपाकर इस जुमले का स्वागत किया। अरुण जेटली के बजट पर भाषण के मुख्य अंश : 1.हमारा लक्ष्य है कि भारत के हर नागरिक के सिर पर छत हो। इसके लिए हमने लक्ष्य रखा है कि 2022 तक सबको घर मिले, को बेघर न हो। &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली: </strong>वित्त मंत्री अरुण जेटली वित्तीय वर्ष 2015-16 का आम बजट लोकसभा में पेश किया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मोदी सरकार का पहला पूर्ण बजट लोकसभा में पेश कर दिया। बजट पेश करते हुए जेटली ने कहा कि हमारा लक्ष्य 2022 तक सबको घर देना और लोगों को बिजली पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैया करना है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि हमने महंगाई पर भी काबू पाया है, लेकिन अभी बहुत काम बाकी है। आजादी के 75 साल पूरे होने से पहले सभी लक्ष्य प्राप्त करने का लक्ष्य हमने रखा है।</p>
<p>वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश करने के दौरान सरकार की उपलब्धियों गिनाते हुए संसद में एक जुमला भी पेश किया, जिसे सासंदों की खूब वाह-वाही मिली।</p>
<p>जेटली ने पिछली यूपीए सरकार की नीतियों की ओर इशारा करते हुए कहा, &#8220;कुछ तो फूल खिलाए हैं, कुछ अभी खिलाने हैं, पर बाग में अब भी कांटे कुछ पुराने हैं।&#8221; बीजेपी सासंदों ने अपनी मेजें थपथपाकर इस जुमले का स्वागत किया।</p>
<p><strong>अरुण जेटली के बजट पर भाषण के मुख्य अंश : </strong></p>
<p>1.हमारा लक्ष्य है कि भारत के हर नागरिक के सिर पर छत हो। इसके लिए हमने लक्ष्य रखा है कि 2022 तक सबको घर मिले, को बेघर न हो। इसके साथ ही लोगों को 24 घंटे बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध हों। हमारा लक्ष्य 2022 तक गांवों और शहरों में छह करोड़ घरों का निर्माण करना है। 2022 तक सभी गांवों को बिजली से जोड़ेंगे।</p>
<p>2.गरीब-जरूरतमंदों के लिए जारी रहेंगी योजनाएं। परिवार के एक सदस्य के लिए जीविका का साधन उपलब्ध कराने का हमारा लक्ष्य है, ताकि हर घर की जीविका चलती रहे। सब्सिडी के लिए JAM (जन धन योजना, आधार और मोबाइल) का इस्तेमाल होगा। मनरेगा योजना भी जारी रहेगी। मनरेगा में कार्य की गुणवत्ता सुधारेंगे। मनरेगा के लिए 34699 करोड़ की व्यवस्था। जनधन योजना में दो लाख का दुर्घटना बीमा। जनधन योजना में 60 साल के बाद पेंशन का प्रावधान जनधन योजना से पोस्ट ऑफिस को जोड़ने का प्रयास।</p>
<p>3.इनकम टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मौजूदा टैक्स छूट बरकरार रहेगी। कॉर्पोरेट टैक्स 30 प्रतिशत से कम करके 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि वित्त मंत्री ने अमीरों की जेब ढीली करने की योजना बनाई है। जिनकी आमदनी एक करोड़ से ऊपर है, उन पर 2 प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाया गया है। सरचार्ज को 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी किया गया है। वहीं सर्विस टैक्स 12.36 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया है।</p>
<p>4.गरीब लोगों की सामाजिक सुरक्षा के लिए अरुण जेटली ने तीन योजनाओं के शुरू करने की बात कही। ये तीन योजनाएं हैं, अटल पेंशन योजना, सुरक्षा बीमा योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना शुरू की जाएगी। इसमें 2 लाख रुपये का कवर दिया जाएगा जिसके लिए सिर्फ 12 रुपये प्रीमियम देना होगा। अटल पेंशन योजना भी शुरू की गई है जिसमें 1 हजार रुपये लोग देंगे और एक हजार रुपये सरकार। वित्त मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य देश के हर नागरिक को बीमा कवर देना है। हालांकि गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को ही प्रधानमंत्री बीमा योजना का लाभ मिलेगा।</p>
<p>5.जेटली ने कहा कि भारत में नए उद्योगों को बढावा देना जरूरी। इसके लिए मैक इन इंडिया को बढ़ाया दिया जाएगा, जिससे युवाओं को रोजगार मिलेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी निवेश बढ़ाने की जरूरत। राष्ट्रीय स्किल मिशन योजना बनाया जाएगा।</p>
<p>6.वित्त मंत्री ने कहा कि किसानों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता गहरी है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड शुरू किए जाएंगे। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए 3000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया है।</p>
<p>7.मोदी सरकार सब्सिडी समाप्त करने नहीं जा रही है, लेकिन जेटली का कहना है कि इसे कम करने की जरूरत है। जेटली ने कहा कि उच्च आय वाले स्वेच्छा से LPG सब्सिडी छोड़ें। वित्त मंत्री ने कहा कि जल्द ही ई-बिजली पोर्टल की शुरुआत होगी।</p>
<p>8.बजट में अल्पसंख्यकों का भी ध्यान रखा गया है। वित्त मंत्री ने अल्पसंंख्यक युवाओं के लिए मंजिल योजना को 3 हजार 738 करोड़ रुपये का आवंटन।</p>
<p>9.वित्तीय घाटा तीन फीसदी से कम करेंगे। अगले साल सातवां वेतन आयोग लागू करेंगे। वायदा बाजार को सेबी में विलय का प्रस्ताव रखा गया है। रखे हुए सोने के बदले ब्याज दिया जाएगा। गोल्ड बॉन्ड जारी होगा और गोल्ड एकाउंट पर ब्याज भी मिलेगा।</p>
<p>10.जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और तमिलनाडु में एम्स जैसे संस्थान बनेंगे। अरुणाचल प्रदश में फिल्म इंस्टीट्यूट बनेगा। जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश में आइआइएम बनाया जाएगा। धनबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ माइंस को आईआईटी का दर्जा देने का प्रस्ताव दिया गया है।</p>
<p>11.वाराणसी-अमृतसर की धरोहरों को वर्ल्ड क्लास बनाया जाएगा। इसमें जलियां वाला बाग, एलिफेंटा केव जैसे स्मारक शामिल हैं।</p>
<p>12.महिला सुरक्षा का भी बजट में विशेष ध्यान रखा गया। महिला सुरक्षा के लिए निर्भया फंड में 1000 करोड़ रुपये आवंटन करने का प्रस्ताव बजट में दिया गया है।</p>
<p>13.अब गंगा की हालत शायद सुधर जाए। गंगा को साफ करने पर भी मोदी सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। गंगा साफ करने के लिए नमामि गंगे योजना शुरू की गई है, जिसके लिए 4 हजार 71 करोड़ रुपये का आवंटन किया जाएगा।</p>
<p>14.हर गांव में एक अस्पताल बनाने का लक्ष्य रखा गया है। गांवों और शहरों में संचार की एक जैसी व्यवस्था करने की भी योजना है। एक लाख किलोमीटर तक सड़क बनाने का लक्ष्य है। हर पांच किलोमीटर के दायरे में एक सेकेंडरी स्कूल बनाने का इरादा भी जताया गया है। जेटली ने कहा कि 6 करोड़ शौचालय बनाना हमारा लक्ष्य है।</p>
<p>15.मोदी सरकार ने एक बार फिर काले धन पर अपनी गंभीरता जाहिर की है। जेटली ने बताया  गया कि काला धन संबंधी सूचना छिपाने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है। वहीं टैक्स चोरों के लिए 10 साल की कड़ी सजा। घरेलू काला धन पर रोक के लिए बेनामी लेन-देन (निषेध) विधेयक लाने की भी योजना है।</p>
<p>बजट में कई चीजें महंगी करके वित्त मंत्री ने आम आदमी की मुसीबत बढ़ाई है। जानिए इस बार बजट में क्या-क्या हुआ महंगा।</p>
<p><strong>ये हुआ मंहगा</strong></p>
<p>1. रेस्टोेरेंट में खाना<br />
2. कम्यूमहं टर, लैपटॉप<br />
3. मोबाइल फोन<br />
4. दवाइएं<br />
5. घर लेना महंगा हुआ<br />
6. पान मसाला, गुटखा और सिगरेट<br />
7. केबल टीवी और WiFi<br />
8. हवाई यात्रा<br />
9. टीवी<br />
10. इंश्योारेंस पॉलिसी<br />
11. फोन और मोबाइल के बिल<br />
12. ट्रैवलिंग<br />
13. ड्राईक्लीबन<br />
14. जिम<br />
15. होटल में ठहरना<br />
16. ब्यू री पार्लर </p>
<p>आम आदमी को राहत देते हुए जेटली ने बजट में कई चीजें सस्तीत की हैं। जानिए बजट में क्या&#8211;क्याी हुआ सस्ता#।</p>
<p><strong>ये हुआ हमारे लिए सस्ता</strong></p>
<p>1.  चमड़े का समान,<br />
2. 1000 रुपए उपर चमड़ का समान सस्ता होगा।<br />
3. विदेश से आने वाले कलपुर्जे सस्ता होगा।<br />
4. डिजिटल स्टिल कैमरा।<br />
5. एंबुलेंस सर्विस सस्ती हुई, चिड़ियाघर जाना।<br />
6. अगरबत्ती।<br />
7. निर्यात के लिए सामान की ढुलाई सस्ती कृत्रिम हृदय ।<br />
8. एलसीडी<br />
9. एलईडी टीवी<br />
10. निर्यात के लिए सामान की ढुलाई </p>
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