Sonam Wangchuk Ends Hunger Strike: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना क्यों माने सोनम वांगचुक? वीडियो में बताई पूरी वजह

सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद भूख हड़ताल समाप्त करने की वजह बताई। उन्होंने कहा कि बच्चों पर केस न हो और संसद में परीक्षा प्रणाली पर चर्चा हो, इसलिए उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला लिया।

नई दिल्ली: मशहूर शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चली अपनी भूख हड़ताल गुरुवार (23 जुलाई) की रात समाप्त कर दी। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। इसके बाद शुक्रवार सुबह वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पूरी हुए बिना यह फैसला क्यों लिया।

“मेरे सामने सिर्फ दो रास्ते थे”

वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर उन्हें सरकार की ओर से कोई निश्चित आश्वासन नहीं मिला था।

उन्होंने कहा,

“मेरे सामने सिर्फ दो रास्ते थे—या तो मैं अनशन जारी रखकर अपनी जान गंवा दूं और बच्चों पर केस होने दूं, या फिर आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए जीवित रहूं।”

वांगचुक ने बताया कि हजारों लोगों ने उनसे अपील की कि संघर्ष को जारी रखने के लिए उनका जीवित रहना ज्यादा जरूरी है।

“इस्तीफा नहीं देने से नुकसान उनका होगा”

सोनम वांगचुक ने कहा कि वह इस आंदोलन को असफल नहीं मानते।

उनके अनुसार,

“अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो उसका नुकसान हमें या छात्रों को नहीं, बल्कि उन्हें खुद होगा। अगर वे इस्तीफा दे देते तो उनकी जवाबदेही का सवाल वहीं खत्म हो जाता।”

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति का इस्तीफा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

बच्चों पर केस न हो, यही सबसे बड़ी प्राथमिकता थी

संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए वांगचुक ने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यह था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं पर कोई आपराधिक मामला दर्ज न हो।

उन्होंने कहा,

“लद्दाख में हमने देखा है कि एक एफआईआर किसी युवा का पूरा भविष्य प्रभावित कर सकती है। मैं नहीं चाहता था कि हमारे बच्चों का भविष्य कानूनी मामलों में उलझ जाए।”

सरकार से किन बातों पर मिला आश्वासन?

सोनम वांगचुक ने बताया कि सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों की ओर से उन्हें कुछ महत्वपूर्ण आश्वासन मिले हैं।

इनमें प्रमुख बिंदु शामिल हैं—

  • भारतीय संसद में परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही के मुद्दे पर चर्चा होगी।
  • शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
  • NEET पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के मुद्दों पर संसद में चर्चा होगी।
  • आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए सहायता और मुआवजे के मुद्दे पर सरकार विचार करेगी।

संघर्ष जारी रहेगा: वांगचुक

सोनम वांगचुक ने कहा कि अनशन समाप्त होने का मतलब आंदोलन का अंत नहीं है।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए वे आगे भी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

मुख्य बातें (Highlights)

  • सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद भूख हड़ताल समाप्त की।
  • कहा- “मेरे सामने दो ही रास्ते थे—मर जाऊं या संघर्ष जारी रखने के लिए जिंदा रहूं।”
  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला।
  • छात्रों पर केस न हो, इसे सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया।
  • संसद में परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही पर चर्चा का भरोसा मिलने की बात कही।