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	<title>दवा की कीमत Archives - www.aajkiawaaz.com</title>
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		<title>जीवन रक्षक दवाओं तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करने पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, केंद्र और DCGI को जारी किया नोटिस</title>
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		<dc:creator><![CDATA[आज की आवाज़ टीम]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Jul 2026 10:44:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता और उनकी कीमतों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और DCGI को नोटिस जारी किया। जानिए क्या है पूरा मामला और कोर्ट ने क्यों दिए अहम निर्देश। नई दिल्ली: देशभर में जीवन रक्षक दवाओं (Life-Saving Medicines) की उपलब्धता और उनकी बढ़ती कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में केंद्र सरकार और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार) से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए देशव्यापी दिशा-निर्देश जारी करने पर भी विचार करेगा। क्या है पूरा मामला? यह मामला केरल के एर्नाकुलम की रहने वाली एक ब्रेस्ट कैंसर पीड़ित महिला की याचिका से जुड़ा है। महिला ने जून 2022 में केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रिबोसिक्लिब (Ribociclib) और एबेमासिक्लिब (Abemaciclib) जैसी जीवन रक्षक दवाओं की कीमत इतनी अधिक है कि आम मरीज इनका खर्च नहीं उठा सकते। याचिका के अनुसार इन दवाओं पर हर महीने करीब 1.5 लाख रुपये का खर्च आता है, &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता और उनकी कीमतों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और DCGI को नोटिस जारी किया। जानिए क्या है पूरा मामला और कोर्ट ने क्यों दिए अहम निर्देश।</p>
<p>नई दिल्ली: देशभर में जीवन रक्षक दवाओं (Life-Saving Medicines) की उपलब्धता और उनकी बढ़ती कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में केंद्र सरकार और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार) से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए देशव्यापी दिशा-निर्देश जारी करने पर भी विचार करेगा।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong></p>
<p>यह मामला केरल के एर्नाकुलम की रहने वाली एक ब्रेस्ट कैंसर पीड़ित महिला की याचिका से जुड़ा है। महिला ने जून 2022 में केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रिबोसिक्लिब (Ribociclib) और एबेमासिक्लिब (Abemaciclib) जैसी जीवन रक्षक दवाओं की कीमत इतनी अधिक है कि आम मरीज इनका खर्च नहीं उठा सकते।</p>
<p>याचिका के अनुसार इन दवाओं पर हर महीने करीब 1.5 लाख रुपये का खर्च आता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीज इलाज से वंचित हो जाते हैं।</p>
<p>दुर्भाग्यवश, वर्ष 2022 के अंत में याचिकाकर्ता महिला का निधन हो गया।</p>
<p><strong>महिला की मौत के बाद भी जारी रही सुनवाई</strong></p>
<p>याचिकाकर्ता की मृत्यु के बावजूद केरल हाई कोर्ट ने इस मुद्दे को सार्वजनिक महत्व का मानते हुए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामला दर्ज किया और सुनवाई जारी रखी।</p>
<p>हालांकि जनवरी 2023 से अब तक यह मामला 57 बार सुनवाई सूची में शामिल हुआ, लेकिन किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सका। इसी देरी को गंभीर मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करने का फैसला किया।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि यदि जीवन रक्षक इलाज से जुड़ा मामला याचिकाकर्ता के जीवित रहते तय नहीं हो पाता, तो यह न्याय व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।</p>
<p>कोर्ट ने कहा कि:</p>
<ul>
<li>जीवन रक्षक दवाओं तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।</li>
<li>अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जा सकती।</li>
<li>ऐसे मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए देशभर में एक समान दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।</li>
</ul>
<p><strong>केरल हाई कोर्ट को भी दिए निर्देश</strong></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह अपने समक्ष लंबित इस मामले की जल्द सुनवाई कर अंतिम आदेश पारित करे।</p>
<p>साथ ही सर्वोच्च न्यायालय अब यह भी तय करेगा कि भविष्य में जीवन रक्षक उपचार, गंभीर बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को कैसे तेज और प्रभावी बनाया जाए।</p>
<p><strong>मरीजों को मिल सकती है बड़ी राहत</strong></p>
<p>यदि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में व्यापक दिशा-निर्देश जारी करता है, तो इसका लाभ देशभर के लाखों मरीजों को मिल सकता है। इससे महंगी दवाओं की उपलब्धता, कीमतों के नियमन और समय पर न्याय मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव संभव हैं।</p>
<p><strong>निष्कर्ष</strong></p>
<p>जीवन रक्षक दवाओं की बढ़ती कीमत और उनकी सीमित पहुंच लंबे समय से स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी चुनौती रही है। सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान लेना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर केंद्र सरकार और DCGI के जवाब तथा अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी है, जो भविष्य में स्वास्थ्य अधिकार और मरीजों की पहुंच से जुड़े मामलों के लिए मिसाल बन सकता है।</p>
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